उत्तर प्रदेश में कर्मचारियों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा की मांग तेज, परिषद ने सरकार से लागू करने की अपील
उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने प्रदेश के सभी अधिकारियों, कर्मचारियों, शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करने की मांग को एक बार फिर जोर-शोर से उठाया है। परिषद के प्रदेश अध्यक्ष इंजीनियर हरि किशोर तिवारी ने इस मुद्दे को प्रमुखता से रखते हुए सरकार से तत्काल प्रभाव से इस सुविधा को लागू करने की अपील की है।
रैली के दौरान उठाई गई मांग
यह मांग पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान कर्मचारियों के प्रति कथित उत्पीड़न के विरोध में आयोजित एक रैली के दौरान सामने आई। रैली में हरि किशोर तिवारी ने कर्मचारियों से एकजुट रहने और अपने अधिकारों के लिए सजग होकर मतदान करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को उनकी मूलभूत सुविधाओं से वंचित नहीं रखा जा सकता और इसके लिए संगठित प्रयास आवश्यक हैं।
2013 के समझौते का दिया हवाला
हरि किशोर तिवारी ने बताया कि वर्ष 2013 में हुए प्रदेशव्यापी कर्मचारी आंदोलन के दौरान सरकार के साथ यह सहमति बनी थी कि उत्तर प्रदेश में कार्यरत सभी कर्मचारियों और शिक्षकों को पूरी तरह से कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाएगी। इस सुविधा के तहत किसी भी मान्यता प्राप्त चिकित्सालय या संस्थान में इलाज कराना संभव होना था।
उन्होंने यह भी कहा कि इस सहमति को माननीय उच्च न्यायालय ने भी उचित ठहराया था, जिससे यह अपेक्षा की जा रही थी कि सरकार जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम उठाएगी। लेकिन इतने वर्षों के बाद भी इस समझौते को पूरी तरह से लागू नहीं किया गया है, जिससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है।
वर्तमान व्यवस्था पर जताई नाराजगी
परिषद के प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि वर्तमान में सरकार द्वारा कैशलेस चिकित्सा सुविधा को खंड-खंड में और सीमित रूप में लागू करने के निर्देश दिए जा रहे हैं, जो पूरी तरह से निष्क्रिय साबित हो रहे हैं। इससे कर्मचारियों, शिक्षकों और अधिकारियों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि हाल ही में जारी किए गए नए आदेश कर्मचारियों के हित में नहीं हैं और उन्हें इस रूप में स्वीकार करना संभव नहीं है। परिषद ने मांग की है कि एक व्यापक और प्रभावी नीति बनाकर सभी कर्मचारियों को समान रूप से लाभ पहुंचाया जाए।
मुख्यमंत्री से वार्ता के बाद आंदोलन की योजना
इस मुद्दे को लेकर राज्यभर के विभिन्न कर्मचारी और शिक्षक संगठनों ने एकजुटता दिखाई है। परिषद के अनुसार, सबसे पहले इस विषय को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा और उनसे समाधान की मांग की जाएगी। यदि इसके बावजूद कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता है, तो आगे आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी।
वाराणसी में हुई बैठक, कई पदाधिकारी रहे मौजूद
पश्चिम बंगाल से लौटते समय वाराणसी में एक संक्षिप्त बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष भूपेश अवस्थी भी मौजूद रहे। यह बैठक लोक निर्माण विभाग के राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष शशिकांत श्रीवास्तव के नेतृत्व में हुई।
बैठक में संगठन के कई प्रमुख पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे, जिनमें जिला मंत्री श्याम राज यादव, सम्प्रेक्षक सुधांशु सिंह, आदर्श शिक्षा मित्र वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अमरेन्द्र कुमार दुबे, कार्यवाहक जिलाध्यक्ष मनोज कुमार, जिला कोषाध्यक्ष जयप्रकाश दुबे, सुजीत सिंह, क्षेत्रीय अध्यक्ष अखिलेश चौहान, पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष धन्नजय यादव, जनपद सचिव रविन्द्र कुमार, जे पी शर्मा, विशाल चौरसिया और विकास विश्वकर्मा शामिल थे।
कर्मचारियों में बढ़ रहा असंतोष
प्रदेश में लंबे समय से कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू न होने के कारण कर्मचारियों में असंतोष लगातार बढ़ रहा है। परिषद का मानना है कि यदि सरकार इस दिशा में जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लेती है, तो यह मुद्दा व्यापक आंदोलन का रूप ले सकता है। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है।
LATEST NEWS