गोरखपुरिया रंग में रंगल भाई
गोरखपुरिया माटी के सोंध महक अउर बाबा गोरखनाथ के आशीर्वाद के साथ, पेश बा फागुन के ई एकदम ‘लल्लनटॉप’ खबरिया। रउआ सब पढ़ीं अउर फागुन के रस में डूब जाईं।
डॉ. राकेश श्रीवास्तव के फागुनी हुंकार
गोरखपुरिया रंग में रंगल ‘भाई’: डॉ. राकेश श्रीवास्तव के फागुनी हुंकार-“जिय हो भोजपुरी के शेरो, ई रंग ना ह, ई त ईयारन के प्यार ह!”
गोरखपुर/उत्तर प्रदेश: जब पूरब के हवा में फगुआ गूँजे लागे अउर राप्ती के तीरे ‘जोगीरा सारा रारा’ के शोर मच जाय, त समझ जाईं कि रंग अबीर के असली ‘मिसाइल’ छूट चुकल बा। एही फागुनी बयार में भोजपुरी एसोसिएशन ऑफ इंडिया ‘भाई’ (BHAI) के राष्ट्रीय अध्यक्ष, डॉ. राकेश श्रीवास्तव एकदम चइता अउर फगुआ के लय में नजर अइलन। हमार संवाददाता से बात करत घरी डॉक्टर साहब के अंदाज अइसन रहे कि मानों साक्षात ‘फगुआ’ देह में समा गइल होखे। ऊ हाथ में गुलाल ना, बल्कि शब्द के अइसन फुलझड़ी छोड़लन कि पूरा भोजपुरी समाज अउर प्रदेश के लोग ‘गदगद’ हो गइलन।
डॉक्टर साहब चुटकी लेत कहलन कि-“भैया हो, ई गोरखपुर ह! इहाँ त होली के रंग अइसन चढ़ेला कि मजनू भी मजनू ना, बल्कि फागुन के दीवाना लागेला।” ऊ कहलन कि भोजपुरी खाली भासा ना ह, ई हमनी के सांस ह। अउर जब ले सांस बा, तब ले ई फागुन के मस्ती बा। आज काल के ‘डिजिटल’ दुनिया में लोग व्हाट्सएप पर ‘हैप्पी होली’ भेज के काम चला लेत बाड़न, बाकिर डॉक्टर साहब के साफ कहना बा कि-“भैया, जब ले कपड़ा ना फाटे, अउर चेहरा ‘बैंगन’ नियन न हो जाय, तब ले कइसन होली?” ऊ प्रशासन के मुस्तैदी के सराहना त कइलन, बाकिर संगे-संगे ईहो चेतइलन कि मस्ती में ‘हस्ती’ अउर ‘बस्ती’ के नुकसान न होखे।
होली क संदेश: डॉ. राकेश श्रीवास्तव के होली के खुमार अउर लोकगीत के अंदाज
अब तनी डॉक्टर साहब के ऊ ‘चुटकी’ अउर ‘ठिठोली’ वाला अंदाज सुनीं, जवन ऊ भोजपुरी समाज अउर देशवासियन खातिर लोकगीत के तर्ज पर कहलन:
सुनऽ रे भैया, सुनऽ रे बहिनिया, रंग चढ़े फागुन के!
जेकरा गाल पर गुलाल न लागल, ऊ त जियते बा मुनल के!
डॉक्टर साहब तनी मुस्कुरा के अउर चश्मा सम्हार के कहलन- “ऐ भैया! जे तोहरा के साल भर ‘ब्लॉक’ कइले बा, आज ओकरा घर जा के ‘जोगीरा’ गा दा! जवन पड़ोसी कछुआ नियन मुँह लुका के बइठल बा, ओकरा मुँह पर तनी ‘गोबर अउर कीचड़’ ना, बल्कि प्रेम के अइसन चटक रंग लगा दा कि ओकरो सात पुश्त याद रखे कि केहू गोरखपुरिया से पाला पड़ल रहे।”
लोकगीत के फागुनी तान
सभके प्रणाम बा, सभके गोड़-लागी बा…
होली के ई हुड़दंग बा, संगे प्रेम के उमंग बा।
भोजपुरी माटी के ई शान, जियें-हंसें हमार हिंदुस्तान!
अंत में ऊ कहलन कि ‘भाई’ (BHAI) एसोसिएशन के तरफ से हमार ईहे संदेश बा कि, नफरत के ‘होलिका’ जरा दऽ, अउर मुहब्बत के ‘पुआ-पकौड़ी’ छान दऽ। जे कवनो गिला-शिकवा बा, ओकरा के राप्ती के धार में बहा दऽ। अउर हाँ, होली त खेलब बाकिर अइसन कि पड़ोसी के आँख ना, बल्कि ओकर ‘दुख’ फूट जाय!
सबके होली का ढेर सारी बधाई बा।
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