यूपी बोर्ड मूल्यांकन में भावुक अपील: कापियों में लिखी जा रही पास करने की गुहार
मेरठ। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की वर्ष 2026 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य इन दिनों मेरठ जनपद में तेजी से जारी है। लेकिन इस बार मूल्यांकन के दौरान परीक्षकों के सामने एक अलग ही तस्वीर देखने को मिल रही है। कई परीक्षार्थी अपनी उत्तर पुस्तिकाओं में सवालों के जवाब लिखने के बजाय भावुक अपील और निजी परिस्थितियों का जिक्र करते हुए पास करने की गुहार लगा रहे हैं।
परीक्षकों के अनुसार, बड़ी संख्या में ऐसी कापियां सामने आ रही हैं जिनमें विद्यार्थी अपनी आर्थिक स्थिति, पारिवारिक समस्याओं और व्यक्तिगत संघर्षों का हवाला देकर उनसे पास करने की अपील कर रहे हैं। यह स्थिति मूल्यांकन प्रक्रिया में चर्चा का विषय बनी हुई है।
“मैडम जी, मुझे पास कर दीजिए” जैसी अपीलें
एक परीक्षार्थी ने अपनी उत्तर पुस्तिका में लिखा, “मैडम जी, आप बहुत दयालु हैं। कृपया पुण्य कमाने के लिए मुझे पास कर दीजिए।” इस छात्र ने अपने आपको अत्यंत गरीब बताते हुए अपनी पारिवारिक स्थिति का विस्तार से उल्लेख किया और परीक्षक से सहानुभूति की उम्मीद जताई।
इसी तरह एक अन्य छात्र ने अपनी कॉपी में सवालों के उत्तर देने के बजाय अपनी समस्याओं को इस तरह लिखा जैसे वह किसी प्रश्न का उत्तर दे रहा हो। उसने परीक्षक को धन्यवाद देते हुए लिखा कि “आप मुझे पास कर देंगे तो मैं अगली बार अच्छी तरह पढ़ाई करूंगा।”
खाली कापियों में भी लिखी जा रही अपील
मूल्यांकन में लगे शिक्षकों का कहना है कि कई कापियां ऐसी भी मिल रही हैं, जिनमें केवल एक-दो लाइन लिखी गई है और बाकी पूरी कॉपी खाली छोड़ दी गई है। इन खाली कापियों में भी छात्र अपनी मजबूरी बताते हुए पास करने की अपील कर रहे हैं।
कुछ छात्रों ने अपनी कॉपी में लिखा है कि वे पारिवारिक समस्याओं, आर्थिक तंगी या मानसिक तनाव के कारण पढ़ाई नहीं कर पाए, इसलिए उन्हें पास कर दिया जाए।
परीक्षकों के बीच बना चर्चा का विषय
इस तरह की अपीलें मूल्यांकन कार्य में लगे शिक्षकों के बीच चर्चा का विषय बन गई हैं। हालांकि, परीक्षक स्पष्ट रूप से यह भी कह रहे हैं कि उत्तर पुस्तिका का मूल्यांकन केवल लिखे गए उत्तरों के आधार पर ही किया जाता है और नियमों के अनुसार ही अंक दिए जाते हैं।
एक वरिष्ठ परीक्षक ने बताया कि भावनात्मक अपीलों का असर मूल्यांकन पर नहीं पड़ता, क्योंकि बोर्ड के सख्त दिशा-निर्देश हैं और पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है।
पांच केंद्रों पर जारी है मूल्यांकन कार्य
मेरठ जिले में कुल पांच मूल्यांकन केंद्रों पर यह प्रक्रिया जारी है। सोमवार को भी सभी केंद्रों पर कापियों की जांच का कार्य किया गया। आंकड़ों के अनुसार, हाईस्कूल की 11,482 और इंटरमीडिएट की 23,883 उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया गया।
मूल्यांकन कार्य में कुल 2578 उप प्रधान परीक्षक और परीक्षक नियुक्त किए गए हैं। हालांकि, सोमवार को 1853 परीक्षक ही उपस्थित रहे, जबकि 725 परीक्षक अनुपस्थित पाए गए।
18 मार्च से चल रहा मूल्यांकन, 1 अप्रैल तक लक्ष्य
जिले में उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन का कार्य 18 मार्च से शुरू हुआ था, जिसे 1 अप्रैल तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रशासन की ओर से निर्देश दिए गए हैं कि समय सीमा के भीतर मूल्यांकन कार्य को पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ पूरा किया जाए।
शिक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
इस तरह की घटनाएं शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि छात्रों का इस तरह उत्तर पुस्तिकाओं में अपील लिखना उनकी तैयारी की कमी और मानसिक दबाव को दर्शाता है।
यह स्थिति इस बात की ओर भी संकेत करती है कि छात्रों को परीक्षा के प्रति सही मार्गदर्शन और मानसिक समर्थन की आवश्यकता है, ताकि वे अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकें और ऐसे उपायों का सहारा न लें।
फिलहाल, यूपी बोर्ड का मूल्यांकन कार्य अपने अंतिम चरण में है और जल्द ही परीक्षार्थियों को उनके परिणाम का इंतजार खत्म होने वाला है।
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