वाराणसी रामनगर में भ्रष्टाचार पर प्रशासन का कड़ा प्रहार मानक ताक पर रखने वाले ठेकेदारों पर मुकदमा दर्ज
वाराणसी/रामनगर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के संसदीय क्षेत्र में विकास कार्यों की आड़ में सरकारी धन के बंदरबांट का एक बड़ा मामला प्रकाश में आया है। मुख्यमंत्री नगरीय अल्प विकसित एवं मलिन बस्ती विकास योजना जो समाज के वंचित तबकों को बेहतर बुनियादी ढांचा प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी उसमें ठेकेदारों की मनमानी और लापरवाही ने शासन की मंशा पर सवालिया निशान लगा दिया है। रामनगर थाना क्षेत्र के रामपुर इलाके में हो रहे इंटरलॉकिंग सड़क निर्माण में घटिया सामग्री के प्रयोग और कार्य में भारी अनियमितता मिलने के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। डूडा की शिकायत पर पुलिस ने दो ठेकेदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर मामले की गहराई से जांच शुरू कर दी है।
समय सीमा का उल्लंघन और गुणवत्ता से खिलवाड़
रामपुर क्षेत्र के अंतर्गत पारस नाथ गुप्ता के आवास से लेकर कमल कुमार वर्मा के आवास तक सड़क निर्माण और इंटरलॉकिंग का महत्वपूर्ण कार्य ई निविदा के माध्यम से कानपुर की फर्म मेसर्स अवी इन्फ्राटेक को आवंटित किया गया था। अनुबंध के मुताबिक इस परियोजना को हर हाल में 17 फरवरी 2026 तक पूर्ण किया जाना अनिवार्य था। हालांकि निर्धारित तिथि बीत जाने के बावजूद न केवल कार्य अधूरा रहा बल्कि जो निर्माण किया गया उसकी गुणवत्ता भी अत्यंत दयनीय पाई गई।
स्थानीय निवासियों की शिकायतों और विभागीय निरीक्षण के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि ठेकेदारों ने मानकों को ताक पर रखकर दोयम दर्जे की सामग्री का उपयोग किया जिससे सड़क बनने के साथ ही टूटने लगी थी। क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में जल्दबाजी और लापरवाही के चलते सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है।
सरकारी कार्रवाई की जद में फर्म के प्रोपराइटर
मामले की गंभीरता को देखते हुए डूडा के निर्माण खंड 3 के अधिकारी अमर चंद गुप्ता ने रामनगर थाने में लिखित तहरीर देकर फर्म के प्रोपराइटर विनेश कुमार कुशवाहा और अंकुर कुशवाहा को नामजद किया। तहरीर में स्पष्ट आरोप लगाया गया है कि उक्त ठेकेदारों ने न केवल सरकारी धन का दुरुपयोग किया बल्कि निर्माण में गंभीर लापरवाही बरतकर जनता की सुरक्षा और सुविधाओं के साथ छल किया है।
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों के विरुद्ध संबंधित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है। मामले की विवेचना की जिम्मेदारी उपनिरीक्षक जय प्रकाश सिंह को सौंपी गई है जो अब निर्माण स्थल से नमूने और संबंधित दस्तावेजों की जांच करेंगे।
उच्चाधिकारियों की पैनी नजर
विकास कार्यों में इस तरह की अनियमितताओं को लेकर जिला प्रशासन बेहद सख्त नजर आ रहा है। इस पूरी कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट जिलाधिकारी और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल को प्रेषित कर दी गई है। प्रशासनिक स्तर पर यह स्पष्ट संकेत दिए गए हैं कि भ्रष्टाचार और गुणवत्ता से समझौता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित फर्म को ब्लैकलिस्ट करने के साथ साथ सरकारी धन की रिकवरी की कार्रवाई भी शुरू की जा सकती है। रामनगर का यह मामला अन्य ठेकेदारों के लिए भी चेतावनी माना जा रहा है जो सरकारी योजनाओं में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी करते हैं।
प्रशासन ने दिया सख्त संदेश
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास पहुंचाना है। यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार पाया जाता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने साफ कहा है कि समय सीमा और गुणवत्ता दोनों के साथ समझौता करने वालों को कानून के दायरे में लाया जाएगा।
रामनगर में सामने आया यह मामला अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी होगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में सरकारी योजनाओं में इस प्रकार की अनियमितताओं पर रोक लग सके।
LATEST NEWS