वाराणसी: रामनगर में करोड़ों की लागत से बनी सड़कों की दोबारा खुदाई टूटे पाइप से गंदा पानी वार्ड 65 में जनता बेहाल जिम्मेदारी तय करने की उठी मांग
वाराणसी: रामनगर क्षेत्र में इन दिनों चल रहे विकास कार्यों ने स्थानीय व्यवस्था और प्रशासनिक समन्वय पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में जिन सड़कों और गलियों का निर्माण कार्य पूरा किया गया था वे अब दोबारा खुदाई का शिकार हो रही हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पहले नई सड़कें बनाई गईं फिर उन्हें उखाड़कर दोबारा तैयार किया गया और अब तीसरी तथा चौथी बार उन्हीं सड़कों को खोदकर अंडरग्राउंड बिजली केबल डाले जा रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर दूरदर्शिता और विभागीय समन्वय की कमी साफ नजर आ रही है जिससे जनता में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
क्षेत्र में हाल ही में इन सड़कों का उद्घाटन और लोकार्पण भी जनप्रतिनिधियों द्वारा किया गया था लेकिन कुछ ही दिनों बाद दोबारा खुदाई शुरू होने से लोगों का आक्रोश बढ़ गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पहले से ही केबल डालने की योजना थी तो सड़क निर्माण से पहले ही यह कार्य पूरा क्यों नहीं किया गया। बार बार सड़कों को खोदने से न केवल सरकारी धन की बर्बादी हो रही है बल्कि आम लोगों को भी रोजमर्रा की जिंदगी में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
भीषण गर्मी के इस दौर में स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है। सड़कों पर फैली धूल और जगह जगह बने गड्ढों के कारण बुजुर्गों और बच्चों के लिए चलना मुश्किल हो गया है। कई स्थानों पर लोग फिसलकर गिर रहे हैं और चोटिल हो रहे हैं। वहीं वार्ड नंबर 65 पुराने रामनगर में पिछले लगभग पंद्रह दिनों से पेयजल संकट ने हालात को और खराब कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अंडरग्राउंड केबल डालने के दौरान जलापूर्ति की पाइपलाइन को कई जगहों पर नुकसान पहुंचा है जिससे पानी की सप्लाई बाधित हो गई है।
पानी संकट और बढ़ी परेशानी
निवासियों के अनुसार कई स्थानों पर पाइपलाइन को अस्थायी रूप से रबर बांधकर छोड़ दिया गया है जिससे लगातार पानी का रिसाव हो रहा है और गंदा पानी सप्लाई में मिल रहा है। इसके कारण लोगों को न तो पर्याप्त मात्रा में पानी मिल पा रहा है और न ही स्वच्छ पानी उपलब्ध हो रहा है। इस गर्मी में स्वच्छ पेयजल के लिए जूझ रही जनता की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है और लोगों में नाराजगी लगातार बढ़ रही है।
जवाबदेही पर उठे सवाल
स्थानीय नागरिकों ने इस पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद यदि सड़कों को बार बार तोड़ा जा रहा है तो यह योजना और क्रियान्वयन दोनों स्तर पर गंभीर खामी को दर्शाता है। लोगों का यह भी आरोप है कि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी के कारण एक विभाग द्वारा किया गया कार्य दूसरे विभाग द्वारा कुछ ही दिनों में नष्ट कर दिया जाता है जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी हो रही है।
प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग
क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों तथा संबंधित एजेंसियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की है कि भविष्य में सभी विकास कार्यों को एक समन्वित योजना के तहत किया जाए ताकि जनता को इस प्रकार की समस्याओं से राहत मिल सके और सरकारी संसाधनों का सही उपयोग हो सके।
जनप्रतिनिधि का पक्ष
इस मुद्दे पर जब स्थानीय पार्षद रामकुमार यादव से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि क्षेत्र में विकास कार्य तेजी से किए जा रहे हैं और अंडरग्राउंड केबल डालना आवश्यक था। उन्होंने यह स्वीकार किया कि कार्यों के समन्वय में कुछ कमी रह गई जिसके कारण सड़कों को दोबारा खोदना पड़ा। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि जलापूर्ति की समस्या को जल्द ठीक कराया जाएगा और संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि पाइपलाइन की मरम्मत तत्काल कराई जाए ताकि लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जा सके।
स्थिति पर नजर
फिलहाल रामनगर की जनता विकास कार्यों की कीमत रोजमर्रा की परेशानियों के रूप में चुका रही है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस स्थिति को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या भविष्य में ऐसी अव्यवस्थाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं।
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