मीरजापुर पुलिस का बड़ा खुलासा: 11,605 मोबाइल के साथ अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह के 8 सदस्य गिरफ्तार
मीरजापुर, लालगंज | 18 मार्च 2026
मीरजापुर पुलिस ने अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय एक बड़े साइबर ठग गिरोह का पर्दाफाश करते हुए उसके आठ सदस्यों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह पुराने मोबाइल फोन खरीदकर उनका डेटा निकालता था और उसे बिहार व झारखंड के साइबर अपराधियों को बेचता था। पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से भारी मात्रा में मोबाइल, नकदी और वाहन बरामद किए हैं।
तेंदुई टोल प्लाजा के पास दबिश, डीसीएम से मिला बड़ा जखीरा
पुलिस अधीक्षक अपर्णा रजत कौशिक ने बताया कि सीओ लालगंज अमर बहादुर के नेतृत्व में लालगंज थाना, एसओजी और सर्विलांस टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए सोमवार रात वाराणसी-रीवा नेशनल हाईवे 135 पर तेंदुई टोल प्लाजा के पास एक डीसीएम वाहन को रोका। तलाशी लेने पर उसमें 11,605 पुराने मोबाइल फोन बरामद हुए, जो दस बोरियों में भरे हुए थे।
इसके अलावा मौके से आठ मोटरसाइकिल और 48,800 रुपये नकद भी बरामद किए गए। सभी आरोपितों को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया।
गिरफ्तार आरोपितों का विवरण
पकड़े गए आरोपित मुख्य रूप से बिहार के कटिहार और पूर्णिया जनपद के रहने वाले हैं। इनमें मो. अनारूल, मो. दिल फराज, सीताबुल, मो. अहमद, मो. हसन, हसीबुर रहमान, साबिर आलम और मो. सफीक शामिल हैं। सभी को गिरफ्तार कर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
कैसे करते थे साइबर ठगी का खेल
पूछताछ में आरोपितों ने खुलासा किया कि उनका संगठित गिरोह देश के विभिन्न राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, ओडिशा और मुंबई में घूम-घूमकर पुराने मोबाइल फोन खरीदता था। ये मोबाइल बेहद सस्ते दामों पर या प्लास्टिक के घरेलू सामान जैसे बाल्टी, टब आदि देकर खरीदे जाते थे।
इसके बाद इन मोबाइलों को बिहार ले जाया जाता था, जहां विशेष तकनीक के जरिए उनके मदरबोर्ड से डेटा रिकवर किया जाता था। इस डेटा में मोबाइल नंबर, बैंक खाते की जानकारी, आधार और पैन नंबर जैसे संवेदनशील विवरण शामिल होते थे। यही डेटा साइबर ठगों को बेचा जाता था, जिसके आधार पर लोगों को कॉल कर ठगी की जाती थी।
हैदराबाद में बना रखा था बेस
पुलिस के अनुसार, गिरोह ने हैदराबाद में एक किराए का मकान लिया हुआ था, जहां से पूरे ऑपरेशन को संचालित किया जाता था। वहां से सदस्य अलग-अलग राज्यों में जाकर मोबाइल खरीदने का काम करते थे और बाद में इन्हें एकत्र कर बिहार भेज दिया जाता था।
गिरोह के आर्थिक नेटवर्क का भी खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया कि गिरोह से जुड़े एक व्यक्ति के खाते में दो वर्षों के भीतर लगभग 45 लाख रुपये का लेनदेन हुआ है, जिससे इस अवैध कारोबार के बड़े स्तर का अंदाजा लगाया जा सकता है।
कानूनी कार्रवाई और पुलिस की चेतावनी
पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ धोखाधड़ी, साइबर अपराध सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस गिरोह के अन्य सदस्यों और नेटवर्क की भी जांच की जा रही है।
पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे अपने पुराने मोबाइल फोन बेचते समय सावधानी बरतें और बिना डेटा पूरी तरह डिलीट किए फोन किसी को न दें। साथ ही, किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
इस कार्रवाई को मीरजापुर पुलिस की बड़ी सफलता माना जा रहा है, जिससे साइबर अपराध के एक बड़े नेटवर्क पर करारा प्रहार हुआ है।
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