चकिया में दर्दनाक सड़क हादसा मंदिर के पुजारी की मौत से गांव में मातम आक्रोश में सड़कों पर उतरे लोग
चंदौली: बबुरी थाना क्षेत्र के बिठवल गांव में सोमवार सुबह हुए एक भीषण सड़क हादसे ने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया। तेज रफ्तार डंपर की चपेट में आने से 70 वर्षीय नरेंद्र कुमार झा की मौके पर ही मौत हो गई। यह घटना केवल एक दुर्घटना भर नहीं रही बल्कि एक परिवार के लिए असहनीय त्रासदी बन गई है। मृतक चकिया नगर स्थित मां काली मंदिर के पुजारी थे और क्षेत्र में उनकी पहचान एक सरल धार्मिक और सम्मानित व्यक्ति के रूप में थी।
सुबह की सैर बनी आखिरी सफर
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार नरेंद्र कुमार झा सोमवार सुबह रोज की तरह सड़क किनारे टहलने निकले थे। उसी दौरान चकिया के सोनहुल क्षेत्र से मिट्टी लादकर मुगलसराय की ओर जा रहा एक तेज रफ्तार डंपर अनियंत्रित हो गया और उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला और घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई। हादसे के बाद चालक वाहन लेकर भागने का प्रयास कर रहा था लेकिन ग्रामीणों ने उसे दौड़ाकर पकड़ लिया।
घटना के बाद सड़क जाम और प्रदर्शन
घटना की जानकारी मिलते ही गांव में शोक और आक्रोश फैल गया। कुछ ही समय में बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्र हो गए और चकिया मुगलसराय मार्ग पर जाम लगा दिया। देखते ही देखते सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया। ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जिलाधिकारी को मौके पर बुलाने की मांग की।
भारी वाहनों की आवाजाही पर उठे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि दिन के समय भी भारी वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही के कारण इस तरह के हादसे लगातार हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन की लापरवाही और अनदेखी के कारण निर्दोष लोगों की जान जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रशासन ने संभालने की कोशिश की स्थिति
सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाने का प्रयास किया। हालांकि खबर लिखे जाने तक स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी थी और लोग अपनी मांगों पर अड़े हुए थे। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
इस हादसे ने मृतक के परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया है। ग्रामीणों के अनुसार नरेंद्र कुमार झा के बेटे सुधीर की भी कुछ समय पहले एक सड़क दुर्घटना में मौत हो चुकी थी। परिवार उस दुख से अभी उबर भी नहीं पाया था कि अब परिवार के मुखिया की मौत ने उन्हें गहरे शोक में डाल दिया है। घर में मातम का माहौल है और हर व्यक्ति की आंख नम है।
समाज में सम्मानित थे नरेंद्र कुमार झा
गांव के लोगों के अनुसार नरेंद्र कुमार झा केवल एक पुजारी नहीं बल्कि समाज के मार्गदर्शक थे। उनकी सादगी धार्मिक आस्था और मिलनसार स्वभाव के कारण उन्हें हर वर्ग में सम्मान प्राप्त था। उनके निधन से पूरे गांव में शोक की लहर है और लोग उन्हें याद कर भावुक हो रहे हैं।
सड़क सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि सड़क सुरक्षा के प्रति लापरवाही कब तक लोगों की जान लेती रहेगी। एक परिवार की खुशियां पलभर में उजड़ गईं और पीछे रह गए केवल आंसू और अनगिनत सवाल। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि भारी वाहनों की आवाजाही पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
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