वाराणसी: निजी स्कूलों की फीस और खरीदारी पर सख्ती डीएम ने मांगा तीन साल का पूरा हिसाब
वाराणसी: निजी स्कूलों द्वारा मनमाने ढंग से फीस वसूली और अभिभावकों को किताबें तथा यूनिफॉर्म निर्धारित दुकानों से खरीदने के लिए बाध्य किए जाने की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित विद्यालयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की इस पहल से उन अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है जो लंबे समय से इस मुद्दे को लेकर आवाज उठा रहे थे।
तीन शैक्षणिक सत्रों का मांगा गया पूरा विवरण
जिलाधिकारी ने जिला विद्यालय निरीक्षक और बेसिक शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया है कि जिले के सभी निजी विद्यालयों से पिछले तीन शैक्षणिक सत्रों की फीस संरचना का विस्तृत विवरण प्राप्त किया जाए। इसके साथ ही विद्यालयों को अपने ऑडिटेड वित्तीय दस्तावेज भी प्रस्तुत करने होंगे ताकि यह स्पष्ट हो सके कि फीस वृद्धि निर्धारित नियमों और मानकों के अनुरूप की गई है या नहीं। प्रशासन का मानना है कि पारदर्शिता की कमी ही ऐसी शिकायतों की मुख्य वजह बनती है और इसे दूर करना आवश्यक है।
अभिभावकों के लिए कंट्रोल रूम सक्रिय
अभिभावकों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में एक कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। इसके लिए हेल्पलाइन नंबर 05422509413 जारी किया गया है जिस पर अभिभावक सीधे संपर्क कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा फीस वृद्धि या किताबों और यूनिफॉर्म से संबंधित शिकायतें लिखित रूप में भी जमा की जा सकती हैं। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाएगी और निष्पक्ष जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
औचक निरीक्षण और सीधा संवाद होगा
जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए हैं कि वे निजी विद्यालयों का नियमित रूप से औचक निरीक्षण करें और वहां मौजूद अभिभावकों तथा छात्रों से सीधे संवाद कर वास्तविक स्थिति का आकलन करें। यदि किसी भी विद्यालय में शासनादेश के विपरीत गतिविधियां पाई जाती हैं तो संबंधित अधिनियम के तहत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
बैठक में तय किए गए स्पष्ट दिशा निर्देश
इस विषय पर आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में जिला विद्यालय निरीक्षक भोलेंद्र प्रताप सिंह चार्टर्ड अकाउंटेंट हरि एन सिंह बिसेन मुख्य कोषाधिकारी निवेदिता शिक्षा सदन बालिका इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य तथा अभिभावक शिक्षक संघ के प्रतिनिधि यशविंदर सिंह सहित समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। बैठक में विद्यालयों के लिए स्पष्ट दिशा निर्देश तय किए गए जिनका पालन अनिवार्य होगा।
फीस वृद्धि पर सख्त मानक लागू
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शुल्क वृद्धि केवल निर्धारित मानकों और उचित कारणों के आधार पर ही मान्य होगी। यदि कोई विद्यालय निर्धारित सीमा से अधिक फीस बढ़ाता है तो उसके खिलाफ जुर्माना सहित अन्य दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। विद्यालयों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि शुल्क निर्धारण में पूर्ण पारदर्शिता रखी जाए और अभिभावकों को सभी आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
किताब और यूनिफॉर्म को लेकर भी निर्देश
प्रशासन ने यह भी अनिवार्य किया है कि सभी विद्यालय यह प्रमाणित करें कि किसी भी छात्र को किताबें जूते मोजे या यूनिफॉर्म किसी विशेष दुकान से खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा रहा है। इसके साथ ही विद्यालयों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे लगातार पांच शैक्षणिक वर्षों के भीतर स्कूल ड्रेस में कोई बदलाव नहीं करेंगे ताकि अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े।
पृष्ठभूमि और व्यापक असर
पिछले कुछ वर्षों में वाराणसी सहित कई जिलों में निजी विद्यालयों द्वारा फीस वृद्धि और अनिवार्य खरीदारी को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं। इन शिकायतों के कारण अभिभावकों में असंतोष बढ़ता जा रहा था। जिला प्रशासन की यह पहल न केवल इन शिकायतों के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है बल्कि इससे शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ने की उम्मीद है।
प्रशासन ने संकेत दिया है कि आवश्यकता पड़ने पर समिति द्वारा विद्यालयों के अभिलेखों का परीक्षण निरीक्षण और सुनवाई की प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच के बाद कितने विद्यालय नियमों का पालन करते पाए जाते हैं और किन पर कार्रवाई होती है।
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