वाराणसी में कर्बला के शहीदों का पचासा आज शहर में गूंजेगी नौहाख्वानी और मातम की सदाएं
वाराणसी: कर्बला के शहीदों और असीरों की याद में पचासे का सिलसिला जारी है। बुधवार को शहर के विभिन्न इलाकों में मजलिस और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। फाटक शेख सलीम स्थित रिजवी हाउस में तीन दिवसीय मजलिस के अंतिम दिन कर्बला के शहीदों और असीरों की जिंदगी तथा उनकी कुर्बानियों को याद किया गया। मजलिस के बाद ताबूत अलम जुल्फेकार और दुलदुल का जुलूस निकाला गया। जुलूस अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ दरगाह ए फातमान पहुंचा जहां इसका समापन हुआ। इस दौरान नौहाख्वानी और मातम का सिलसिला जारी रहा। बुधवार की रात दोषीपुरा में शब्बेदारी का आयोजन भी हुआ। गुरुवार को पचासे के अवसर पर वाराणसी के अलग अलग इलाकों से जुलूस निकलेंगे और शहर की लगभग दो दर्जन अंजुमनों के सदर इमामबाड़ा लाट सरैया पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
रिजवी हाउस में तीन दिवसीय मजलिस का अंतिम दिन
फाटक शेख सलीम स्थित रिजवी हाउस में सैयद साबिर हुसैन रिजवी के संयोजन में तीन दिवसीय मजलिस का आयोजन किया गया। बुधवार को मजलिस के अंतिम दिन जामा मस्जिद के प्रवक्ता सैय्यद सलमान हैदर ने मजलिस को खिताब किया। उन्होंने कर्बला के शहीदों और असीरों की जिंदगी का उल्लेख करते हुए कर्बला की घटनाओं और वहां दी गई कुर्बानियों को याद किया। मजलिस में कर्बला के शहीदों की जिंदगी को इंसानियत त्याग और धार्मिक आस्था से जुड़ी मिसाल के रूप में सामने रखा गया। मौजूद अजादारों ने मजलिस में शामिल होकर कर्बला के शहीदों को याद किया।
नौहाख्वानी और मातम से गमगीन हुआ माहौल
मजलिस के दौरान अंजुमन हैदरी बनारस की ओर से नौहाख्वानी पेश की गई। नौहों के माध्यम से कर्बला के शहीदों और उनके परिवार की तकलीफों को याद किया गया। कर्बला की घटनाओं और इमाम हुसैन के परिवार की कठिन परिस्थितियों को याद करते हुए अजादारों ने मातम किया। नौहाख्वानी के दौरान शहादत और परिवार की तकलीफों से जुड़े प्रसंगों का उल्लेख हुआ। इससे मजलिस का माहौल भावुक हो गया। अंजुमन की ओर से अलग अलग नौहे पेश किए गए और अजादारों ने मातम के जरिए अपनी धार्मिक आस्था और अकीदत का इजहार किया।
मजलिस के बाद निकला ताबूत अलम और दुलदुल का जुलूस
मजलिस समाप्त होने के बाद ताबूत अलम जुल्फेकार और दुलदुल का जुलूस निकाला गया। जुलूस फाटक शेख सलीम से रवाना होकर अपने पारंपरिक रास्तों से आगे बढ़ा। जुलूस तुलसी कुआं काली महल और पितरकुंडा समेत पुराने मार्गों से होकर दरगाह ए फातमान पहुंचा। यहां जुलूस का समापन किया गया। पूरे रास्ते नौहाख्वानी और मातम का सिलसिला चलता रहा। जुलूस में शामिल अजादारों ने कर्बला के शहीदों की याद में अपनी अकीदत पेश की। वाराणसी में मोहर्रम और कर्बला से जुड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान ताबूत अलम और अन्य धार्मिक प्रतीकों के जुलूस की पुरानी परंपरा रही है।
जुलूस में शामिल रहे कई लोग
रिजवी हाउस से निकले जुलूस में सैयद शाने अब्बास सैयद मोहम्मद अब्बास सैयद अली अब्बास सैयद असद अब्बास सैयद ऐयतल अब्बास कुनाल सैयद जरगाम सैयद आबिद राजा सैयद अफसर हुसैन सैयद मोदसिर हुसैन रिजवी सैयद फिरोज हुसैन जुल्फेकर जैदी और नयाब रजा समेत कई लोग शामिल रहे। जुलूस के दौरान अंजुमन की ओर से नौहाख्वानी की गई और अजादारों ने मातम किया। धार्मिक कार्यक्रम में शामिल लोगों ने कर्बला के शहीदों को याद करते हुए अपनी अकीदत पेश की।
