लखनऊ में शोक की लहर समाजसेवी गीरीवर प्रसाद चौहान को सतेंद्र बारी ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
लखनऊ: प्रदेश की राजधानी लखनऊ में उस समय गहरा शोक और संवेदनाओं का माहौल छा गया जब प्रख्यात समाजसेवी स्वर्गीय गीरीवर प्रसाद चौहान के निधन का समाचार लोगों तक पहुंचा। समाजसेवा के क्षेत्र में अपने उल्लेखनीय योगदान के लिए पहचाने जाने वाले चौहान के आकस्मिक निधन से न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे सामाजिक और राजनीतिक परिवेश में शोक की लहर फैल गई। उनके व्यक्तित्व और कार्यों को याद करते हुए लोग उन्हें एक कर्मठ और समर्पित समाजसेवी के रूप में स्मरण कर रहे हैं।
राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य सतेंद्र बारी उर्फ बीनू जी इस दुखद समाचार के मिलते ही बालवड्डा स्थित उनके आवास पर पहुंचे और शोक संतप्त परिजनों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने परिवार के सदस्यों को सांत्वना देते हुए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। उनके चेहरे पर स्पष्ट भावुकता दिखाई दी जो यह दर्शा रही थी कि चौहान का जाना एक बड़ी क्षति के रूप में देखा जा रहा है।
समाज सेवा को समर्पित रहा जीवन
श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए सतेंद्र बारी ने कहा कि गीरीवर प्रसाद चौहान का पूरा जीवन समाज और राष्ट्र की सेवा को समर्पित रहा। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान न केवल प्रशासनिक जिम्मेदारियों को निभाया बल्कि समाज के हर वर्ग के लोगों के उत्थान के लिए निरंतर प्रयास किए। उनका व्यक्तित्व सरल और सहज था और वे मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता देने वाले व्यक्ति के रूप में जाने जाते थे।
परिजनों को दी सांत्वना
इस अवसर पर सतेंद्र बारी ने चौहान के सुपुत्र और भाजपा नेता दीपक चौहान से भी मुलाकात की और उन्हें इस कठिन समय में धैर्य बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि पूरा समाज उनके साथ खड़ा है और इस दुख की घड़ी में सभी उनकी संवेदनाओं के साथ जुड़े हुए हैं। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को शांति मिले और परिवार को इस दुख को सहने की शक्ति प्राप्त हो।
श्रद्धांजलि में उमड़ा जनसमूह
आवास पर मौजूद लोगों की आंखें नम थीं और हर कोई अपने अपने तरीके से चौहान को याद कर रहा था। किसी ने उनकी सादगी का उल्लेख किया तो किसी ने उनके सामाजिक कार्यों को याद किया। वातावरण पूरी तरह से भावुकता और श्रद्धा से भरा हुआ था जहां हर व्यक्ति उनके जीवन से प्रेरणा लेने की बात कर रहा था।
समाज के लिए प्रेरणास्रोत
गीरीवर प्रसाद चौहान का जीवन समाज के लिए एक प्रेरणा के रूप में देखा जाता है। उनकी सेवा भावना और लोगों के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों को मार्गदर्शन देता रहेगा। उनके निधन से जो रिक्तता उत्पन्न हुई है उसे भर पाना आसान नहीं होगा लेकिन उनके कार्य और विचार हमेशा लोगों के बीच जीवित रहेंगे।
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