वाराणसी के नेहिया गांव में झंडा विवाद ने लिया हिंसक रूप पथराव में एसीपी समेत कई पुलिसकर्मी घायल भारी फोर्स तैनात
वाराणसी: अंबेडकर जयंती के बाद झंडे और पोस्टरों को लेकर शुरू हुआ विवाद शुक्रवार को चोलापुर थाना क्षेत्र के नेहिया गांव में हिंसक टकराव में बदल गया। स्थिति उस समय गंभीर हो गई जब प्रदर्शन कर रहे लोगों ने बाबतपुर चौबेपुर मार्ग को जाम कर दिया और पुलिस टीम पर पथराव शुरू कर दिया। इस दौरान सारनाथ क्षेत्र के एसीपी विदुष सक्सेना गंभीर रूप से घायल हो गए और उनके सिर में चोट आई है। वहीं चोलापुर थाने के दो उपनिरीक्षक भी इस घटना में घायल हुए हैं। घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है और प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है।
भारी पुलिस बल की तैनाती से हालात काबू में
घटना के बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और अतिरिक्त बल मौके पर बुलाया गया। फिलहाल गांव में चार आईपीएस अधिकारियों दो एसीपी और तीन सौ से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए इलाके में लगातार निगरानी रखी जा रही है और फ्लैग मार्च भी किया जा रहा है ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे।
झंडा लगाने को लेकर शुरू हुआ पूरा विवाद
जानकारी के अनुसार पूरा मामला गांव के प्रवेश द्वार पर झंडा लगाने को लेकर शुरू हुआ। राम नवमी के अवसर पर यहां धार्मिक झंडा लगाया गया था। इसके बाद 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती के मौके पर दलित समाज के लोगों ने उस झंडे को हटाकर डॉ भीमराव अंबेडकर से संबंधित झंडा और पोस्टर लगा दिए। यह बदलाव शुरू में सामान्य प्रतीत हुआ लेकिन अगले ही दिन स्थिति ने गंभीर मोड़ ले लिया।
पोस्टर फाड़ने और अफवाह से भड़का माहौल
बताया जा रहा है कि 15 अप्रैल की रात अज्ञात लोगों ने अंबेडकर से जुड़े झंडों और पोस्टरों को फाड़ दिया। इसके बाद सुबह झंडा जलाए जाने की अफवाह तेजी से फैल गई जिससे माहौल और अधिक संवेदनशील हो गया। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में दलित समुदाय के लोग मौके पर पहुंचे और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। नारेबाजी के बीच स्थिति तेजी से बिगड़ने लगी।
दो पक्ष आमने सामने आए और सड़क जाम
घटना की सूचना पर चोलापुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची लेकिन तब तक मामला तूल पकड़ चुका था। दलित समाज के लोगों ने दोबारा अंबेडकर के झंडे लगा दिए। इसी दौरान दूसरे पक्ष के लोग भी वहां पहुंच गए और दोनों ओर से नारेबाजी शुरू हो गई। करीब डेढ़ घंटे तक बाबतपुर चौबेपुर मार्ग पूरी तरह जाम रहा जिससे यातायात प्रभावित हुआ। पुलिस ने हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को समझाया और किसी तरह झंडे हटवाकर मार्ग को बहाल कराया।
फिर भड़का विवाद और बढ़ा तनाव
गुरुवार शाम को पुलिस की मौजूदगी में दूसरे पक्ष के लोगों द्वारा उसी स्थान पर भगवा झंडा लगाए जाने की खबर सामने आई। यह जानकारी सोशल मीडिया पर फैलते ही मामला फिर से गरमा गया। आजाद समाज पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध शुरू कर दिया और शुक्रवार सुबह बड़ी संख्या में लोग गांव में एकत्र हो गए। प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि जब झंडा लगाने पर रोक लगाई गई थी तो यह झंडा किसके निर्देश पर लगाया गया।
पुलिस पर पथराव से हालात बेकाबू
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए चोलापुर चौबेपुर फूलपुर और बड़ागांव सहित कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस दोनों पक्षों को अलग करने का प्रयास कर रही थी तभी अचानक भीड़ उग्र हो गई और पथराव शुरू कर दिया गया। इस पथराव में एसीपी विदुष सक्सेना के सिर में गंभीर चोट आई जबकि दो अन्य पुलिसकर्मी भी घायल हो गए। इसके बाद पुलिस ने हल्का लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर बितर किया और स्थिति को नियंत्रित किया।
नारेबाजी से और बढ़ा तनाव
घटना के दौरान एक ओर से जय भीम और दूसरी ओर से जय श्री राम के नारे लगाए गए जिससे माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए स्थिति को संभाला और पूरे इलाके में अतिरिक्त बल तैनात कर दिया। अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।
पुलिस का आधिकारिक बयान
डीसीपी वरुणा जोन प्रमोद कुमार ने बताया कि पुलिस को चक्का जाम और प्रदर्शन की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंचकर हालात को नियंत्रित किया गया है। उन्होंने कहा कि अराजक तत्वों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। घायलों का इलाज कराया जा रहा है और स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है।
गांव में सन्नाटा प्रशासन अलर्ट
घटना के बाद नेहिया गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। किसी भी तरह की अफवाह को रोकने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है और पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।
संवेदनशील मुद्दों पर संवाद की जरूरत
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सामाजिक और धार्मिक प्रतीकों से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर स्थानीय स्तर पर संवाद और संतुलन बनाए रखना कितना आवश्यक है। छोटी सी असहमति यदि समय पर सुलझाई न जाए तो वह बड़े टकराव का रूप ले सकती है। ऐसे में प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी है कि शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए मिलकर प्रयास करें।
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