दोषीपुरा में रात को हुई शब्बेदारी
बुधवार की रात दोषीपुरा में शब्बेदारी का आयोजन किया गया। शब्बेदारी के दौरान कर्बला के शहीदों और असीरों की याद में धार्मिक कार्यक्रम हुए। वाराणसी में दोषीपुरा कर्बला और मोहर्रम से जुड़ी धार्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। पिछले वर्षों में भी इस क्षेत्र में कर्बला के शहीदों की याद में ताबूत और अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे हैं। वर्ष 2025 में भी दोषीपुरा में अंजुमन जाफरिया के नेतृत्व में अठारह बनी हाशिम के ताबूत का जुलूस निकाले जाने की जानकारी सामने आई थी। इस दौरान नौहाख्वानी और मातम किया गया था।
गुरुवार को शहर भर से निकलेंगे पचासे के जुलूस
कर्बला के शहीदों का पचासा गुरुवार को मनाया जाएगा। पचासे के अवसर पर वाराणसी शहर के विभिन्न इलाकों से जुलूस निकलेंगे। आयोजकों के अनुसार शहर की लगभग दो दर्जन अंजुमनें सदर इमामबाड़ा लाट सरैया पहुंचेंगी। वहां अंजुमनों की ओर से नौहाख्वानी और मातम किया जाएगा। अलग अलग मोहल्लों से निकलने वाले जुलूसों के कारण पुराने शहर के कई इलाकों में धार्मिक गतिविधियां बढ़ेंगी। पचासे के आयोजन में अंजुमनों की सामूहिक भागीदारी प्रमुख रहेगी।
सदर इमामबाड़ा लाट सरैया में होगा प्रमुख कार्यक्रम
पचासे के अवसर पर सदर इमामबाड़ा लाट सरैया में अंजुमनों के पहुंचने और वहां नौहाख्वानी तथा मातम करने की परंपरा रही है। वाराणसी में कर्बला की याद से जुड़े आयोजनों में सरैया क्षेत्र की विशेष भूमिका रही है। वर्ष 2026 में भी मोहर्रम के दौरान सदर इमामबाड़ा और कर्बला से जुड़े कई कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। जुलाई 2026 में वाराणसी में शहीदाने कर्बला की याद में 72 ताबूतों का जुलूस सदर इमामबाड़ा से निकाले जाने की जानकारी भी सामने आई थी। उस आयोजन में मौलाना सैयद मोहम्मद हुसैनी ने मजलिस में शहीदों की कुर्बानी का उल्लेख किया था।
कर्बला के शहीदों की याद में मनाया जाता है पचासा
पचासा कर्बला के शहीदों की याद से जुड़ा धार्मिक आयोजन है। कर्बला की घटना को शिया समुदाय में शहादत सब्र त्याग और धार्मिक आस्था के महत्वपूर्ण प्रसंग के रूप में याद किया जाता है। मोहर्रम के दौरान मजलिस नौहाख्वानी मातम ताबूत अलम और जुलूस के माध्यम से इमाम हुसैन और कर्बला के अन्य शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है। पचासे के अवसर पर कर्बला के शहीदों और असीरों की याद को विशेष रूप से सामने रखा जाता है। वाराणसी में इन आयोजनों की अपनी पुरानी धार्मिक और सामाजिक परंपरा है।
वाराणसी में मोहर्रम और कर्बला से जुड़ी पुरानी जुलूस परंपरा
वाराणसी में मोहर्रम और कर्बला से जुड़े जुलूस पुराने शहर के कई मोहल्लों से होकर निकलते हैं। अलग अलग अंजुमनें अपने निर्धारित रास्तों से होकर धार्मिक स्थलों और इमामबाड़ों तक पहुंचती हैं। ताजियों और अन्य धार्मिक जुलूसों के संबंध में वाराणसी में कई पुरानी परंपराओं का उल्लेख मिलता है। जून 2026 में प्रकाशित जानकारी के अनुसार काजी सादुल्लापुरा और रांगे वाली सहित कुछ ताजियों के जुलूस दो सौ वर्ष से अधिक समय से अलईपुरा और तेलियाना फाटक होते हुए सरैया स्थित कर्बला तक जाने की परंपरा से जुड़े बताए गए हैं।
