नई दिल्ली: संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के भारत आगमन ने भारत-यूएई संबंधों को एक बार फिर नई ऊंचाई दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वयं दिल्ली हवाई अड्डे पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया जाना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि दोनों देशों के रिश्ते अब केवल कूटनीतिक औपचारिकताओं तक सीमित नहीं रहे, बल्कि विश्वास, साझेदारी और साझा भविष्य की मजबूत बुनियाद पर खड़े हैं। यह स्वागत ऐसे समय में हुआ है, जब भारत और यूएई की मित्रता रणनीतिक, आर्थिक और वैश्विक स्तर पर निर्णायक भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने स्वागत के दौरान इस यात्रा को द्विपक्षीय संबंधों में बढ़ते आपसी भरोसे और सहयोग की भावना का प्रतीक बताया। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति पद संभालने के बाद शेख मोहम्मद बिन जायद की यह भारत की तीसरी आधिकारिक यात्रा है, जबकि पिछले एक दशक में वह पांचवीं बार भारत आए हैं। यह निरंतरता दर्शाती है कि दोनों देशों के नेतृत्व के बीच संवाद और साझेदारी कितनी गहरी और स्थायी हो चुकी है।
इस यात्रा की पृष्ठभूमि में वर्ष 2022 में हस्ताक्षरित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) एक मजबूत आधार के रूप में सामने आता है। CEPA के लागू होने के बाद भारत-यूएई व्यापार ने अभूतपूर्व गति पकड़ी है। वित्त वर्ष 2024-25 में द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है, जो न केवल आंकड़ों की मजबूती दर्शाता है, बल्कि दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच बढ़ते भरोसे और सहयोग की कहानी भी कहता है। निर्यात और आयात, दोनों ही क्षेत्रों में उल्लेखनीय वृद्धि ने इस साझेदारी को नई पहचान दी है।
व्यापार और निवेश के मोर्चे पर यूएई आज भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और दूसरा सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य बन चुका है। भारत से यूएई को भेजे जाने वाले प्रमुख उत्पादों में आभूषण, परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स और कृषि उपज शामिल हैं, जबकि यूएई से भारत में कच्चा तेल, सोना और हीरों का बड़े पैमाने पर आयात होता है। इसके साथ-साथ विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) के क्षेत्र में भी यूएई भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रमुख साझेदार के रूप में उभरा है। CEPA और निवेश समझौतों के तहत अब तक अरबों डॉलर का निवेश भारत में आ चुका है, वहीं लगभग 75 अरब डॉलर के दीर्घकालिक निवेश का वचन दोनों देशों के बीच साझा किया गया है, जिससे बुनियादी ढांचे, बंदरगाहों, ऊर्जा और औद्योगिक क्षेत्रों में नए अवसर सृजित हो रहे हैं।
रणनीतिक और रक्षा सहयोग के स्तर पर भी यह यात्रा अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत और यूएई के बीच रक्षा साझेदारी लगातार मजबूत हुई है। साझा सुरक्षा हितों, रक्षा मंचों और संयुक्त सैन्य अभ्यासों के माध्यम से दोनों देश क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में एक-दूसरे के सहयोगी बने हैं। यह संबंध केवल सैन्य सहयोग तक सीमित नहीं, बल्कि स्थिरता, शांति और सामूहिक सुरक्षा की साझा सोच को भी प्रतिबिंबित करता है।
ऊर्जा और जलवायु सहयोग भारत-यूएई संबंधों का एक और मजबूत स्तंभ है। यूएई लंबे समय से भारत का प्रमुख ऊर्जा आपूर्तिकर्ता रहा है, जिसमें कच्चा तेल और एलएनजी शामिल हैं। यह साझेदारी भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती प्रदान करती है। साथ ही, हरित ऊर्जा, नवीकरणीय संसाधनों और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग भविष्य की ऊर्जा जरूरतों और जलवायु लक्ष्यों को साधने में अहम भूमिका निभा सकता है।
लोगों-से-लोगों के संबंध इस साझेदारी की आत्मा कहे जा सकते हैं। हजारों वर्षों पुराने सांस्कृतिक और व्यापारिक संपर्क आज आधुनिक आर्थिक और कूटनीतिक रिश्तों को और भी मजबूत बना रहे हैं। यूएई में तीन मिलियन से अधिक भारतीय समुदाय न केवल वहां की अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहा है, बल्कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक सेतु का कार्य भी कर रहा है।
राजधानी में आयोजित होने वाली औपचारिक बैठकों के दौरान राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, तकनीक और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे अहम मुद्दों पर व्यापक चर्चा करेंगे। यह दौरा न केवल द्विपक्षीय एजेंडे को नई दिशा देगा, बल्कि भारत-यूएई गठबंधन को क्षेत्रीय ही नहीं, वैश्विक मंच पर भी एक प्रभावशाली शक्ति के रूप में स्थापित करने की क्षमता रखता है।
कुल मिलाकर, शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की यह यात्रा भारत-यूएई रणनीतिक साझेदारी के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में देखी जा रही है। एक ऐसा अध्याय, जो साझा लक्ष्यों, गहरे विश्वास और भविष्य की संभावनाओं से भरा हुआ है, और जिसमें हर शब्द, हर कदम और हर संवाद दोनों देशों के उज्ज्वल भविष्य की कहानी लिखता नजर आता है।
