चंदौली फायरिंग कांड का बड़ा खुलासा, क्रिकेट विवाद से शुरू हुआ मामला पहुंचा फायरिंग तक, अलीनगर पुलिस ने तीन आरोपियों को दबोचा
दोस्ती, आपसी रंजिश, फिरौती और गुस्से ने लिया हिंसक रूप, पुलिस ने हथियार, कारतूस और वारदात में प्रयुक्त बुलेट मोटरसाइकिल की बरामदगी के साथ खोली पूरी कहानी
चंदौली: चंदौली जिले में सामने आए चर्चित फायरिंग प्रकरण का पुलिस ने बड़ा खुलासा करते हुए तीन वांछित आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। शुरुआती तौर पर एक साधारण आपराधिक घटना नजर आने वाले इस मामले की परतें खुलीं तो कहानी क्रिकेट खेलने के दौरान शुरू हुए विवाद, आपसी रंजिश, कथित दोस्ती और बढ़ते तनाव से जुड़ी हुई सामने आई। धीरे धीरे बढ़ा विवाद आखिरकार फायरिंग जैसी गंभीर वारदात तक पहुंच गया। पुलिस कार्रवाई के बाद अब पूरे घटनाक्रम की कई अहम कड़ियां सामने आई हैं, जिसने इस मामले को और चर्चा में ला दिया है।
कार्यालय पुलिस अधीक्षक चंदौली की ओर से जारी जानकारी के अनुसार यह मामला 17 मई 2026 का है। पीड़ित रितेश कुमार पासवान ने थाना अलीनगर में दर्ज कराई गई तहरीर में आरोप लगाया था कि दो मोटरसाइकिलों पर सवार कुछ युवक पहले उससे पचास हजार रुपये की फिरौती मांग रहे थे। आरोप है कि पैसे नहीं देने पर उसे जान से मारने की धमकी दी गई। इसके बाद कथित तौर पर आरोपी उसके घर पहुंचे और जानलेवा नीयत से घर की छत की ओर गोली चला दी।
घटना के बाद सक्रिय हुई पुलिस, विशेष टीम को सौंपी गई जिम्मेदारी
घटना की गंभीरता को देखते हुए थाना अलीनगर में मुकदमा अपराध संख्या 302 वर्ष 2026 के तहत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया। वरिष्ठ अधिकारियों ने अलीनगर पुलिस को तत्काल आरोपियों की तलाश और गिरफ्तारी की जिम्मेदारी सौंपी।
इसी दौरान पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि फायरिंग की घटना में शामिल आरोपी कहीं बाहर भागने की तैयारी में हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम सक्रिय हुई और 23 मई 2026 की रात लगभग डेढ़ बजे चंदरखा अंडरपास और ददवापर नहर पुलिया के पास घेराबंदी कर कार्रवाई शुरू की गई। पुलिस टीम ने मौके से तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
तीनों आरोपियों की हुई पहचान, बरामद हुआ हथियार और अन्य सामान
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान नाथुपुर निवासी अंकित यादव पुत्र रामचंदर यादव उम्र लगभग बीस वर्ष, रस्तापुर भीटी थाना रामनगर वाराणसी निवासी मृत्युंजय मौर्या उर्फ गुल्लू पुत्र मस्तराम मौर्या उम्र लगभग बीस वर्ष तथा नाथुपुर निवासी रवि किशन यादव पुत्र प्यारे यादव उम्र लगभग बीस वर्ष के रूप में हुई है।
पुलिस के अनुसार रवि किशन यादव के कब्जे से एक अवैध तीन सौ पंद्रह बोर तमंचा, एक जिंदा कारतूस, एक खोखा कारतूस और घटना में प्रयुक्त रॉयल एनफील्ड बुलेट मोटरसाइकिल बरामद की गई। इसके अलावा तीन एंड्रॉयड मोबाइल फोन और एक हजार पचास रुपये नकद भी बरामद हुए हैं।
पूछताछ में सामने आई विवाद की पूरी कहानी
पूछताछ के दौरान सामने आए तथ्यों ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया। आरोपियों ने पुलिस को बताया कि रवि किशन यादव की मित्रता उनके गांव की एक युवती से थी। बाद में उसी युवती की मित्रता खजूर गांव निवासी रितेश पासवान से हो गई। इसी बात को लेकर रवि किशन और रितेश के बीच विवाद शुरू हो गया। समय बीतने के साथ यह तनाव लगातार बढ़ता गया और दोनों पक्षों के बीच कई बार कहासुनी होने लगी।
घटना वाले दिन यानी 17 मई को अंकित यादव, रवि किशन यादव, विक्की यादव उर्फ देवा, राकेश पटेल उर्फ काजू और मृत्युंजय मौर्या गांव के पास स्थित दुर्गा पोखरे पर मौजूद थे। इसी दौरान रवि किशन और रितेश के बीच फोन पर फिर विवाद हुआ। आरोपियों के अनुसार अंकित यादव ने रितेश से बात करने की कोशिश की लेकिन फोन पर गाली गलौज शुरू हो गई और कथित रूप से धमकी भी दी गई।
गुस्से में पहुंचे घर और कर दी फायरिंग
पुलिस पूछताछ के अनुसार विवाद बढ़ने के बाद सभी युवक दो बुलेट मोटरसाइकिलों से खजूर गांव स्थित रितेश पासवान के घर पहुंचे। वहां पहुंचकर उन्होंने रितेश को बाहर बुलाया। आरोपियों के अनुसार रितेश घर की छत पर आया और वहां से भी दोनों पक्षों के बीच बहस और गाली गलौज शुरू हो गई।
इसी दौरान साथ मौजूद कुछ लोगों ने कथित रूप से अंकित यादव को उकसाया कि उसके पास हथियार है और गोली चला दे। पुलिस के अनुसार पूछताछ में अंकित यादव ने स्वीकार किया कि गुस्से और उकसावे में आकर उसने फायरिंग कर दी। हालांकि संयोग से गोली किसी को नहीं लगी और रितेश बाल बाल बच गया। घटना के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए।
बिहार में छिपे थे आरोपी, लौटते समय पुलिस ने दबोचा
गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी घटना के बाद जिले से बाहर चले गए थे। पूछताछ में उन्होंने बताया कि अंकित यादव, रवि किशन यादव और मृत्युंजय मौर्या बिहार के बक्सर जिले के राजपुर थाना क्षेत्र स्थित कोचाड़ी सरेंजा गांव में एक परिचित आशुतोष कुमार सिंह के घर जाकर छिपे हुए थे। पुलिस के अनुसार वापस लौटते समय उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस ने गिरफ्तारी और बरामदगी के आधार पर मुकदमे में बीएनएस की धारा 61 और आर्म्स एक्ट की धारा 3 और 25 की बढ़ोतरी की है। मामले में अन्य नामजद आरोपियों की तलाश अभी जारी है।
पुलिस टीम की भूमिका रही अहम
इस कार्रवाई को सफल बनाने में प्रभारी निरीक्षक घनश्याम, चौकी प्रभारी जफरपुर उपनिरीक्षक सतीश चंद्र सिंह, उपनिरीक्षक गिरीश चंद्र राय, हेड कांस्टेबल प्रदुम्मन द्विवेदी, हेड कांस्टेबल रामराज और हेड कांस्टेबल इंद्रजीत यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जिले में अपराध और अपराधियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और कानून व्यवस्था को प्रभावित करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। घटना के सामने आने के बाद इलाके में इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि किस प्रकार छोटे विवाद और व्यक्तिगत तनाव धीरे धीरे गंभीर आपराधिक घटनाओं का रूप ले रहे हैं।
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