प्रयागराज जंक्शन पर ‘ऑपरेशन वाइलेप’ में वन्यजीव तस्करों का भंडाफोड़, दुर्लभ सांपों के साथ तीन गिरफ्तार
प्रयागराज जंक्शन पर रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और जीआरपी की संयुक्त टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए वन्यजीव तस्करी में शामिल गिरोह का पर्दाफाश किया है। “ऑपरेशन वाइलेप” (वन्यजीव तस्करी रोकथाम अभियान) के तहत चलाए गए इस अभियान में पुलिस ने तीन शातिर तस्करों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से दो दुर्लभ ब्लैक कोबरा और दो दोमुंहा सांप (सैंड बोआ) बरामद किए गए हैं, जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करोड़ों रुपये बताई जा रही है।
प्लेटफार्म नंबर एक पर घेराबंदी कर दबोचे गए आरोपी
सोमवार को आरपीएफ के उप निरीक्षक विवेक कुमार और जीआरपी के उप निरीक्षक राजेश कुमार वर्मा अपनी टीम के साथ प्रयागराज जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर एक पर नियमित गश्त कर रहे थे। इसी दौरान तीन युवक संदिग्ध हालत में नजर आए। पुलिस को देखते ही वे भागने लगे, जिससे संदेह और गहरा गया। तत्परता दिखाते हुए पुलिस टीम ने घेराबंदी कर तीनों को पकड़ लिया।
तलाशी में निकले खतरनाक और दुर्लभ सांप
पकड़े गए युवकों के पास मौजूद थैलों की तलाशी लेने पर पुलिस भी हैरान रह गई। बैग के अंदर से दो खतरनाक ब्लैक कोबरा और दो दुर्लभ दोमुंहा सांप (सैंड बोआ) बरामद हुए। ये दोनों प्रजातियां संरक्षित वन्यजीवों की श्रेणी में आती हैं और इनकी तस्करी प्रतिबंधित है। वन विभाग के अनुसार, इन सांपों को बेहद अमानवीय परिस्थितियों में कैद कर तस्करी के लिए ले जाया जा रहा था।
गिरफ्तार आरोपी और उनकी पहचान
आरपीएफ इंस्पेक्टर अमित मीना ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोहित नाथ (जिला रायबरेली), करन नाथ (प्रयागराज) और आकेश नाथ (प्रयागराज) के रूप में हुई है। प्रारंभिक पूछताछ में यह संकेत मिले हैं कि यह गिरोह लंबे समय से वन्यजीवों की तस्करी में सक्रिय था और इन दुर्लभ प्रजातियों को देश के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सप्लाई करता था।
वन विभाग को सौंपे गए वन्यजीव
प्रभारी निरीक्षक जीआरपी अकलेश कुमार सिंह ने बताया कि बरामद किए गए सभी वन्यजीवों को सुरक्षित रूप से वन विभाग के अधिकारियों को सौंप दिया गया है। वन विभाग अब इन जीवों की देखभाल करेगा और उन्हें प्राकृतिक आवास में वापस छोड़ने की प्रक्रिया पूरी करेगा।
कड़ी धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। अधिकारियों के अनुसार, इस तरह की तस्करी न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि पर्यावरण और जैव विविधता के लिए भी गंभीर खतरा है।
अंधविश्वास के चलते बढ़ती तस्करी
दोमुंहा सांप (सैंड बोआ) को लेकर समाज में कई तरह के अंधविश्वास फैले हुए हैं। इसे ‘धन लाने वाला’ या ‘करोड़ों का खजाना दिलाने वाला’ जीव माना जाता है। इसी अंधविश्वास का फायदा उठाकर तस्कर इसकी अवैध खरीद-फरोख्त करते हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी भारी मांग होने के कारण इसकी कीमत करोड़ों रुपये तक पहुंच जाती है।
निष्कर्ष
प्रयागराज जंक्शन पर हुई यह कार्रवाई वन्यजीव तस्करी के खिलाफ एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। आरपीएफ और जीआरपी की सतर्कता से न केवल एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, बल्कि दुर्लभ और संरक्षित प्रजातियों को भी बचाया जा सका है। यह अभियान भविष्य में भी ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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