आगरा में पॉक्सो एक्ट मामले में विवेचक की अनुपस्थिति पर सख्त रुख, विशेष न्यायाधीश ने वेतन रोकने का दिया आदेश
आगरा में किशोरी से छेड़छाड़ और पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज एक गंभीर आपराधिक मामले में अदालत ने विवेचक की लगातार अनुपस्थिति पर कड़ा रुख अपनाया है। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट सोनिका चौधरी की अदालत ने मामले के विवेचक दारोगा अंकित कुमार का वेतन अग्रिम आदेश तक रोकने के निर्देश पुलिस आयुक्त आगरा को जारी किए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सात मार्च को विवेचक की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।
वर्ष 2022 में दर्ज हुआ था मामला
यह मामला वर्ष 2022 में थाना बरहन में दर्ज किया गया था। आरोप है कि एक किशोरी के साथ छेड़छाड़ की गई थी, जिसके आधार पर पॉक्सो एक्ट सहित संबंधित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया गया। प्रकरण की विवेचना उस समय बरहन थाने में तैनात दारोगा अंकित कुमार को सौंपी गई थी। वर्तमान में उनकी तैनाती थाना खंदौली में बताई जा रही है।
मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट सोनिका चौधरी की अदालत में चल रही है। अदालत के समक्ष प्रस्तुत अभिलेखों के अनुसार, विवेचक अंकित कुमार को छोड़कर अन्य सभी गवाहों की गवाही दर्ज की जा चुकी है। ऐसे में मुकदमे के अंतिम चरण में विवेचक की गवाही अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बार-बार आदेश के बावजूद नहीं हुए उपस्थित
अदालत द्वारा कई बार विवेचक को गवाही के लिए तलब किया गया। न्यायालय के आदेशों के बावजूद उनके उपस्थित न होने पर अदालत ने प्रतिकूल टिप्पणियां भी दर्ज कीं। इसके बावजूद विवेचक की ओर से अनुपस्थिति जारी रहने पर न्यायालय ने इसे गंभीरता से लिया।
न्यायालय का मत है कि किसी भी आपराधिक मुकदमे में विवेचक की गवाही अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि वही घटना की जांच, साक्ष्य संकलन, बरामदगी और अन्य प्रक्रियात्मक पहलुओं के संबंध में अदालत को जानकारी देता है। विवेचक की अनुपस्थिति से मुकदमे की सुनवाई प्रभावित होती है और न्याय में विलंब होता है।
पुलिस आयुक्त को वेतन रोकने के निर्देश
विवेचक की लगातार अनुपस्थिति को न्यायालय ने अनुशासनहीनता के रूप में देखा। विशेष न्यायाधीश ने आदेश पारित करते हुए पुलिस आयुक्त आगरा को निर्देशित किया कि विवेचक अंकित कुमार का वेतन अग्रिम आदेश तक रोक दिया जाए। साथ ही सात मार्च को उन्हें अनिवार्य रूप से न्यायालय में प्रस्तुत किया जाए।
अदालत के इस आदेश को प्रशासनिक स्तर पर गंभीर माना जा रहा है। आमतौर पर न्यायालय द्वारा वेतन रोकने जैसे आदेश तब दिए जाते हैं, जब संबंधित अधिकारी न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग नहीं करता या बार-बार आदेश की अवहेलना करता है।
मुकदमे की प्रगति पर प्रभाव
कानूनी जानकारों का कहना है कि पॉक्सो एक्ट के मामलों में शीघ्र सुनवाई का विशेष प्रावधान है, ताकि पीड़ित पक्ष को समयबद्ध न्याय मिल सके। ऐसे मामलों में जांच अधिकारी की अनुपस्थिति न केवल प्रक्रिया को लंबित करती है, बल्कि पीड़ित पक्ष की उम्मीदों पर भी असर डालती है।
अब सात मार्च की तारीख इस मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि विवेचक उस दिन न्यायालय में उपस्थित होते हैं और उनकी गवाही दर्ज हो जाती है, तो मुकदमा अंतिम बहस की ओर बढ़ सकता है। वहीं, अनुपस्थिति की स्थिति में न्यायालय और कड़े कदम उठा सकता है।
न्यायालय की सख्ती का संदेश
विशेष न्यायाधीश द्वारा पारित आदेश से यह स्पष्ट संदेश गया है कि न्यायालय की अवमानना या आदेशों की अनदेखी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विशेषकर उन मामलों में, जो नाबालिगों से जुड़े हों और जिनमें संवेदनशील धाराएं लागू हों, अदालत प्रक्रिया की गंभीरता से कोई समझौता नहीं करना चाहती।
फिलहाल पुलिस आयुक्त कार्यालय की ओर से इस आदेश पर अनुपालन की प्रक्रिया शुरू किए जाने की संभावना है। सात मार्च को होने वाली अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं, जहां विवेचक की उपस्थिति और आगे की न्यायिक कार्रवाई से मामले की दिशा तय होगी।
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