लखीमपुर खीरी में शारदा नदी का बढ़ा जलस्तर बना संकट का कारण, कटान में मकान समाया, स्कूल और सड़क पर भी खतरा
लखीमपुर-खीरी: शारदा नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ ही कटान ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। तहसील निघासन के ग्रंट नंबर 12 गांव में शनिवार को कटान के चलते सरजू का पक्का मकान नदी में समा गया। इसके साथ ही बंद पड़े सरकारी स्कूल भवन के सामने की लगभग 30 मीटर लंबी डामर सड़क भी नदी की भेंट चढ़ गई। लगातार हो रही कटान से गांव के उच्च प्राथमिक विद्यालय पर भी खतरा मंडराने लगा है। नदी का विकराल रूप देखकर ग्रामीणों में दहशत का माहौल है और लोग पिछले वर्ष हुई तबाही को याद कर भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
उच्च प्राथमिक विद्यालय पर मंडराया खतरा
शारदा नदी के लगातार बढ़ते दबाव के कारण गांव का उच्च प्राथमिक विद्यालय भी कटान की जद में आ गया है। वर्तमान में विद्यालय और नदी के बीच लगभग 70 फीट की दूरी ही शेष बची है। संभावित खतरे को देखते हुए प्रशासन ने एहतियात के तौर पर विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों को एक किलोमीटर दूर स्थित कतकहिया के सरकारी विद्यालय में स्थानांतरित कर दिया है ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
पिछले वर्ष भी हुई थी भारी तबाही
ग्रंट नंबर 12 गांव में पिछले वर्ष भी शारदा नदी के कटान ने व्यापक नुकसान पहुंचाया था। उस दौरान दर्जनों मकान, कृषि भूमि और एक विशाल मंदिर नदी में समा गए थे। वर्षा ऋतु की शुरुआत के साथ ही इस बार भी ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि हर वर्ष बरसात आते ही उनका जीवन असुरक्षा और अनिश्चितता से घिर जाता है।
डूब क्षेत्र में विकास कार्यों पर उठे सवाल
ग्रंट नंबर 12 गांव वर्षों से डूब क्षेत्र घोषित है। इसके बावजूद यहां ग्राम पंचायत का गठन किया गया, पंचायत चुनाव संपन्न हुए और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ भी ग्रामीणों को मिलता रहा। विद्यालय का संचालन भी लंबे समय तक जारी रहा। अब ग्रामीण प्रशासन से सवाल कर रहे हैं कि जब क्षेत्र के डूब और कटान प्रभावित होने की जानकारी पहले से थी तो स्थायी पुनर्वास की व्यवस्था समय रहते क्यों नहीं की गई। पिछले वर्ष बाढ़ और कटान के दौरान 122 मकान नदी में समा गए थे और लगभग 150 परिवार बेघर हो गए थे।
तटबंध पर गुजर रही विस्थापित परिवारों की जिंदगी
वर्तमान में लगभग 200 परिवार गांव से करीब दो किलोमीटर दूर तटबंध पर रहने को मजबूर हैं। तिरपाल, झोंपड़ियों और खुले आसमान के नीचे जीवन बिता रहे इन परिवारों की खेती, रोजगार और आजीविका के साधन भी प्रभावित हो चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि तीन वर्षों से वे इसी स्थिति में रह रहे हैं लेकिन अब तक स्थायी पुनर्वास की व्यवस्था नहीं हो सकी है। ग्रामीण रामबेटी ने बताया कि उनका परिवार पिछले तीन वर्षों से तटबंध पर रह रहा है और हर बरसात में दोबारा उजड़ने का डर बना रहता है। उनका कहना है कि अब लोगों का भरोसा धीरे धीरे खत्म होता जा रहा है।
प्रशासन लगातार कर रहा निगरानी
एसडीएम निघासन राजीव निगम ने बताया कि प्रशासन की टीम लगातार क्षेत्र की निगरानी कर रही है। उन्होंने कहा कि ग्रंट नंबर 12 डूब क्षेत्र घोषित गांव है और पिछले वर्ष जिन लोगों के मकानों का कटान हुआ था उन्हें नियमानुसार मुआवजा प्रदान किया गया था। प्रशासन की प्राथमिकता ग्रामीणों की सुरक्षा है और लोगों को लगातार सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का किया गया निरीक्षण
उधर बिजुआ क्षेत्र में गोला तहसीलदार अरुण कुमार ने भी शारदा नदी से प्रभावित इलाकों का दौरा किया। उन्होंने बझेड़ा, रेवतीपुरवा, रामनगर, आषाढ़ी और पूजागांव में पहुंचकर हालात का जायजा लिया तथा संबंधित लेखपालों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। प्रशासन का कहना है कि नदी के जलस्तर और कटान की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि आवश्यकता पड़ने पर तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू किए जा सकें।
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