वाराणसी में फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी: 125 होटल-लाज में कमी, 50 पर तालाबंदी के आदेश
अमित मिश्रा की रिपोर्ट : वाराणसी में पर्यटकों की लगातार बढ़ती संख्या के साथ होटल और लाज व्यवसाय तेजी से फैल रहा है, लेकिन इसके साथ ही सुरक्षा मानकों की अनदेखी भी गंभीर चिंता का विषय बन गई है। विशेष रूप से अग्नि सुरक्षा (फायर सेफ्टी) के नियमों को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे पर्यटकों की जान जोखिम में पड़ रही है। हाल के दिनों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां आग लगने की घटनाओं में बड़ी मुश्किल से लोगों को सुरक्षित निकाला जा सका।
बिना मानकों के चल रहे होटल और लाज
शहर में बढ़ती पर्यटन गतिविधियों के चलते बड़ी संख्या में नए होटल, लाज और गेस्ट हाउस खुल रहे हैं। लेकिन इनमें से कई संस्थान बिना आवश्यक अनुमति और सुरक्षा मानकों का पालन किए संचालित हो रहे हैं। भवन निर्माण से लेकर संचालन तक, नियमों की अनदेखी आम बात हो गई है। खासकर अग्नि सुरक्षा के बुनियादी इंतजाम जैसे फायर एग्जिट, अलार्म सिस्टम, पानी की पर्याप्त व्यवस्था और प्रशिक्षित स्टाफ का अभाव साफ तौर पर देखा जा रहा है।
फायर विभाग की जांच में खुलासा
अग्निशमन विभाग द्वारा शहर के विभिन्न होटल और लाज में फायर सेफ्टी व्यवस्थाओं की जांच की गई। इस जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। अग्निशमन अधिकारी आनंद सिंह राजपूत के अनुसार, कुल 125 होटल-लाज ऐसे पाए गए, जहां आग से बचाव के इंतजाम निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं थे। इन सभी को नोटिस जारी कर आवश्यक सुधार के लिए समय दिया गया था।
88 होटल सील करने की संस्तुति, 50 पर कार्रवाई
फायर विभाग की चेतावनी के बावजूद सुधार न करने वाले 88 होटल और लाज के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए जिला प्रशासन को उन्हें सील करने की संस्तुति भेजी गई। इस पर कार्रवाई करते हुए अपर जिलाधिकारी (प्रोटोकॉल) द्वारा 50 होटलों पर तालाबंदी का आदेश जारी किया गया है। यह कदम प्रशासन की सख्ती को दर्शाता है और अन्य संचालकों के लिए भी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
पर्यटकों की सुरक्षा पर मंडराता खतरा
इन होटलों और लाज में ठहरने वाले पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आग लगने की स्थिति में पर्याप्त निकासी मार्ग (इमरजेंसी एग्जिट) और उपकरण न होने के कारण जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता है। कई जगहों पर सिर्फ औपचारिकता के तौर पर एक-दो फायर एक्सटिंग्विशर रख दिए जाते हैं, जबकि वास्तविक आपात स्थिति में ये नाकाफी साबित होते हैं।
रजिस्टर्ड से तीन गुना अधिक अवैध संचालन
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, वाराणसी में करीब 1017 होटल और लाज पंजीकृत हैं, लेकिन वास्तविकता इससे कहीं अधिक चिंताजनक है। अनुमान है कि पंजीकृत संख्या से लगभग तीन गुना अधिक होटल, गेस्ट हाउस और पेइंग गेस्ट हाउस अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं। ये संस्थान अक्सर नियमों से बचने के लिए अलग-अलग नामों का सहारा लेते हैं।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
वाराणसी जैसे प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थल पर हर साल लाखों श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। फायर सेफ्टी नियमों का सख्ती से पालन कराना, अवैध होटलों पर कार्रवाई करना और जागरूकता बढ़ाना अब बेहद जरूरी हो गया है।
निष्कर्ष
वाराणसी में बढ़ते पर्यटन के साथ सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना समय की मांग है। प्रशासन द्वारा की जा रही कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन इसे और व्यापक स्तर पर लागू करने की आवश्यकता है। जब तक सभी होटल और लाज संचालक नियमों का पूरी तरह पालन नहीं करेंगे, तब तक पर्यटकों की सुरक्षा पर खतरा बना रहेगा।
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