हरहुआ स्थित उंदी ताल का होगा सुंदरीकरण, सिटी फारेस्ट के रूप में विकसित होगा इको पार्क
वाराणसी के हरहुआ स्थित उंदी ताल में प्रस्तावित गौतमबुद्ध इको पार्क, जिसे सिटी फारेस्ट के रूप में विकसित किया जाना है, उसके लिए शासन ने 24.99 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। इनमें से 12.49 करोड़ रुपये वाराणसी विकास प्राधिकरण को जारी भी कर दिए गए हैं। टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही कार्य प्रारंभ कराया जाएगा।
डीपीआर का पुनर्मूल्यांकन, कनेक्टिविटी पर फोकस
विकास प्राधिकरण द्वारा भेजी गई प्रारंभिक डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट का पुनर्मूल्यांकन किया जा रहा है, ताकि योजना के क्रियान्वयन में कोई कमी न रह जाए। विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय पर्यटक स्थल सारनाथ से उंदी ताल की बेहतर कनेक्टिविटी पर जोर दिया जा रहा है। उद्देश्य यह है कि सारनाथ आने वाले पर्यटक उंदी ताल भी जाएं और उंदी ताल आने वाले पर्यटक सारनाथ तक पहुंच सकें।
78.5 एकड़ भूमि पर विकसित होगा प्रोजेक्ट
उंदी ताल और उसके आसपास की 78.5 एकड़ भूमि को जिला प्रशासन से हस्तांतरित कराकर विकास प्राधिकरण ने कब्जा मुक्त कराया था। पहले यहां अतिक्रमण था, जिसे हटाने में काफी प्रयास किए गए। प्राधिकरण ने अपने अवस्थाना निधि से 3.20 करोड़ रुपये खर्च कर ताल की लोहे की जाली से घेराबंदी भी कराई है और प्रारंभिक विकास कार्य कराए हैं।
पर्यटन विभाग से मिली स्वीकृति
पर्यटन की दृष्टि से परियोजना को विकसित करने के लिए दिल्ली की एजेंसी आधार शिला से डीपीआर तैयार कराकर शासन को भेजा गया था। पर्यटन विभाग ने 24.95 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की। बाद में कार्यान्वयन एजेंसी को लेकर समन्वय के बाद अब बजट का आंशिक आवंटन कर दिया गया है।
इको पार्क में मिलेंगी ये सुविधाएं
मुख्य प्रवेश द्वार पर गार्ड हाउस, शौचालय, दो और चार पहिया तथा बस पार्किंग, टिकट घर, रेंटल साइकिल क्षेत्र और गोल्फ कोर्ट क्षेत्र विकसित किया जाएगा। बोटिंग क्षेत्र के अंतर्गत बोटिंग लेक और क्लब हाउस का निर्माण होगा, जहां सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
ईको पार्क में साइकिल और पैदल ट्रैक, बच्चों के लिए प्ले एरिया तथा ओपन जिम की सुविधा दी जाएगी। बुद्धा थीम पार्क के अंतर्गत 4.37 एकड़ भूमि पर बौद्ध दर्शन आधारित लैंडस्केप, औषधीय पौधों से युक्त बोटेनिकल गार्डन, ध्यान स्थल और तालाब विकसित किए जाएंगे।
वेलनेस सेंटर और कैंपिंग जोन का भी विकास प्रस्तावित है। ईको जोन में जलाशयों और वेटलैंड का संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन, प्राकृतिक अपशिष्ट जल शुद्धिकरण प्रणाली, ठोस अपशिष्ट प्रसंस्करण प्रणाली, सौर ऊर्जा आधारित विद्युत उत्पादन, बर्ड सेंचुरी, वॉच टावर, जेट्टी और वनीकरण कार्य शामिल हैं। पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए बांस के पुल और प्राकृतिक मार्ग बनाए जाएंगे।
रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे
इस परियोजना के विकसित होने से क्षेत्र पर्यटन हब के रूप में उभरेगा और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। वाराणसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने बताया कि बजट का प्रथम चरण जारी हो चुका है और टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
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