दरगाह ए फातमान का भी रहा है महत्वपूर्ण स्थान
कर्बला से जुड़े धार्मिक आयोजनों में वाराणसी स्थित दरगाह ए फातमान का भी महत्वपूर्ण स्थान रहा है। यहां पूर्व में कर्बला के शहीदों की याद में ताबूत के कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे हैं। वर्ष 2022 में दरगाह ए फातमान में अठारह बनी हाशिम के मातम का आयोजन और ताबूत उठाए जाने की जानकारी सामने आई थी। उस आयोजन में मजलिस के बाद अठारह ताबूत उठाए गए थे और कर्बला के शहीदों को याद किया गया था। बुधवार को रिजवी हाउस से निकला जुलूस भी दरगाह ए फातमान पहुंचकर समाप्त हुआ।
बुधवार के जुलूस में पुलिस और पीएसी की मौजूदगी
बुधवार को रिजवी हाउस से निकले जुलूस के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस और पीएसी के जवान मौजूद रहे। चेतगंज थाना प्रभारी विजय कुमार शुक्ला विकास कुमार मिश्रा तथा पुलिस और पीएसी के जवानों ने जुलूस के दौरान सुरक्षा व्यवस्था संभाली। जुलूस के पारंपरिक मार्गों से गुजरने के दौरान पुलिस की मौजूदगी बनी रही। गुरुवार को पचासे के अवसर पर शहर के कई हिस्सों से जुलूस निकलने को देखते हुए सुरक्षा और यातायात व्यवस्था प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण रहेगी।
पुराने शहर के रास्तों पर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था चुनौती
पचासे के जुलूस पुराने शहर के कई संकरे और व्यस्त मार्गों से होकर गुजरते हैं। ऐसे में धार्मिक आयोजन के साथ सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण होता है। जुलूसों की संख्या अधिक होने पर अलग अलग मार्गों पर पुलिस बल की तैनाती और भीड़ को नियंत्रित करने की आवश्यकता होती है। वाराणसी में धार्मिक आयोजनों के दौरान पुलिस प्रशासन संवेदनशील मार्गों पर निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था करता रहा है। बुधवार के कार्यक्रम में भी पुलिस और पीएसी की मौजूदगी रही। गुरुवार के आयोजन में भी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार पुलिस व्यवस्था पर नजर रहेगी।
अंजुमनों की नौहाख्वानी और मातम रहेगा मुख्य हिस्सा
गुरुवार के पचासे में शहर की लगभग दो दर्जन अंजुमनों के सदर इमामबाड़ा लाट सरैया पहुंचने की जानकारी दी गई है। अंजुमनों की ओर से नौहाख्वानी और मातम किया जाएगा। नौहाख्वानी में कर्बला के शहीदों की शहादत और इमाम हुसैन के परिवार की कठिनाइयों को याद किया जाता है। मातम के माध्यम से अजादार अपनी धार्मिक भावनाएं व्यक्त करते हैं। बुधवार को रिजवी हाउस में भी इसी परंपरा के तहत नौहाख्वानी और मातम किया गया। गुरुवार को होने वाले पचासे के मुख्य आयोजन में भी यही धार्मिक परंपरा केंद्र में रहेगी।
पचासे में धार्मिक परंपरा के साथ सामूहिक सहभागिता
वाराणसी में कर्बला से जुड़े धार्मिक आयोजनों में मजलिस और जुलूस के साथ अलग अलग मोहल्लों तथा अंजुमनों की सामूहिक भागीदारी भी देखने को मिलती है। पचासे के अवसर पर अलग अलग स्थानों से जुलूसों का निकलना और एक प्रमुख इमामबाड़े पर अंजुमनों का पहुंचना इसी सामूहिक परंपरा का हिस्सा है। रिजवी हाउस से निकला बुधवार का जुलूस भी पुराने मार्गों से होते हुए दरगाह ए फातमान पहुंचा। इससे वाराणसी में कर्बला की याद से जुड़ी धार्मिक परंपराओं की निरंतरता सामने आती है।
