वाराणसी में कोडीन कफ सिरप कांड पर बड़ा एक्शन संपत्तियों की सीलिंग शुरू शराब ठेके बंद परिवार पर कसा शिकंजा
वाराणसी: देशभर में चर्चित कोडीन कफ सिरप कांड को लेकर अब प्रशासन ने कार्रवाई का दायरा तेजी से बढ़ा दिया है। समाजवादी पार्टी व्यापार सभा के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप जायसवाल के भतीजे वैभव जायसवाल की गिरफ्तारी के बाद पुलिस और आबकारी विभाग ने पूरे नेटवर्क पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर अवैध कमाई से अर्जित संपत्तियों को चिन्हित कर उनकी सीलिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस कार्रवाई ने मामले को और गंभीर बना दिया है और पूरे नेटवर्क की परतें धीरे धीरे खुलने लगी हैं।
शराब ठेकों पर ताले लाइसेंस निरस्तीकरण की प्रक्रिया
शनिवार शाम पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम ने सपा नेता के परिवार से जुड़े कई शराब ठेकों को सील कर दिया। ये ठेके प्रदीप जायसवाल की भाभी और वैभव जायसवाल की पत्नी के नाम पर संचालित हो रहे थे। अधिकारियों के अनुसार इन ठेकों के लाइसेंस निरस्त कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। सभी दुकानों को विधिवत सील कर पुलिस सुरक्षा में सौंप दिया गया है ताकि किसी प्रकार की छेड़छाड़ न हो सके।
कज्जाकपुरा में देर रात छापेमारी
कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए जिला आबकारी अधिकारी कमल कुमार शुक्ला एसीपी कोतवाली विजय प्रताप सिंह और कोतवाली इंस्पेक्टर दया शंकर सिंह भारी पुलिस बल के साथ आदमपुर थाना क्षेत्र के कज्जाकपुरा इलाके में पहुंचे। पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर अंग्रेजी शराब की दुकान को सील कर दिया। मौके से सभी दस्तावेज रजिस्टर और लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड जब्त कर लिए गए। जांच में यह सामने आया कि दुकान का लाइसेंस ऊषा देवी के नाम पर था लेकिन इसकी आय परोक्ष रूप से कफ सिरप तस्करी से जुड़े लोगों तक पहुंच रही थी।
मनी लॉन्ड्रिंग के संकेत जांच में बड़ा मोड़
पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध तस्करी से अर्जित धन को वैध दिखाने के लिए परिवार की महिलाओं के नाम पर शराब के ठेके संचालित किए जा रहे थे। इसी कड़ी में कुछ दिन पहले पुलिस ने वैभव जायसवाल की मां पत्नी समेत पांच महिलाओं को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसियां इस पूरे मामले को मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से भी देख रही हैं जिससे केस ने नया मोड़ ले लिया है।
नेटवर्क के विस्तार की जांच तेज
मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू तब सामने आया जब प्रदीप जायसवाल की तस्वीर कफ सिरप माफिया शुभम जायसवाल के साथ सामने आई। इसके बाद पुलिस ने परिवार के अन्य सदस्यों और करीबी रिश्तेदारों को भी जांच के दायरे में ले लिया है। संगठित अपराध में महिलाओं की गिरफ्तारी ने जांच एजेंसियों को पूरे नेटवर्क को गहराई से खंगालने के लिए प्रेरित किया है।
शहर के कई इलाकों में कार्रवाई
पुलिस प्रशासन और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम ने शहर के खोजवा लहरतारा परेड कोठी और कज्जाकपुरा क्षेत्रों में स्थित चार अन्य शराब दुकानों पर भी छापेमारी कर उन्हें सील कर दिया। इन दुकानों को अवैध कमाई के निवेश के रूप में इस्तेमाल किए जाने की आशंका जताई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान और भी संपत्तियों को चिन्हित किया जा रहा है जिन पर आगे कार्रवाई की जाएगी।
अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की भी जांच
इस मामले का अंतरराष्ट्रीय पहलू भी सामने आ रहा है। कफ सिरप तस्करी के मुख्य सरगना शुभम जायसवाल के खिलाफ इंटरपोल द्वारा रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया जा चुका है। इससे उसकी गिरफ्तारी और भारत लाने की प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है। जांच एजेंसियां मान रही हैं कि उसकी गिरफ्तारी के बाद इस पूरे नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य कनेक्शन का बड़ा खुलासा हो सकता है।
भारी भरकम चार्जशीट दाखिल
गौरतलब है कि शहर कोतवाली थाने में दर्ज इस मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल उसके पिता भोला प्रसाद जायसवाल समेत कुल 18 आरोपियों के खिलाफ लगभग 39 हजार पन्नों की विस्तृत चार्जशीट तैयार कर अदालत में दाखिल की है। इतनी बड़ी चार्जशीट इस बात का संकेत है कि यह नेटवर्क लंबे समय से संगठित तरीके से संचालित किया जा रहा था।
पृष्ठभूमि में अवैध तस्करी का बड़ा नेटवर्क
वाराणसी में कोडीन कफ सिरप कांड ने अवैध तस्करी के एक बड़े नेटवर्क को उजागर किया है जिसमें विभिन्न स्तरों पर लोगों की भूमिका सामने आ रही है। पुलिस की वर्तमान कार्रवाई से यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि इस मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियों तथा संपत्तियों पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है जिससे पूरे मामले के और भी पहलू सामने आ सकते हैं।
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