भाजपा प्रदेश संगठन में बड़े बदलाव की आहट, दिल्ली में चली लंबी मंथन बैठकें, सूची पर अंतिम मुहर का इंतजार
प्रदेश संगठन के पुनर्गठन को लेकर तेज हुई हलचल, क्षेत्रीय अध्यक्षों और मोर्चा पदाधिकारियों पर अब भी फंसा पेंच
लखनऊ: भारतीय जनता पार्टी के उत्तर प्रदेश संगठन में संभावित बड़े बदलावों को लेकर पिछले कई दिनों से जारी बैठकों और मंथन का दौर अभी थमता नजर नहीं आ रहा है। संगठनात्मक पुनर्गठन को लेकर लखनऊ से लेकर दिल्ली तक लगातार बैठकों का सिलसिला जारी है और अब राजनीतिक गलियारों में नई सूची को लेकर चर्चाओं का बाजार भी गर्म हो चुका है। शनिवार को भी इस संबंध में एक महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित थी, लेकिन राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतिन नवीन की अनुपस्थिति के कारण यह बैठक एक दिन के लिए आगे बढ़ा दी गई। हालांकि बैठक टलने के बावजूद संगठनात्मक गतिविधियां पूरी तरह थमी नहीं और दिल्ली में शीर्ष नेताओं के बीच लंबी रणनीतिक चर्चा का दौर जारी रहा।
सूत्रों के अनुसार बैंगलुरू और गाजियाबाद के कार्यक्रमों से लौटने के बाद प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह दिल्ली पहुंचे, जहां उन्होंने राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े के आवास पर उत्तर प्रदेश संगठन की नई सूची को लेकर दो घंटे से अधिक समय तक गहन चर्चा की। इस दौरान संगठन में प्रस्तावित बदलावों, संभावित नामों और विभिन्न पदों पर नए चेहरों को लेकर व्यापक मंथन हुआ। माना जा रहा है कि अब रविवार को होने वाली बैठक काफी निर्णायक साबित हो सकती है, जहां सूची पर अंतिम सहमति बन सकती है। यदि सब कुछ तय रहा तो सोमवार या मंगलवार तक नई सूची सार्वजनिक की जा सकती है।
लखनऊ से दिल्ली तक कई दौर की बैठकों के बाद भी नहीं बनी पूरी सहमति
भाजपा प्रदेश संगठन में इस बार बदलाव केवल औपचारिक नहीं माना जा रहा बल्कि इसे संगठनात्मक पुनर्संतुलन और नई रणनीति का हिस्सा समझा जा रहा है। प्रदेश स्तर पर महामंत्री, उपाध्यक्ष, मंत्री, प्रवक्ता, मीडिया प्रभारी, युवा मोर्चा, अल्पसंख्यक मोर्चा और किसान मोर्चा सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियों को लेकर कई दौर की चर्चाएं हो चुकी हैं। इसके साथ ही छह क्षेत्रीय अध्यक्षों की नियुक्ति भी इस पुनर्गठन का प्रमुख हिस्सा मानी जा रही है।
प्रदेश अध्यक्ष और महामंत्री संगठन पिछले तीन दिनों से दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं और लगातार शीर्ष नेतृत्व के साथ बैठकों में शामिल हो रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा इस बार संगठन को आगामी राजनीतिक चुनौतियों और चुनावी रणनीति के अनुरूप नया स्वरूप देने की तैयारी में है।
पुराने चेहरों पर उठ रहे सवाल, नए नामों को लेकर बढ़ी सक्रियता
सूत्रों की मानें तो संगठन में कई ऐसे पदाधिकारी हैं जो पिछले एक दशक से विभिन्न जिम्मेदारियों पर बने हुए हैं। इनमें कुछ नामों को लेकर समय समय पर सवाल भी उठते रहे हैं। यही वजह है कि प्रदेश नेतृत्व इस बार संगठन में व्यापक बदलाव का मन बना चुका है। संगठन के भीतर लंबे समय से एक ही पद पर कार्यरत नेताओं की जगह नए और सक्रिय चेहरों को अवसर देने पर विचार किया जा रहा है।
हालांकि इस प्रक्रिया ने राजनीतिक समीकरणों को भी जटिल बना दिया है। कई वरिष्ठ नेता अपने करीबी और पसंदीदा चेहरों को संगठन में दोबारा महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिलाने के लिए सक्रिय बताए जा रहे हैं। कुछ नेताओं की ओर से अपने समर्थकों के लिए शीर्ष नेतृत्व स्तर पर सिफारिशें भी की जा रही हैं।
अमित शाह और राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंची सिफारिशें
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि कई बड़े नेताओं ने अपने समर्थकों के नामों को लेकर केंद्रीय नेतृत्व से संपर्क साधा है। बताया जा रहा है कि कुछ नामों को लेकर गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतिन नवीन स्तर तक भी पैरवी की जा रही है। हालांकि प्रदेश नेतृत्व इन सभी नामों पर सहमत नहीं दिख रहा है और यही कारण है कि अंतिम निर्णय में देरी हो रही है।
विशेष रूप से क्षेत्रीय अध्यक्षों और विभिन्न मोर्चों के पदाधिकारियों के नामों को लेकर अब भी सहमति का अभाव बना हुआ है। कई नामों पर चर्चा तो हुई है लेकिन अंतिम रूप देने में शीर्ष नेतृत्व पूरी सतर्कता बरत रहा है।
क्षेत्रीय अध्यक्ष और मोर्चा पदाधिकारी बने सबसे बड़ी चुनौती
भाजपा संगठन के प्रमुख पदों पर अधिकांश नामों को लेकर सहमति बनने की चर्चा है, लेकिन क्षेत्रीय अध्यक्षों और अनुषांगिक संगठनों के पदों पर अभी भी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं हो पाई है। केंद्रीय नेतृत्व की ओर से प्रदेश नेतृत्व से विभिन्न मोर्चों के अध्यक्षों के नाम भी मांगे गए हैं। इन पदों के लिए बड़ी संख्या में दावेदार सामने आने से स्थिति और जटिल होती दिखाई दे रही है।
संगठन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि रविवार या सोमवार तक सभी मोर्चों के अध्यक्षों और अन्य पदाधिकारियों की सूची को अंतिम रूप दिया जा सकता है। इसके बाद संगठनात्मक फेरबदल की आधिकारिक घोषणा की संभावना जताई जा रही है।
नई सूची पर टिकीं राजनीतिक नजरें
उत्तर प्रदेश की राजनीति में भाजपा संगठन के बदलाव को केवल आंतरिक पुनर्गठन के रूप में नहीं देखा जा रहा बल्कि इसे आने वाले राजनीतिक समीकरणों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। नई जिम्मेदारियां किन नेताओं को मिलती हैं और किन पुराने चेहरों को संगठन में स्थान मिलता है, इस पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं। दिल्ली में चल रहे मंथन का अंतिम परिणाम अब अगले कुछ दिनों में सामने आने की संभावना है।
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