36 साल पुराने देवकली पंप कैनाल कांड में अदालत में पेश हुए पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह खुद को बताया निर्दोष
वाराणसी/गाजीपुर: बहुचर्चित और लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया में चल रहे देवकली पंप कैनाल कांड में मंगलवार को उस समय अहम मोड़ आया जब पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी नूतन द्विवेदी की अदालत में पेश हुए। न्यायालय में उन्होंने अपना बयान दर्ज कराते हुए स्वयं को निर्दोष बताया और कहा कि उनका इस घटना से कोई संबंध नहीं है। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने अगली तारीख 14 मई निर्धारित की है।
करीब तीन दशक से अधिक पुराने इस मामले को लेकर एक बार फिर अदालत परिसर में हलचल तेज रही। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने अपने अपने तर्क रखे। अदालत में आरोपी का बयान दर्ज होने के बाद अब न्यायालय अगली सुनवाई में आगे की प्रक्रिया पूरी करेगा।
3 दिसंबर 1990 को हुई थी चर्चित घटना
देवकली पंप कैनाल कांड की शुरुआत 3 दिसंबर 1990 की सुबह हुई घटना से जुड़ी है। मामले के वादी सरफराज अंसारी ने सैदपुर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि वह धरम्मरपुर देवकली पंप कैनाल परियोजना के अंतर्गत नहर निर्माण कार्य की निगरानी कर रहे थे। सुबह लगभग साढ़े सात बजे एक नीले रंग की कार मौके पर पहुंची जिसमें सवार लोग हथियारों से लैस थे।
एफआईआर के अनुसार कार से उतरे आरोपियों में त्रिभुवन सिंह विजयशंकर सिंह बृजेश सिंह और दो अज्ञात व्यक्ति शामिल थे। आरोप है कि सभी ने मिलकर सरफराज अंसारी के साथ मारपीट की और वहां मौजूद मजदूरों में दहशत फैला दी। शिकायत में यह भी कहा गया कि आरोपियों ने सरफराज के बैग में रखी नकदी छीन ली और निर्माण कार्य रुकवा दिया।
घटना के दौरान मौके पर खड़ी एक ट्रक के टायर में गोली मारकर उसे क्षतिग्रस्त किए जाने का भी आरोप लगाया गया। वहीं सरफराज अंसारी के सहयोगी के साथ भी मारपीट कर उसे वहां से भगा देने की बात प्राथमिकी में दर्ज की गई थी। घटना के बाद इलाके में तनाव और भय का माहौल बन गया था।
विवेचना में सामने आए थे कई नाम
पुलिस विवेचना के दौरान मामले में बृजेश सिंह त्रिभुवन सिंह और विजयशंकर सिंह के नाम प्रकाश में आए। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। इसके बाद मामला अदालत में विचाराधीन रहा।
हालांकि त्रिभुवन सिंह और विजयशंकर सिंह द्वारा दाखिल की गई रिट याचिकाएं उच्च न्यायालय में लंबित होने के कारण उनकी पत्रावली अलग कर दी गई। ऐसे में फिलहाल अदालत में केवल बृजेश सिंह के खिलाफ विचारण की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
अभियोजन पक्ष ने पेश किए नौ गवाह
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल नौ गवाहों को अदालत में प्रस्तुत किया गया। गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन ने अपने पक्ष को मजबूत करने का प्रयास किया। अभियोजन की गवाही पूरी होने के बाद अदालत ने आरोपी बृजेश सिंह का बयान दर्ज किया।
अदालत में दर्ज अपने बयान में बृजेश सिंह ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए खुद को निर्दोष बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें राजनीतिक और व्यक्तिगत कारणों से इस मामले में फंसाया गया है। हालांकि मामले में अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा सभी साक्ष्यों और तथ्यों के परीक्षण के बाद ही लिया जाएगा।
14 मई को होगी अगली सुनवाई
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी नूतन द्विवेदी की अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 14 मई की तारीख तय की है। न्यायालय ने संबंधित पत्रावली अगली तिथि पर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। लंबे समय से लंबित इस मामले पर अब सभी की नजरें आगामी सुनवाई पर टिकी हुई हैं जहां न्यायिक प्रक्रिया का अगला चरण आगे बढ़ेगा।
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