दतिया में छापेमारी के बीच इंसानियत की मिसाल, एसडीओपी ने ठंड से कांपते शिशु को संभाला
मध्य प्रदेश के दतिया जिले में अवैध शराब के खिलाफ की गई सख्त कार्रवाई के दौरान एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने पुलिस के मानवीय चेहरे को उजागर कर दिया। पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम जब चिरुला थाना क्षेत्र के फुलरा कंजर डेरा में छापेमारी के लिए पहुंची तो इलाके में अफरा तफरी मच गई। कार्रवाई की भनक लगते ही शराब बनाने में लिप्त महिला पुरुष अपने घर छोड़कर भाग निकले लेकिन पीछे रह गए उनके मासूम बच्चे।
25 जनवरी को हुई इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने जब घरों की तलाशी ली तो एक मकान में तीन छोटे बच्चे मिले। इनमें दो बच्चों की उम्र चार से पांच वर्ष थी जबकि लगभग दस साल की एक बच्ची अपने छोटे भाई बहनों को संभालने की कोशिश कर रही थी। सबसे मार्मिक स्थिति तब सामने आई जब पता चला कि एक महिला भागते समय अपने महज तीन महीने के शिशु को वहीं छोड़ गई।
कम कपड़ों में लिपटा वह नन्हा शिशु ठंड से कांप रहा था और भूख के कारण लगातार रो रहा था। बच्चे की हालत देखकर मौके पर मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों की आंखें नम हो गईं। इसी बीच वहां मौजूद आकांक्षा जैन का दिल पसीज गया। उन्होंने बिना किसी औपचारिकता के तुरंत दूध और गर्म कपड़ों की व्यवस्था करवाई।
एसडीओपी आकांक्षा जैन ने खुद शिशु को गोद में उठाया और बोतल से दूध पिलाया। इसके बाद बच्चे को गर्म कपड़ों में लपेटकर धूप में बैठाया गया। जब तक बच्चा शांत होकर सो नहीं गया तब तक वह उसे अपने पास ही रखे रहीं। यह दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति के लिए भावुक कर देने वाला था।
मौके पर मौजूद दस वर्षीय बच्ची और एक बुजुर्ग ने पुलिस को बताया कि कार्रवाई के डर से बच्चे की मां भाग गई थी। वे अकेले बच्चों को संभालने की कोशिश कर रहे थे लेकिन तीन महीने के शिशु की देखभाल उनके लिए संभव नहीं हो पा रही थी। बाद में एसडीओपी ने शिशु को उसी बच्ची को सौंपते हुए भरोसा दिलाया कि किसी भी तरह की परेशानी होने पर तुरंत पुलिस को सूचना दी जाए।
अवैध शराब के खिलाफ सख्त कार्रवाई के बीच सामने आई यह घटना यह साबित करती है कि कानून का पालन कराते हुए भी इंसानियत को सर्वोपरि रखा जा सकता है। एसडीओपी आकांक्षा जैन ने बताया कि कार्रवाई के दौरान डरकर भागे महिला पुरुष बाद में वापस लौट आए हैं और फिलहाल अपने परिवार और बच्चों के साथ मौजूद हैं।
दतिया की इस घटना ने न केवल अवैध शराब के खिलाफ प्रशासन की सख्ती को दर्शाया बल्कि यह भी दिखाया कि वर्दी के पीछे एक संवेदनशील इंसान भी होता है जो जरूरत पड़ने पर कानून से पहले मानवता को महत्व देता है।
