वाराणसी: रामनगर की सांस्कृतिक आत्मा को संजोने का संकल्प, मां मनसा देवी मंदिर सेवा न्यास के कार्यक्रम में राज्यपाल लक्ष्मण आचार्य का प्रेरक संबोधन
वाराणसी: रामनगर क्षेत्र में काशी की प्राचीन सांस्कृतिक परंपरा और ऐतिहासिक विरासत को नई दिशा देने के उद्देश्य से शनिवार की शाम कटेसर स्थित जीत होम परिसर में एक महत्वपूर्ण और विचारोत्तेजक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का विषय रामनगर की समृद्ध विरासत और विकास रखा गया था जिसमें क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान को पुनः स्मरण करते हुए उसके संरक्षण और आधुनिक विकास की दिशा में सामूहिक प्रयासों का संकल्प व्यक्त किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत और स्वागत समारोह
कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगान और दीप प्रज्वलन के साथ गरिमामय वातावरण में हुई। इसके बाद इंडियन इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं उद्योगपति आरके चौधरी ने असम के राज्यपाल लक्ष्मण आचार्य जी का पुष्पगुच्छ और माल्यार्पण कर आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर उन्होंने रामनगर की धरती को वीरता परंपरा और आध्यात्मिकता का अद्वितीय संगम बताया और कहा कि यह क्षेत्र देश ही नहीं बल्कि विदेशों से आने वाले श्रद्धालुओं को भी आकर्षित करता है।
राज्यपाल का प्रेरक संबोधन
राज्यपाल लक्ष्मण आचार्य जी ने अपने संबोधन में रामनगर और काशी की गौरवशाली परंपरा का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र केवल भौगोलिक पहचान नहीं बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस भूमि पर प्राचीन काल से ही संत महापुरुष और विद्वान जन्म लेते रहे हैं जिन्होंने समाज को नई दिशा दी है। उन्होंने मां मनसा देवी मंदिर को क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र बताते हुए इसके संरक्षण और संवर्धन के प्रयासों की सराहना की।
स्थानीय नेतृत्व और विकास पर चर्चा
मां मनसा देवी मंदिर सेवा न्यास ट्रस्ट के अध्यक्ष ऋषभ कुमार जैन ने कहा कि वर्तमान समय में सरकार के सहयोग और स्थानीय जनभागीदारी से रामनगर के विकास को नई गति मिली है। उन्होंने बताया कि सड़क शिक्षा और औद्योगिक ढांचे में सुधार हो रहा है जिससे यह क्षेत्र भविष्य में और अधिक समृद्ध स्वरूप में सामने आएगा। उन्होंने विश्वप्रसिद्ध रामनगर रामलीला को और अधिक भव्य और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
मंदिर पुनर्निर्माण और सांस्कृतिक संकल्प
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष जीत सिन्हा ने मां मनसा देवी मंदिर के भव्य पुनर्निर्माण का संकल्प व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं बल्कि आस्था और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है जिसे आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित करना आवश्यक है।
गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति
इस अवसर पर भाजपा काशी प्रांत के क्षेत्रीय अध्यक्ष दिलीप पटेल पतंजलि मिश्रा पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष आशा गुप्ता शशिभूषण तिवारी सहित कई गणमान्य लोग मंचासीन रहे। कार्यक्रम का संचालन शैलेंद्र किशोर पांडेय ने किया। आयोजन में आकाश दीप मुरारी लाल यादव राज श्रीवास्तव अशोक राय नागेंद्र रघुवंशी रतन सिंह भूपेंद्र अग्रवाल नरेंद्र सिंह और सर्वेश सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
मां मनसा देवी का पौराणिक महत्व
मां मनसा देवी को हिंदू परंपरा में नागों की देवी और इच्छाओं की पूर्ति करने वाली शक्ति के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि वह भगवान शिव के मन से उत्पन्न हुई थीं और नागलोक की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं। उन्हें विष से रक्षा करने वाली रोग और शोक का नाश करने वाली तथा भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली देवी के रूप में अत्यंत श्रद्धा से पूजा जाता है।
रामनगर स्थित यह मंदिर स्थानीय आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र है जो वर्षों से समाज के धार्मिक और सामाजिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बना हुआ है।
रामनगर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान
रामनगर अपनी विश्वप्रसिद्ध रामलीला के लिए जाना जाता है जिसे यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर परंपराओं में विशिष्ट स्थान प्राप्त है। यहां की रामलीला आज भी पारंपरिक शैली में मंचित होती है जिसमें काशी नरेश की भूमिका और ऐतिहासिक प्रस्तुति शैली इसे विशेष बनाती है।
इसके साथ ही रामनगर का किला गंगा किनारे की भव्यता और आध्यात्मिक वातावरण इस क्षेत्र को एक जीवंत सांस्कृतिक केंद्र बनाते हैं। यही कारण है कि रामनगर को भारत की सांस्कृतिक स्मृति का एक जीवित अध्याय माना जाता है।
निष्कर्ष और भविष्य की दिशा
इस पूरे आयोजन ने यह संदेश दिया कि रामनगर की विरासत केवल अतीत की धरोहर नहीं बल्कि भविष्य के विकास की मजबूत आधारशिला भी है। इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है ताकि यह ऐतिहासिक क्षेत्र अपनी सांस्कृतिक पहचान के साथ आगे भी विकसित होता रहे।
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