पीड़ित मां की पुकार सुन भावुक हुए पिछड़ा आयोग सदस्य सतेंद्र बारी, अधिकारियों को दो टूक संदेश, अन्याय हुआ तो होगी सख्त कार्रवाई
प्रतापगढ़ से पहुंची वृद्ध महिला की पीड़ा सुनते ही दिखी संवेदनशीलता, बोले गरीब और बुजुर्ग माताओं के सम्मान से कोई समझौता नहीं
प्रतापगढ़/वाराणसी: जनसेवा केवल पद और जिम्मेदारी तक सीमित नहीं होती, बल्कि समाज के सबसे कमजोर और पीड़ित वर्ग की आवाज को सुनकर उसके साथ खड़ा होना ही एक जनप्रतिनिधि की वास्तविक पहचान मानी जाती है। ऐसा ही एक भावनात्मक और संवेदनशील दृश्य उस समय देखने को मिला जब जनपद प्रतापगढ़ से अपनी व्यथा लेकर पहुंची एक वृद्ध मां की पीड़ा सुनकर पिछड़ा आयोग के सदस्य सतेंद्र बारी उर्फ बीनू जी भावुक हो उठे। पीड़ित महिला की समस्या सुनने के बाद उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को स्पष्ट और सख्त शब्दों में निर्देश दिए कि किसी भी हालत में उस मां के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मामले के दौरान उपस्थित लोगों ने उस पल को केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि मानवीय संवेदनाओं से भरा दृश्य बताया। वृद्ध महिला अपनी समस्या और पीड़ा लेकर पहुंची थी। उसकी बातों में दर्द था और आंखों में उम्मीद दिखाई दे रही थी। जैसे ही सतेंद्र बारी ने उसकी पूरी बात सुनी, उन्होंने तत्काल अधिकारियों से संपर्क कर मामले को गंभीरता से लेने के निर्देश दिए। इस दौरान उनके शब्दों में केवल प्रशासनिक सख्ती नहीं बल्कि एक बेटे जैसी संवेदना भी दिखाई दी।
कान खोलकर सुन लें अधिकारी, किसी मां की आंखों में आंसू नहीं आने दूंगा
पीड़ित महिला की बात सुनने के बाद सतेंद्र बारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सभी संबंधित अधिकारी यह बात गंभीरता से सुन लें कि उनके रहते किसी भी गरीब और बुजुर्ग मां की आंखों में आंसू नहीं आने दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर प्रताड़ना, उत्पीड़न या अन्याय की शिकायत सामने आई तो संबंधित लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
उन्होंने कहा कि समाज में सबसे अधिक सम्मान मां का होता है और जो समाज अपनी माताओं के सम्मान और सुरक्षा को सुनिश्चित नहीं कर सकता, वह कभी मजबूत नहीं हो सकता। उन्होंने दोहराया कि प्रशासनिक व्यवस्था का उद्देश्य केवल फाइलों का निस्तारण नहीं बल्कि जरूरतमंद और पीड़ित लोगों को न्याय दिलाना भी है।
मौके पर ही पट्टी पुलिस अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश
मामले को गंभीर मानते हुए सतेंद्र बारी ने मौके पर ही पट्टी क्षेत्र से जुड़े पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि पीड़ित महिला के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही या अन्याय की स्थिति सामने नहीं आनी चाहिए। यदि दोबारा किसी प्रकार की शिकायत मिली तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
उनके निर्देशों के दौरान वहां मौजूद लोगों ने देखा कि वह केवल औपचारिकता निभाने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि पूरे मामले को गंभीरता से लेकर त्वरित कार्रवाई पर जोर देते रहे। यही कारण रहा कि वहां मौजूद लोगों के बीच भी उनकी कार्यशैली को लेकर चर्चा होती रही।
जनसेवा की राजनीति में संवेदनशील चेहरा माने जाते हैं सतेंद्र बारी
सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े लोग बताते हैं कि सतेंद्र बारी उर्फ बीनू जी लंबे समय से आम लोगों की समस्याओं को सुनने और उनके समाधान के प्रयासों को लेकर सक्रिय रहते हैं। विशेष रूप से गरीब, बुजुर्ग और जरूरतमंद लोगों के मुद्दों पर उनकी सक्रियता कई बार चर्चा का विषय रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी भी पीड़ित व्यक्ति की बात सुनने के दौरान उनके व्यवहार में सहजता और संवेदनशीलता दिखाई देती है। यही कारण है कि लोग अपनी समस्याओं को लेकर उनसे सीधे संपर्क करने में विश्वास जताते हैं।
भावनात्मक दृश्य बना चर्चा का विषय
प्रतापगढ़ से आई वृद्ध महिला की पीड़ा और उस पर दिखाई गई संवेदनशीलता अब चर्चा का विषय बनी हुई है। कई लोगों ने इसे केवल एक प्रशासनिक हस्तक्षेप नहीं बल्कि एक मानवीय पहल बताया। लोगों का कहना है कि जब जनप्रतिनिधि संवेदनशीलता के साथ जनता के बीच खड़े दिखाई देते हैं, तब लोगों का भरोसा व्यवस्था पर और मजबूत होता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि जनप्रतिनिधि की असली पहचान केवल राजनीतिक मंचों पर नहीं बल्कि आम और पीड़ित लोगों के बीच उनके व्यवहार और संवेदनशीलता से तय होती है।
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