जाति प्रमाणपत्र गड़बड़ी पर गरजे सतेन्द्र बारी, हक से खिलवाड़ नहीं सहेंगे पश्चिमी यूपी में बड़े स्तर की जांच तय
लखनऊ: उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की बैठक मंगलवार को उस समय असाधारण रूप से तीखी और निर्णायक हो उठी जब आयोग के सदस्य सतेन्द्र बारी उर्फ बीनू जी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारी समाज के जाति प्रमाणपत्रों से जुड़ी गंभीर अनियमितताओं का मुद्दा पूरी मजबूती के साथ उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में बारी समाज के लोगों के प्रमाणपत्र गलत तरीके से नाई जाति के नाम पर जारी कर दिए गए हैं जिसे उन्होंने सीधे तौर पर सामाजिक न्याय के अधिकारों पर गंभीर चोट बताया।
बैठक के दौरान माहौल उस समय और गंभीर हो गया जब सतेन्द्र बारी ने तथ्यों और उदाहरणों के आधार पर अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। उनके तेवर में सख्ती के साथ साथ उन हजारों प्रभावित परिवारों की पीड़ा भी झलक रही थी जो लंबे समय से अपने अधिकारों से वंचित रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह केवल प्रशासनिक भूल नहीं बल्कि समाज के साथ अन्याय है और इस तरह के अन्याय को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उच्चस्तरीय जांच की मांग
सतेन्द्र बारी के सख्त रुख के बाद बैठक में मौजूद अधिकारियों को मामले की गंभीरता को स्वीकार करना पड़ा। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। उनके हस्तक्षेप के बाद आयोग ने इस मामले को प्राथमिकता के आधार पर लेते हुए आगे की प्रक्रिया को तेज करने के संकेत दिए।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में व्यापक जांच की तैयारी
सूत्रों के अनुसार पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में इस मुद्दे को लेकर व्यापक स्तर पर जांच की तैयारी शुरू हो चुकी है। प्रारंभिक जानकारी में यह सामने आया है कि बड़ी संख्या में ऐसे प्रमाणपत्र हैं जिन्हें गलत श्रेणी में जारी किया गया है। यदि जांच में ये तथ्य सही पाए जाते हैं तो संबंधित प्रमाणपत्रों को निरस्त कर प्रभावित लोगों को उनके वास्तविक वर्ग के अनुसार नए प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे जिससे उन्हें शिक्षा रोजगार और अन्य सरकारी योजनाओं में उनका अधिकार मिल सके।
हक की लड़ाई जारी रखने का संकल्प
सतेन्द्र बारी उर्फ बीनू जी ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि समाज के अधिकारों से खिलवाड़ किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब तक हर पात्र व्यक्ति को उसका अधिकार नहीं मिल जाता तब तक यह प्रयास जारी रहेगा। उनके इस बयान ने बैठक के स्वर को और स्पष्ट कर दिया और यह संकेत दिया कि वह इस मुद्दे को अंत तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इस पहल को एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। सतेन्द्र बारी की कार्यशैली जिसमें सख्ती और संवेदनशीलता का संतुलन दिखाई देता है उन्हें एक सक्रिय जनप्रतिनिधि के रूप में स्थापित कर रही है। विभिन्न सामाजिक संगठनों और समुदाय के लोगों ने इस मुद्दे को उठाने के लिए उनकी सराहना की है और इसे न्याय की दिशा में एक अहम पहल बताया है।
व्यवस्था पर उठे सवाल और आगे की दिशा
यह मामला केवल जाति प्रमाणपत्रों की त्रुटि तक सीमित नहीं है बल्कि यह उस व्यापक व्यवस्था की परीक्षा भी है जो समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुंचाने का दावा करती है। ऐसे में यह जांच न केवल प्रशासनिक जवाबदेही तय करेगी बल्कि भविष्य में इस प्रकार की त्रुटियों को रोकने के लिए भी दिशा तय करेगी।
आने वाले दिनों में इस जांच के परिणाम पर पूरे प्रदेश की नजर बनी रहेगी। हालांकि यह स्पष्ट है कि इस मुद्दे को जिस दृढ़ता और स्पष्टता के साथ उठाया गया है उसने प्रशासनिक तंत्र को सक्रिय कर दिया है और प्रभावित समाज में एक नई उम्मीद जगा दी है कि उन्हें उनका अधिकार अवश्य मिलेगा।
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