आजमगढ़: अजमतगढ़ में पीएम श्री विद्यालय में छात्रों से सफाई कराने का मामला प्रधानाध्यापक निलंबित
आजमगढ़: जनपद के अजमतगढ़ क्षेत्र स्थित पीएम श्री प्राथमिक विद्यालय प्रथम में छात्रों से पढ़ाई के बजाय सफाई और निजी कार्य कराए जाने के आरोपों ने एक बार फिर सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला तब उजागर हुआ जब विद्यालय की गतिविधियों से जुड़ा एक वीडियो सामने आया जिसमें छात्र छात्राओं को नियमित रूप से गैर शैक्षणिक कार्य करते हुए देखा गया। इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राजीव कुमार पाठक ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रधानाध्यापक अवधेश यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
वायरल वीडियो से खुला मामला
जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला 10 अप्रैल 2026 को सामने आया जब एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इस वीडियो में विद्यालय के छात्र छात्राएं सफाई करते हुए नजर आए और आरोप है कि उनसे नियमित रूप से निजी कार्य भी कराए जाते थे। वीडियो के सामने आने के बाद अभिभावकों और स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ गई और मामले ने प्रशासन का ध्यान अपनी ओर खींचा। यह स्थिति बच्चों के शिक्षा के अधिकार और उनके समग्र विकास के लिए चिंताजनक मानी जा रही है।
बीएसए ने मांगा स्पष्टीकरण जवाब असंतोषजनक
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने 13 अप्रैल को प्रधानाध्यापक से स्पष्टीकरण मांगा था। हालांकि प्राप्त जवाब को संतोषजनक नहीं माना गया। विभागीय जांच के दौरान यह भी सामने आया कि विद्यालय में मध्यान्ह भोजन व्यवस्था में भी अनियमितताएं थीं। आरोप है कि भोजन निर्धारित मानकों के विपरीत बाहर चूल्हे पर तैयार किया जा रहा था और इसमें वित्तीय गड़बड़ी की शिकायतें भी सामने आईं।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम का उल्लंघन
जारी आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि छात्रों से इस प्रकार के कार्य कराना शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के प्रावधानों का उल्लंघन है। साथ ही यह शिक्षक पद की गरिमा के विपरीत आचरण माना गया है। इसी आधार पर प्रधानाध्यापक को निलंबित करते हुए उन्हें खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय अजमतगढ़ से संबद्ध कर दिया गया है ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके।
जांच के लिए दिए गए सख्त निर्देश
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राजीव कुमार पाठक ने खंड शिक्षा अधिकारी हरैया को इस मामले की विस्तृत जांच सौंपी है। उन्हें निर्देश दिया गया है कि सभी आरोपों की गहन जांच करते हुए आरोप पत्र तैयार किया जाए और शीघ्र रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विद्यालयों में बच्चों से गैर शैक्षणिक कार्य कराना और मध्यान्ह भोजन में अनियमितता अत्यंत गंभीर विषय है जिस पर किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
शिक्षा विभाग में हलचल और सख्त संदेश
इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हलचल तेज हो गई है। अधिकारियों के बीच यह संदेश स्पष्ट रूप से गया है कि बच्चों के अधिकारों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई को शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पृष्ठभूमि और व्यापक प्रभाव
सरकारी विद्यालयों में बच्चों से गैर शैक्षणिक कार्य कराए जाने की शिकायतें समय समय पर सामने आती रही हैं। हालांकि इस तरह की घटनाएं शिक्षा के मूल उद्देश्य को प्रभावित करती हैं और बच्चों के मानसिक तथा शारीरिक विकास पर प्रतिकूल असर डालती हैं। इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि निगरानी व्यवस्था को और अधिक सख्त बनाने की आवश्यकता है ताकि विद्यालयों में केवल शिक्षा और विद्यार्थियों के विकास पर ही ध्यान केंद्रित किया जा सके।
फिलहाल पूरे मामले में अंतिम स्थिति जांच रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट होगी। प्रशासन और शिक्षा विभाग की नजर इस रिपोर्ट पर टिकी हुई है जो इस प्रकरण की पूरी सच्चाई सामने लाएगी और आगे की कार्रवाई की दिशा तय करेगी।
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