अखिलेश यादव का सरकार पर हमला, एसआईआर 2026 के दबाव को बताया बीएलओ आत्महत्या से जुड़ा मामला
लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एसआईआर 2026 को लेकर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में बूथ लेवल अधिकारियों पर दिन रात असामान्य और अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है, जिससे कई कर्मचारी मानसिक रूप से टूटने की स्थिति में पहुंच रहे हैं। लखनऊ में जारी बयान में उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासनिक कार्य का दबाव नहीं है बल्कि कथित रूप से गलत काम कराने का भी दबाव है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए चिंताजनक है।
फतेहपुर की घटना का किया उल्लेख
सपा प्रमुख ने फतेहपुर जनपद के बिंदकी क्षेत्र के ग्राम अलियाबाद में हुई एक शिक्षामित्र बीएलओ की आत्महत्या की घटना का उल्लेख करते हुए इसे एसआईआर 2026 से जोड़ा। उन्होंने कहा कि अखिलेश कुमार सविता नामक शिक्षामित्र बीएलओ ने शनिवार शाम सरकारी प्राथमिक विद्यालय के एक कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। यादव के अनुसार मृतक ने कथित रूप से एसआईआर 2026 जीवनमुक्ति शीर्षक से एक पत्र भी छोड़ा, जिसमें अत्यधिक दबाव और पारिवारिक परिस्थितियों का जिक्र किया गया है। हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक इस पत्र की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
फार्म 6 और फार्म 7 को लेकर आरोप
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि पहले फार्म 7 के माध्यम से मतदाता सूची से नाम कटवाने का दबाव बनाया जाता था और अब फार्म 6 के जरिए नए नाम जोड़ने को लेकर दबाव की शिकायतें मिल रही हैं। उनका कहना है कि अधिकांश बीएलओ ऐसे कार्यों के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं होते क्योंकि उनका विवेक इसकी अनुमति नहीं देता। उन्होंने कहा कि लगातार दबाव और लक्ष्य आधारित काम से कर्मचारी तनाव और हताशा की स्थिति में पहुंच जाते हैं।
अवकाश न मिलने का भी लगाया आरोप
सपा प्रमुख ने यह भी कहा कि संबंधित बीएलओ की बेटी की शादी दस दिन बाद तय थी, लेकिन कथित रूप से अधिकारियों द्वारा अवकाश न दिए जाने से वह और अधिक मानसिक दबाव में आ गए। उन्होंने इसे संवेदनहीन प्रशासनिक रवैया बताया और कहा कि बेटी की शादी जैसे पारिवारिक दायित्वों को समझना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि किसी भी कर्मचारी के साथ मानवीय व्यवहार होना चाहिए।
बीएलओ से निराश न होने की अपील
अखिलेश यादव ने प्रदेश भर के बीएलओ से अपील की कि वे किसी भी परिस्थिति में निराश न हों और आत्मघाती कदम न उठाएं। उन्होंने कहा कि जीवन अनमोल है और परिवार के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में प्रशासनिक प्रक्रिया पारदर्शी और नियम आधारित होनी चाहिए, न कि भय और दबाव के वातावरण में संचालित।
प्रशासन की प्रतिक्रिया और पृष्ठभूमि
इस पूरे मामले पर अभी तक प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। सूत्रों के अनुसार घटना की जांच की जा रही है और सभी तथ्यों को एकत्र किया जा रहा है। निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक नियमित प्रक्रिया है और इसे निर्धारित नियमों के तहत संपन्न कराया जाता है।
गौरतलब है कि एसआईआर 2026 के तहत मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण की प्रक्रिया जारी है। प्रदेश की राजनीति में यह मुद्दा अब चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर विपक्ष सरकार पर कर्मचारियों पर अत्यधिक दबाव डालने का आरोप लगा रहा है, वहीं प्रशासनिक तंत्र नियमों के पालन की बात कर रहा है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के आधार पर स्थिति और स्पष्ट होने की संभावना है।
LATEST NEWS