वाराणसी:धर्म और आध्यात्म की नगरी काशी में रविवार का दिन सेवा और समर्पण की एक अनूठी मिसाल का गवाह बना। उत्तर प्रदेश के पूर्व वित्त मंत्री और जन-जन के प्रिय रहे श्रद्धेय हरिश्चन्द्र श्रीवास्तव “हरीश जी” की 11वीं पुण्यतिथि पर भावनाओं का ज्वार और सेवा का उत्साह एक साथ देखने को मिला। उनके सुपुत्र और कैंट विधायक सौरभ श्रीवास्तव ने अपने पिता की स्मृतियों को जीवंत रखने के लिए आडंबर से दूर, सामनेघाट स्थित ‘अपना घर आश्रम’ को चुना, जहाँ समाज के उन उपेक्षित, असहाय और वृद्धजनों का वास है, जिन्हें अपनों ने ठुकरा दिया है। विधायक सौरभ श्रीवास्तव ने यहाँ विशाल भोज का आयोजन कर न केवल “नर सेवा ही नारायण सेवा” के मंत्र को चरितार्थ किया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि पितृऋण से उऋण होने का सबसे सशक्त माध्यम दीन-दुखियों की सेवा ही है।
कार्यक्रम का शुभारंभ एक अत्यंत भावुक वातावरण में हुआ, जहाँ उपस्थित जनसमूह, परिवार के सदस्यों और बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ताओं ने स्वर्गीय हरीश जी के चित्र पर पुष्पार्चन कर उन्हें अपनी अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित की। फिजाओं में गूंजते भजनों और संस्मरणों के बीच, विधायक सौरभ श्रीवास्तव ने जब भोजन वितरण का कार्य संभाला, तो दृश्य देखने लायक था। उन्होंने आश्रम में रह रहे अशक्त, बीमार और वृद्धजनों को अपने हाथों से भोजन परोसा। यह केवल अन्न का दान नहीं था, बल्कि एक पुत्र द्वारा अपने पिता के संस्कारों का तर्पण था। इस अवसर पर अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए विधायक सौरभ ने कहा,”पूज्य पिताश्री का जीवन दर्शन अत्यंत सरल था। उन्हें जिस कार्य में सर्वाधिक आत्मिक सुख की अनुभूति होती थी, वह था समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को मुख्यधारा से जोड़ना। वे आजीवन इसी ध्येय के साथ जिए कि वंचितों के लिए अन्न और वस्त्र का प्रबंध करना ही ईश्वर की सच्ची पूजा है।”
विधायक सौरभ ने अपने पिता के संस्मरणों को साझा करते हुए बताया कि हरीश जी के स्वभाव में गरीबों के साथ बैठकर भोजन करना और उनकी क्षुधा शांत करना शामिल था। आज उसी परंपरा का निर्वहन करते हुए, आश्रम के प्रभुजी (आश्रम में रहने वाले वृद्धजन) की सेवा कर उन्हें असीम शांति का अनुभव हुआ। उन्होंने संकल्प दोहराया कि पिताश्री की प्रेरणा और आशीर्वाद से यह सेवा कार्य केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनकी स्मृति में वर्षभर निरंतर चलता रहेगा। आश्रम का वातावरण उस समय और भी दिव्य हो गया जब राजनेताओं और कार्यकर्ताओं ने राजनीति से ऊपर उठकर मानवीय संवेदनाओं के धरातल पर सेवा कार्य किया। अपना घर आश्रम के संस्थापक डॉ. के. निरंजन और डॉ. कात्यायनी की टीम द्वारा की गई सुव्यवस्थित व्यवस्था ने इस आयोजन को और भी गरिमामय बना दिया।इस पुनीत अवसर पर विधायक सौरभ श्रीवास्तव के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वालों में शहर के कई गणमान्य नागरिक और भाजपा के वरिष्ठ नेता शामिल रहे।
श्रद्धांजलि सभा और भोज कार्यक्रम में प्रमुख रूप से भाजपा नेता अशोक पटेल, अभिषेक मिश्रा, अमित राय, संतोष द्विवेदी, सौरभ सिंह मुन्ना, भरत जायसवाल, अभिषेक वर्मा गोपाल और सृजन श्रीवास्तव ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इसके अतिरिक्त डॉ. संजय पाठक, राजेश विश्वकर्मा, तथा पार्षदगण सर्वश्री रामगोपाल वर्मा, राजेश यादव चल्लू, विजय द्विवेदी, अमित कुमार सिंह चिंटू, राजीव कुमार सिंह पटेल के साथ-साथ छोटेलाल पटेल, राहुल जायसवाल, राजन चौधरी, लोकनाथ खरवार, कुलदीप वर्मा, जय सिंह चौहान, उदय बिहारी श्रीवास्तव, ऋषभ सिन्हा, शिवांग सिन्हा, प्रजानाथ बिन्द, अनुराग श्रीवास्तव, सुशील मौर्य, अमित पांडेय बबलू, शामू यादव, सूरज पाण्डेय और विशाल जैसे सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने उपस्थित होकर दिवंगत आत्मा को नमन किया।

