चंदौली के सिकंदरपुर में बंदरों के आतंक से युवक की मौत, छत से कूदने पर लगी थी गंभीर चोट
चंदौली: चकिया थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत सिकंदरपुर में बंदरों के बढ़ते आतंक के बीच एक दर्दनाक हादसे में 35 वर्षीय युवक सरोज गुप्ता की मौत हो गई। परिजनों के अनुसार घटना 21 फरवरी 2026 की दोपहर की है, जब वह अपने घर की छत पर सूख रहे कपड़े उतारने गए थे। इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है और परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
छत पर पहुंचे तो बंदरों के झुंड से घिर गए
ग्रामीणों के मुताबिक पिछले कई महीनों से क्षेत्र में बंदरों का आतंक बढ़ा हुआ है। बंदरों के झुंड अक्सर घरों की छतों पर कूदते फांदते देखे जाते हैं, जिससे लोग भयभीत रहते हैं। बताया जा रहा है कि जैसे ही सरोज गुप्ता छत पर पहुंचे, वहां बंदरों का झुंड आ गया। अचानक हुई इस स्थिति से वह घबरा गए और खुद को बचाने का प्रयास करने लगे। इसी दौरान संतुलन बिगड़ने पर वह छत से नीचे कूद गए।
नीचे गिरते ही उनके सिर में गंभीर चोट आई। परिवार के सदस्य और आसपास के ग्रामीण तत्काल उन्हें उपचार के लिए ट्रामा सेंटर ले गए, जहां चिकित्सकों ने इलाज शुरू किया। हालांकि इलाज के दौरान उनकी स्थिति गंभीर बनी रही और प्रयासों के बावजूद उनकी मौत हो गई।
गांव में पसरा मातम, परिवार पर टूटा दुख
सरोज गुप्ता की असमय मृत्यु की खबर फैलते ही सिकंदरपुर गांव में शोक की लहर दौड़ गई। घर में कोहराम मच गया और परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों ने बताया कि वह मिलनसार और मेहनती स्वभाव के व्यक्ति थे। उनकी अचानक मौत ने पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है।
प्रशासन को दी गई सूचना, आर्थिक सहायता की मांग
घटना की जानकारी मिलते ही ग्राम प्रधान प्रतिनिधि सत्य प्रकाश गुप्ता मौके पर पहुंचे और परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को फोन के माध्यम से घटना से अवगत कराया और पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता दिलाने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि बंदरों की समस्या को लेकर पहले भी शिकायतें की गई थीं, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी।
पुलिस ने पूरी की कानूनी प्रक्रिया
22 फरवरी 2026 को पुलिस ने आवश्यक कानूनी कार्रवाई करते हुए पंचनामा और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की। इसके बाद शव को अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया गया।
बढ़ता बंदर आतंक बना गंभीर चुनौती
चकिया क्षेत्र और आसपास के गांवों में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता बताया जा रहा है। छतों पर रखा सामान नुकसान पहुंचाना, राह चलते लोगों पर झपट्टा मारना और घरों में घुस जाना आम शिकायत बन चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या के समाधान के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा हो सकती हैं। यह घटना प्रशासन के लिए भी गंभीर चेतावनी मानी जा रही है।
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