प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण रहेगा गुरुवार का दिन
गुरुवार को पचासे के अवसर पर एक साथ कई जुलूस निकलने के कारण पुलिस प्रशासन के लिए सुरक्षा व्यवस्था महत्वपूर्ण रहेगी। अलग अलग जुलूसों के मार्ग पर भीड़ नियंत्रण यातायात संचालन और धार्मिक कार्यक्रमों को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराना प्राथमिकता होगी। बुधवार के जुलूस के दौरान पुलिस और पीएसी की मौजूदगी रही। पचासे के मुख्य कार्यक्रम के दौरान भी प्रशासन की निगरानी महत्वपूर्ण रहेगी। उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी अतिरिक्त यातायात डायवर्जन या विशेष सुरक्षा आदेश की पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए जुलूसों के मार्ग और व्यवस्था के संबंध में स्थानीय प्रशासन तथा पुलिस के निर्देशों को ही अंतिम माना जाएगा।
कर्बला की याद में जारी रहेगा मातम और नौहाख्वानी
बुधवार को रिजवी हाउस में हुई मजलिस से लेकर दरगाह ए फातमान तक निकले जुलूस और दोषीपुरा में हुई शब्बेदारी तक कर्बला के शहीदों की याद में धार्मिक कार्यक्रमों का सिलसिला जारी रहा। गुरुवार को पचासे के अवसर पर शहर के विभिन्न क्षेत्रों से निकलने वाले जुलूस और सदर इमामबाड़ा लाट सरैया में होने वाली नौहाख्वानी तथा मातम के साथ यह क्रम आगे बढ़ेगा। वाराणसी में कर्बला के शहीदों की याद से जुड़े इन आयोजनों में अंजुमनों और अजादारों की भागीदारी धार्मिक परंपरा के अनुरूप होती है।
पुलिस व्यवस्था पर भी रहेगी नजर
पचासे के दौरान कई जुलूसों के अलग अलग मार्गों से निकलने की स्थिति में पुलिस प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। बुधवार के कार्यक्रम में चेतगंज थाना प्रभारी विजय कुमार शुक्ला विकास कुमार मिश्रा और पुलिस तथा पीएसी के जवानों की मौजूदगी रही। गुरुवार के आयोजन में भी पुलिस की निगरानी और मार्ग व्यवस्था पर नजर रहेगी। किसी भी जुलूस के वास्तविक मार्ग और सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में अंतिम स्थिति स्थानीय प्रशासन और पुलिस के निर्देशों के अनुसार ही मानी जाएगी।
वाराणसी में कर्बला की याद का सिलसिला
वाराणसी में कर्बला के शहीदों की याद में होने वाले कार्यक्रमों की कड़ी में पचासे का आयोजन भी महत्वपूर्ण है। मजलिस में कर्बला की घटना का बयान नौहाख्वानी में शहीदों की याद और जुलूस में ताबूत अलम जुल्फेकार तथा दुलदुल की मौजूदगी इस धार्मिक परंपरा के प्रमुख हिस्से हैं। बुधवार को रिजवी हाउस से निकला जुलूस दरगाह ए फातमान पहुंचकर समाप्त हुआ जबकि गुरुवार को शहर की कई अंजुमनों के सदर इमामबाड़ा लाट सरैया पहुंचने की तैयारी है। इस दौरान नौहाख्वानी और मातम के जरिए कर्बला के शहीदों को खिराज ए अकीदत पेश किया जाएगा।
बुधवार की मजलिस जुलूस और शब्बेदारी से लेकर गुरुवार के पचासे के जुलूस तक कर्बला के शहीदों की याद आयोजन के केंद्र में रहेगी। अलग अलग क्षेत्रों से निकलने वाले जुलूसों में अंजुमनों और अजादारों की भागीदारी रहेगी। सदर इमामबाड़ा लाट सरैया में पहुंचने वाली अंजुमनों की नौहाख्वानी और मातम के साथ पचासे का प्रमुख धार्मिक कार्यक्रम आगे बढ़ेगा। इस दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर पुलिस और प्रशासन की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी।
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