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गाजा शांति पहल: ट्रंप ने भारत को ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का दिया न्योता

Sandeep Srivastava Sub Editor News Report Newspaper
Last updated: 19/01/2026 00:07
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Sandeep Srivastava
Sandeep Srivastava Sub Editor News Report Newspaper
BySandeep Srivastava
Sandeep Srivastava serves as a Sub Editor at News Report, a registered Hindi newspaper dedicated to ethical, accurate, and reader-focused journalism. He is responsible for copy...
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6 Min Read
ट्रंप द्वारा भारत को गाजा ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का निमंत्रण, वैश्विक कूटनीति
गाजा में स्थिरता और पुनर्निर्माण के लिए प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में भारत को शामिल होने का अमेरिकी निमंत्रण।
वॉशिंगटन/नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच, अमेरिका ने शांति बहाली की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को गाजा में स्थिरता लाने और पुनर्निर्माण के उद्देश्य से गठित किए जा रहे उच्च स्तरीय ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) का हिस्सा बनने के लिए औपचारिक निमंत्रण दिया है। यह न्योता न केवल भारत की बदलती वैश्विक छवि का प्रमाण है, बल्कि यह पश्चिम एशिया की जटिल राजनीति में भारत की स्वीकार्यता को भी रेखांकित करता है।

ट्रंप की 20-सूत्रीय शांति योजना और भारत की भूमिका
व्हाइट हाउस द्वारा की गई यह पहल राष्ट्रपति ट्रंप की महत्वाकांक्षी ‘20-सूत्रीय शांति योजना’ का एक अहम हिस्सा है, जिसका उद्देश्य गाजा में चल रहे रक्तपात को रोकना और क्षेत्र को विकास की पटरी पर वापस लाना है। अमेरिका अब इस योजना के दूसरे चरण को लागू करने की तैयारी कर रहा है, जिसके केंद्र में यह नया बोर्ड है।

कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि भारत को यह निमंत्रण अनायास नहीं दिया गया है। इसके पीछे भारत की संतुलित विदेश नीति, सभी पक्षों (इजरायल और अरब जगत) के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध और मानवीय सहायता में उसका पुराना इतिहास है। यदि भारत इस प्रस्ताव को स्वीकार करता है, तो यह ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज के रूप में उसकी स्थिति को और मजबूत करेगा। बोर्ड में शामिल देश गाजा की जमीनी हकीकत पर नजर रखने, मानवीय सहायता सुचारू करने और युद्धग्रस्त क्षेत्र के पुनर्निर्माण की रूपरेखा तैयार करेंगे। हालांकि, अभी तक भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

‘बोर्ड ऑफ पीस’: पावर और पॉलिसी का केंद्र
व्हाइट हाउस ने शुक्रवार को इस बहुचर्चित बोर्ड के सदस्यों की सूची जारी की, जिससे यह साफ हो गया है कि अमेरिका इस पहल को लेकर कितना गंभीर है। इस बोर्ड की कमान (चेयरमैन) स्वयं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप संभालेंगे। यह बोर्ड गाजा में दीर्घकालिक स्थिरता, निवेश और प्रशासन को संभालने का काम करेगा।

बोर्ड में शामिल दिग्गजों की सूची इसे एक ‘पावरहाउस’ बनाती है:
✅अजय बंगा: वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष (जो आर्थिक पुनर्निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगे)।
✅टोनी ब्लेयर: ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री और मध्य पूर्व के अनुभवी मध्यस्थ।
✅मार्को रुबियो: अमेरिकी विदेश मंत्री।
✅जेरेड कुशनर: ट्रंप के दामाद और अब्राहम एकॉर्ड्स के प्रमुख सूत्रधार।
✅स्टीव विटकॉफ: ट्रंप के विशेष दूत।
✅मार्क रोवन: अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट के सीईओ।

इसके अतिरिक्त, क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान और कतर के वरिष्ठ राजनयिक अली अल थवाड़ी को भी गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड में जगह दी गई है। बोर्ड का मुख्य एजेंडा गाजा में शासन व्यवस्था को फिर से खड़ा करना, विदेशी निवेश को आकर्षित करना और पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों को सामान्य बनाना होगा।

क्या सदस्यता के लिए चुकानी होगी भारी कीमत?
इस शांति पहल के बीच एक विवाद ने भी जन्म लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स में एक मसौदा पत्र के हवाले से दावा किया गया कि ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने वाले देशों को एक अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 8300 करोड़ रुपये) का योगदान देना पड़ सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि सदस्यों का कार्यकाल तीन साल का होगा और इसकी सदस्यता का नवीनीकरण अध्यक्ष (ट्रंप) की इच्छा पर निर्भर करेगा।
हालांकि, व्हाइट हाउस ने इन खबरों का तत्काल खंडन करते हुए इन्हें ‘भ्रामक’ करार दिया है। अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट किया कि बोर्ड में शामिल होने के लिए कोई ‘न्यूनतम फीस’ तय नहीं की गई है। व्हाइट हाउस ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि यह बोर्ड उन साझेदार देशों का समूह है जो शांति और सुरक्षा के प्रति गहरी प्रतिबद्धता रखते हैं, न कि यह कोई वित्तीय सौदा है।

जमीन पर कैसे होगा काम?
बोर्ड ऑफ पीस केवल वाशिंगटन के बंद कमरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर गाजा की जमीन पर दिखेगा। इसके लिए एक त्रि-स्तरीय प्रशासनिक ढांचा तैयार किया गया है:

✅राजनयिक नेतृत्व: संयुक्त राष्ट्र के पूर्व दूत निकोलाय म्लादेनोव को गाजा का ‘हाई रिप्रेजेंटेटिव’ नियुक्त किया गया है। वे बोर्ड और गाजा के स्थानीय प्रशासन के बीच सेतु का काम करेंगे।

✅स्थानीय प्रशासन (NCAG): ट्रंप की योजना के तहत ‘नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा’ (NCAG) का गठन किया गया है, जिसकी अगुवाई अली शाअथ करेंगे। उनका काम गाजा में बिजली-पानी जैसी बुनियादी सेवाओं को बहाल करना और नागरिक संस्थानों को फिर से खड़ा करना होगा।

✅सुरक्षा कवच (ISF): किसी भी पुनर्निर्माण के लिए सुरक्षा सबसे जरूरी है। इसके लिए ‘इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स’ (ISF) का गठन किया गया है। इसके कमांडर मेजर जनरल जैस्पर जेफर्स होंगे, जो यह सुनिश्चित करेंगे कि मानवीय सहायता सही हाथों में पहुंचे और क्षेत्र में हथियारों का प्रवाह पूरी तरह रोका जा सके।
अब पूरी दुनिया की नजरें नई दिल्ली पर टिकी हैं कि क्या भारत इस चुनौतीपूर्ण लेकिन ऐतिहासिक जिम्मेदारी को स्वीकार करता है।

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TAGGED:Board of PeaceMiddle EastTrumpWorld Bankकूटनीतिगाजाभारत विदेश नीति
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