गाजीपुर ट्रांसफार्मर चोरी कांड में बड़ा खुलासा विभागीय जांच में एसडीओ दोषी
गाजीपुर: उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जनपद में बिजली विभाग से जुड़े बहुचर्चित ट्रांसफार्मर चोरी प्रकरण में आखिरकार बड़ा खुलासा सामने आया है। करीब आठ महीने तक दबे रहे इस मामले में विभागीय जांच ने कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं। जांच रिपोर्ट में उपखंड अधिकारी को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस खुलासे के बाद विभाग की कार्यप्रणाली और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
जुलाई 2025 में सामने आया था मामला
यह पूरा मामला जुलाई 2025 का है जब विद्युत वितरण खंड जंगीपुर के अंतर्गत बेन सागर फीडर क्षेत्र से एक साथ 10 बिजली ट्रांसफार्मर रहस्यमय तरीके से गायब हो गए थे। इतनी बड़ी संख्या में ट्रांसफार्मरों की चोरी से इलाके में हड़कंप मच गया था। प्रारंभिक स्तर पर काफी प्रयास किए गए लेकिन चोरी हुए ट्रांसफार्मरों का कोई ठोस सुराग उस समय नहीं मिल सका।
समय पर नहीं हुई कार्रवाई
घटना के बाद तत्कालीन जूनियर इंजीनियर ने 19 जुलाई 2025 को उपखंड अधिकारी को लिखित सूचना दी थी और नोनहरा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए प्रार्थना पत्र भी सौंपा था। इसके बावजूद न तो समय पर एफआईआर दर्ज की गई और न ही मामले में कोई ठोस कदम उठाया गया। आरोप है कि एसडीओ स्तर पर इस गंभीर प्रकरण को नजरअंदाज किया गया जिससे मामला धीरे धीरे ठंडे बस्ते में चला गया।
स्थानीय शिकायतों से फिर उठा मुद्दा
समय बीतने के साथ क्षेत्र में बिजली आपूर्ति से जुड़ी समस्याएं बढ़ने लगीं। ट्रांसफार्मर जलने और बार बार बिजली बाधित होने की शिकायतें सामने आने लगीं। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ी और मामला फिर चर्चा में आया। जनवरी 2026 में गाजीपुर के सांसद अफजाल अंसारी ने दिशा समिति की बैठक में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जिसके बाद विभाग हरकत में आया और जांच के आदेश दिए गए।
जांच में सामने आई लापरवाही
अधीक्षण अभियंता विवेक खन्ना के निर्देश पर गठित जांच समिति ने जब पूरे मामले की जांच की तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। जांच में पाया गया कि ट्रांसफार्मर चोरी की घटना में गंभीर लापरवाही बरती गई और कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध रही। रिपोर्ट के अनुसार एसडीओ प्रमोद यादव की भूमिका इस मामले में संदेह के घेरे में आई और उन्हें दोषी माना गया है। इसके अलावा कुछ लाइनमैनों की संलिप्तता की भी जांच जारी है।
आंशिक रिकवरी और आगे की कार्रवाई
अधीक्षण अभियंता ने जानकारी दी कि चोरी हुए ट्रांसफार्मरों में से पांच से छह की रिकवरी कर ली गई है जबकि बाकी की तलाश जारी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दोषी पाए गए अधिकारी के खिलाफ रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है और जल्द ही निलंबन या अन्य विभागीय कार्रवाई की संभावना है।
प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने विभागीय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि समय रहते शिकायतों पर ध्यान दिया जाता तो इतनी बड़ी चोरी की घटना को रोका जा सकता था। यह मामला यह भी दर्शाता है कि लापरवाही और देरी किस तरह बड़ी समस्या का रूप ले सकती है। फिलहाल विभाग की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं जो इस मामले में जिम्मेदारी तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
पृष्ठभूमि और व्यापक प्रभाव
गाजीपुर जैसे जिलों में बिजली आपूर्ति का बड़ा हिस्सा ट्रांसफार्मरों पर निर्भर करता है। ऐसे में उनकी चोरी या क्षति सीधे तौर पर ग्रामीण और शहरी उपभोक्ताओं को प्रभावित करती है। इस घटना के बाद विभाग के भीतर निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने और जवाबदेही तय करने की जरूरत महसूस की जा रही है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
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