मेरठ में एंटी करप्शन की बड़ी कार्रवाई थाने के अंदर दरोगा रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार
मेरठ: भ्रष्टाचार के खिलाफ एक अहम कार्रवाई सामने आई है जहां एंटी करप्शन टीम ने शनिवार को एक दरोगा को थाने के भीतर ही रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। इस घटना ने एक ओर जहां पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं वहीं दूसरी ओर यह भी स्पष्ट किया है कि शिकायत मिलने पर कार्रवाई किस स्तर तक की जा सकती है। आरोपी दरोगा पर आरोप है कि वह एक एनडीपीएस मामले में आरोपी महिला को राहत देने के नाम पर पैसे की मांग कर रहा था।
पल्लवपुरम थाना क्षेत्र से जुड़ा मामला
पूरा मामला पल्लवपुरम थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है जहां मेडिकल थाना क्षेत्र के निवासी मनीष कुमार और उनकी पत्नी सीमा के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में मनीष कुमार को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है जबकि उनकी पत्नी फरार बताई जा रही है। आरोप है कि इसी मामले में राहत देने के नाम पर दरोगा छत्रपाल सिंह मनीष पर लगातार दबाव बना रहा था और उससे दस हजार रुपये की मांग कर रहा था।
शिकायत के बाद रची गई योजना
मनीष कुमार ने एंटी करप्शन टीम को दी गई शिकायत में बताया कि उनके खिलाफ दर्ज मुकदमा संदिग्ध परिस्थितियों में बनाया गया था। उनका कहना है कि मामले में उनके पास से कोई प्रतिबंधित पदार्थ बरामद नहीं हुआ था इसके बावजूद उन्हें भी आरोपी बनाया गया। लगातार दबाव और कथित रूप से कुर्की की कार्रवाई के बाद परेशान होकर उन्होंने 23 अप्रैल को एंटी करप्शन टीम से संपर्क किया और पूरे मामले की जानकारी दी। इसके बाद टीम ने सुनियोजित तरीके से कार्रवाई की योजना बनाई।
रंगेहाथ हुई गिरफ्तारी
योजना के तहत शनिवार को दरोगा ने मनीष को फोन कर थाने बुलाया और पैसे साथ लाने को कहा। मनीष निर्धारित समय पर रकम लेकर थाने पहुंचा और तीसरी मंजिल पर स्थित कमरे में दरोगा को पैसे दिए। जैसे ही पैसे सौंपे गए एंटी करप्शन टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दरोगा को रंगेहाथ पकड़ लिया। इस पूरी प्रक्रिया को विधिवत तरीके से दर्ज भी किया गया ताकि आगे की कानूनी कार्रवाई मजबूत आधार पर की जा सके।
विधिक कार्रवाई और जांच शुरू
गिरफ्तारी के बाद आरोपी दरोगा को कंकरखेड़ा थाने ले जाया गया जहां आगे की कार्रवाई की गई। इसके बाद उसका मेडिकल परीक्षण कराया गया। एंटी करप्शन इंस्पेक्टर योगेन्द्र कुमार की ओर से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया है। आरोपी को न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
एसपी सिटी का सख्त रुख
मेरठ के एसपी सिटी विनायक भोसले ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी दरोगा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उन्होंने बताया कि पूरे प्रकरण की विभागीय जांच शुरू कर दी गई है और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदारी सीओ स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश
यह घटना एक बार फिर यह दर्शाती है कि यदि आम नागरिक साहस के साथ शिकायत करें तो भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई संभव है। साथ ही यह पुलिस विभाग के लिए भी एक स्पष्ट संदेश है कि अनुशासन और पारदर्शिता से समझौता करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई तय है।
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