काशी के 7 प्राचीन मंदिरों के जीर्णोद्धार को 14 करोड़ की मंजूरी, पर्यटन को मिलेगा नया आयाम
वाराणसी में धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। काशी के सात प्रमुख प्राचीन मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए शासन ने कुल 14 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। इसके साथ ही प्रारंभिक कार्यों के लिए पर्यटन विभाग को लगभग साढ़े तीन करोड़ रुपये की धनराशि जारी भी कर दी गई है। इस परियोजना के जरिए न केवल मंदिरों का संरक्षण किया जाएगा, बल्कि काशी आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।
उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद को सौंपी गई जिम्मेदारी
शासन द्वारा इस परियोजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद को सौंपी गई है। पर्यटन विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वह जल्द से जल्द डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करे, ताकि कार्यों को समयबद्ध तरीके से शुरू किया जा सके। डीपीआर तैयार करते समय क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों से भी सुझाव लेने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे विकास कार्य अधिक व्यावहारिक और उपयोगी बन सके।
श्रद्धालुओं की सुविधा पर रहेगा विशेष ध्यान
परियोजना के अंतर्गत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मंदिरों तक आने-जाने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। मार्ग, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, स्वच्छता और अन्य मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। यदि किसी मंदिर तक पहुंचने में कठिनाई है, तो उसके समाधान के लिए स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
पर्यटन को बढ़ावा देने की रणनीति
काशी में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए यह योजना काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पर्यटन विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि जीर्णोद्धार किए जाने वाले मंदिरों को अपने आधिकारिक नक्शे और गाइड बुक में शामिल किया जाए। साथ ही स्थानीय गाइडों के साथ बैठक कर उन्हें इन मंदिरों की जानकारी दी जाए, ताकि वे आने वाले पर्यटकों को इन स्थलों तक ले जा सकें।
इसके अलावा, मंदिरों के आसपास के क्षेत्रों को भी पर्यटन के लिहाज से विकसित किया जाएगा। ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ और होमस्टे जैसी सुविधाओं को बढ़ावा देकर स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान करने की योजना भी बनाई गई है। इससे ग्रामीण पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा और पर्यटक स्थानीय संस्कृति, परंपरा और जीवनशैली से रूबरू हो सकेंगे।
पहले 10 मंदिरों का प्रस्ताव, 7 को मिली मंजूरी
पर्यटन विभाग द्वारा पहले कुल 10 मंदिरों के जीर्णोद्धार का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। इनमें से फिलहाल 7 मंदिरों को मंजूरी दी गई है। शेष मंदिरों पर भी भविष्य में विचार किया जा सकता है।
इन मंदिरों के लिए स्वीकृत हुई राशि
- सिंधोरा स्थित हनुमान मंदिर – 2 करोड़ 95 लाख रुपये
- ग्रामसभा कोटा स्थित खाकी कुटी मंदिर – 2 करोड़ 70 लाख रुपये
- मुड़ादेव स्थित महादेव मंदिर – 3 करोड़ 14 लाख रुपये
- देवरिया पूरे स्थित हनुमान मंदिर – 2 करोड़ 90 लाख रुपये
- ग्रामसभा गोला स्थित हनुमान मंदिर – 2 करोड़ 95 लाख रुपये
- जक्खिनी स्थित यक्षणी माता मंदिर – 2 करोड़ 10 लाख रुपये
- नमोघाट स्थित भगवान विश्वकर्मा मंदिर – 1 करोड़ 50 लाख रुपये
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल
मंदिरों के जीर्णोद्धार के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों के बढ़ने से स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। होटल, होमस्टे, परिवहन, गाइड सेवा और स्थानीय उत्पादों की बिक्री में वृद्धि होगी, जिससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
इसके अलावा, देश-विदेश से आने वाले पर्यटक भारतीय संस्कृति, परंपरा और काशी की धार्मिक महत्ता को और करीब से समझ सकेंगे। काशी पहले से ही आध्यात्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र रहा है और इस योजना के बाद इसकी पहचान और भी मजबूत होने की उम्मीद है।
संस्कृति संरक्षण के साथ विकास का संतुलन
यह पहल केवल मंदिरों के सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य काशी की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना भी है। जीर्णोद्धार कार्यों में पारंपरिक स्थापत्य शैली और ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखा जाएगा, ताकि मंदिरों की मूल पहचान बरकरार रहे।
कुल मिलाकर, यह योजना काशी को धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के वैश्विक मानचित्र पर और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है।
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