मिर्जापुर में अवैध रूप से रह रहे चार बांग्लादेशी नागरिक गिरफ्तार फर्जी दस्तावेजों का खुलासा
मिर्जापुर: अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। कटरा कोतवाली पुलिस ने रेलवे स्टेशन मिर्जापुर के पास से चार बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है जो पिछले करीब पांच वर्षों से फर्जी पहचान के सहारे क्षेत्र में रहकर मजदूरी कर रहे थे। पूरे मामले का खुलासा मंगलवार को पुलिस लाइन स्थित सभागार में पुलिस अधीक्षक अपर्णा रजत कौशिक ने किया।
संदिग्ध युवक से शुरू हुई कार्रवाई
पुलिस अधीक्षक के अनुसार कटरा कोतवाली क्षेत्र में संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की नियमित जांच के दौरान पुलिस टीम को एक युवक संदिग्ध स्थिति में दिखाई दिया। पुलिस ने जब उसे रोककर पूछताछ की तो उसने अपना नाम मो सबूज हुसैन निवासी रंगपुर बांग्लादेश बताया। उसके जवाबों में असंगति मिलने पर पुलिस ने गहराई से जांच शुरू की।
तीन अन्य साथियों की गिरफ्तारी
सबूज हुसैन से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने उसके तीन अन्य साथियों को भी गिरफ्तार कर लिया। इनमें सब्बीर हुसैन जय दास और नरेश दास शामिल हैं। पुलिस के अनुसार सब्बीर और सबूज सगे भाई हैं जबकि जय दास और नरेश दास चाचा भतीजा हैं। चारों लंबे समय से क्षेत्र में रह रहे थे और अपनी असली पहचान छिपाए हुए थे।
सीमा पार कर भारत में अवैध प्रवेश का खुलासा
पूछताछ में यह तथ्य सामने आया कि सभी आरोपी अवैध रूप से बांग्लादेश से भारत में दाखिल हुए थे। इन्होंने दलालों को पैसे देकर नदी के रास्ते सीमा पार की और पश्चिम बंगाल के रास्ते देश में प्रवेश किया। इसके बाद रेलवे मार्ग का उपयोग करते हुए पहले आगरा पहुंचे और फिर रोजगार की तलाश में मिर्जापुर आ गए। यहां पड़री क्षेत्र के डगमगपुर स्थित एक क्रशर प्लांट में मजदूरी करने लगे और स्थानीय लोगों के बीच अपनी पहचान छिपाकर रहने लगे।
फर्जी दस्तावेज तैयार कर बनाई पहचान
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपियों ने कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर अपनी नई पहचान बनाई थी। इन्होंने बिहार के कैमूर जिले के ग्राम दसौती पोस्ट सीधी का फर्जी पता दिखाकर आधार कार्ड और पैन कार्ड बनवा लिए थे। इन दस्तावेजों का उपयोग कर वे स्थानीय स्तर पर लंबे समय तक काम करते रहे और किसी को संदेह नहीं हुआ।
मोबाइल से मिले अहम साक्ष्य
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से चार मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इन मोबाइलों में आधार कार्ड पैन कार्ड के साथ साथ बांग्लादेश की वोटर आईडी और पासपोर्ट से संबंधित दस्तावेज भी पाए गए हैं। इन साक्ष्यों के आधार पर पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है और दस्तावेज तैयार करने वाले नेटवर्क की तलाश में जुटी है।
गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज
पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ जालसाजी फर्जी दस्तावेज तैयार करने गलत पहचान बनाकर रहने नागरिकता अधिनियम और विदेशी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी गई है और अन्य संभावित सहयोगियों की तलाश जारी है।
पुलिस अधीक्षक का बयान और आगे की कार्रवाई
पुलिस अधीक्षक अपर्णा रजत कौशिक ने बताया कि पूछताछ के दौरान यह जानकारी भी मिली है कि पश्चिम बंगाल के रास्ते कई अन्य लोग भी भारत में अवैध रूप से प्रवेश कर विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। कुछ लोग काम के बाद वापस लौट जाते हैं जबकि कई लोग फर्जी पहचान बनाकर लंबे समय तक यहीं रह जाते हैं। ऐसे में व्यापक स्तर पर जांच की आवश्यकता है जिससे इस नेटवर्क का पूरी तरह खुलासा किया जा सके।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने श्रमिकों के सत्यापन की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं। बिना पर्याप्त जांच के बाहरी व्यक्तियों को काम पर रखना सुरक्षा के लिए जोखिम बन सकता है। पुलिस अब उन लोगों और संस्थानों की भी जांच कर रही है जिन्होंने इन आरोपियों को काम दिया और उनकी पहचान की पुष्टि नहीं की।
पृष्ठभूमि और व्यापक महत्व
मिर्जापुर सहित प्रदेश के कई जिलों में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। इस कार्रवाई को उसी अभियान का हिस्सा माना जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य न केवल अवैध प्रवासियों की पहचान करना है बल्कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोहों पर भी कार्रवाई करना है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
यह मामला दर्शाता है कि सुरक्षा और पहचान सत्यापन को लेकर सतर्कता बरतना कितना आवश्यक है। पुलिस की इस कार्रवाई से क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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