काशी विश्वनाथ मंदिर गेट नंबर चार पर सुरक्षाकर्मियों के दुर्व्यवहार के मामले में कार्रवाई
अमित मिश्रा की रिपोर्ट : वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर के गेट नंबर चार पर सुरक्षाकर्मियों द्वारा भक्तों और मीडिया कर्मियों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की है। एक पत्रकार को थप्पड़ मारने और महिला पत्रकार के साथ अभद्रता का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद संबंधित पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से ड्यूटी से हटा दिया गया है और उन्हें पुलिस लाइन से संबद्ध कर दिया गया है। साथ ही मामले में उच्चस्तरीय विभागीय जांच के आदेश भी जारी किए गए हैं।
वीडियो वायरल होने के बाद बढ़ा दबाव
घटना मंदिर परिसर के गेट नंबर चार की बताई जा रही है, जहां ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मियों पर मीडिया कर्मियों के साथ बदसलूकी का आरोप लगा। वायरल वीडियो में एक पुरुष पत्रकार के साथ धक्का-मुक्की और थप्पड़ मारने की घटना दिखाई दे रही है। इसके अलावा एक महिला पत्रकार के साथ भी अभद्र व्यवहार किए जाने की बात सामने आई है। वीडियो सामने आते ही मामला तेजी से चर्चा में आ गया और प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया।
जानकारी के अनुसार, मीडिया कर्मी कवरेज के सिलसिले में गेट नंबर चार के पास मौजूद थे। किसी बात को लेकर कहासुनी बढ़ी और मामला हाथापाई तक पहुंच गया। हालांकि जांच पूरी होने तक पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि जांच रिपोर्ट के आधार पर ही होगी।
पुलिसकर्मियों को हटाकर पुलिस लाइन भेजा गया
पुलिस प्रशासन ने प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से ड्यूटी से हटा दिया है। उन्हें पुलिस लाइन संबद्ध किया गया है ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके। विभागीय जांच उच्च अधिकारियों की निगरानी में कराई जा रही है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में कोई भी कर्मी दोषी पाया जाता है तो उसके विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि महिला सम्मान, प्रेस की स्वतंत्रता और धार्मिक स्थलों की गरिमा से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
मीडिया और समाज में नाराजगी
इस घटना के बाद स्थानीय पत्रकारों और मीडिया संगठनों में नाराजगी देखी गई है। कई पत्रकारों ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता और गरिमा से जुड़ा मुद्दा बताया है। उनका कहना है कि मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था आवश्यक है, लेकिन इसके नाम पर मीडिया कर्मियों या श्रद्धालुओं के साथ दुर्व्यवहार उचित नहीं है।
सामाजिक स्तर पर भी इस घटना को लेकर चर्चा तेज है। काशी को धर्म और आध्यात्म की नगरी माना जाता है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी केवल व्यवस्था बनाए रखना ही नहीं, बल्कि संयम और शालीनता का पालन करना भी है।
धार्मिक स्थलों पर संयम की आवश्यकता
धार्मिक स्थलों पर तैनात सुरक्षा कर्मियों को भीड़ प्रबंधन और कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी निभानी होती है। कई बार भीड़ और दबाव की स्थिति में तनाव की स्थिति बन सकती है, लेकिन प्रशिक्षण और अनुशासन का उद्देश्य यही है कि ऐसे समय में भी संतुलित व्यवहार बना रहे।
यह घटना प्रशासन के लिए एक संकेत है कि संवेदनशील स्थानों पर ड्यूटी कर रहे कर्मियों को व्यवहारिक प्रशिक्षण और संवाद कौशल पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। महिला सम्मान और प्रेस की स्वतंत्रता जैसे मुद्दे संवैधानिक अधिकारों से जुड़े हैं, इसलिए ऐसे मामलों में त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई आवश्यक है।
फिलहाल विभागीय जांच की रिपोर्ट का इंतजार है। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि घटना की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और किस स्तर पर जिम्मेदारी तय की जाएगी।
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