प्रयागराज: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं आगामी 18 फरवरी से शुरू होने जा रही हैं। इस बार परीक्षा की शुचिता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बोर्ड प्रशासन ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। प्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत बोर्ड इतिहास में पहली बार परीक्षा केंद्रों पर जैमर का उपयोग करने जा रहा है। नकलविहीन परीक्षा के संकल्प को पूरा करने के लिए बोर्ड ने इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया है। वर्तमान में प्रदेशभर के कुल 8033 परीक्षा केंद्रों में से चुनिंदा 20 केंद्रों पर आधुनिक जैमर लगाए जाने का निर्णय लिया गया है। इन जैमर के सक्रिय होने से परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक संचार जैसे व्हाट्सएप, टेलीग्राम या अन्य सोशल मीडिया माध्यमों से प्रश्नपत्र या हल सामग्री का आदान-प्रदान पूरी तरह असंभव हो जाएगा। अक्सर यह देखा गया है कि तकनीक के गलत इस्तेमाल से प्रश्नपत्रों को बाहर भेजकर उनके हल मंगाने की कोशिश की जाती है, लेकिन जैमर तकनीक इस नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त कर देगी।
बोर्ड के उच्च अधिकारियों के अनुसार, इन 20 केंद्रों में प्रयागराज के कुछ प्रमुख स्कूल भी शामिल किए गए हैं। हालांकि सुरक्षा कारणों और इस प्रयोग की प्रभावशीलता को बनाए रखने के लिए इन केंद्रों के नाम पूरी तरह गोपनीय रखे गए हैं। जैमर लगने से न केवल नकल पर अंकुश लगेगा, बल्कि उन गिरोहों पर भी लगाम लगेगी जो परीक्षा के दौरान मोबाइल या ब्लूटूथ डिवाइस का सहारा लेकर धांधली की फिराक में रहते हैं। यूपी बोर्ड का यह कदम संघ लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन आयोग जैसी बड़ी संस्थाओं की तर्ज पर उठाया गया है, जो अपनी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में संचार उपकरणों को बेअसर करने के लिए जैमर का इस्तेमाल करती हैं। यदि इस पायलट प्रोजेक्ट के नतीजे सकारात्मक रहते हैं और परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होती है, तो आगामी वर्षों में इसे अति संवेदनशील और संवेदनशील घोषित किए गए अन्य केंद्रों पर भी अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा।
सिर्फ तकनीक ही नहीं, बल्कि प्रश्नपत्रों की सुरक्षा को लेकर भी इस बार विशेष इंतजाम किए गए हैं। यूपी बोर्ड ने 2026 की परीक्षा से सभी जिलों और केंद्रों पर हर विषय के आरक्षित प्रश्नपत्रों के सेट उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है। पूर्व में केवल मुख्य विषयों के लिए ही यह व्यवस्था लागू की गई थी, लेकिन इस बार इसे विस्तार देते हुए छोटे और बड़े सभी विषयों तक पहुँचा दिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि यदि किसी केंद्र पर प्रश्नपत्र लीक होने या पैकेट के साथ छेड़छाड़ की सूचना मिलती है, तो बिना देरी किए मुख्य प्रश्नपत्र को निरस्त कर तुरंत रिजर्व सेट से परीक्षा कराई जा सके। इससे पूरी परीक्षा रद्द करने की स्थिति नहीं आएगी और लाखों छात्रों का समय बचेगा। परीक्षा 18 फरवरी से 12 मार्च तक दो पालियों में आयोजित की जाएगी। इसमें हाईस्कूल के 27 लाख 61 हजार और इंटर के 25 लाख 76 हजार से अधिक परीक्षार्थी अपनी किस्मत आजमाएंगे। बोर्ड का स्पष्ट संदेश है कि मेहनत करने वाले मेधावी छात्रों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और आधुनिक तकनीक का यह प्रयोग इसी दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।
