मुजफ्फरनगर: निर्मोही अखाड़ा आश्रम से 28.50 लाख की ठगी का खुलासा, सेवादार समेत 7 आरोपी गिरफ्तार
मुजफ्फरनगर के शुकतीर्थ स्थित निर्मोही अखाड़ा आश्रम के महाराज विष्णुदास से 28.50 लाख रुपये की ठगी के मामले का पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। इस संगठित ठगी गिरोह का मास्टरमाइंड आश्रम का ही सेवादार निकला, जिसने अपने साथियों के साथ मिलकर पूरी साजिश रची थी। पुलिस ने सरगना समेत सात आरोपितों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 22 लाख रुपये नकद, कंप्यूटर और फर्जी आधार कार्ड बरामद किए हैं। इस सफल कार्रवाई पर एसएसपी ने भोपा पुलिस टीम को 25 हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की है।
सेवादार ने रचा विश्वासघात का खेल
एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने पुलिस लाइन सभागार में प्रेसवार्ता के दौरान बताया कि हाथरस जनपद के थाना चंदपा क्षेत्र के गांव भघना निवासी महाराज विष्णुदास पिछले करीब 18 वर्षों से शुकतीर्थ में आश्रम संचालित कर रहे हैं। उनके आश्रम में पिछले आठ वर्षों से हासिम पुत्र मांगा निवासी नई बस्ती, भोकरहेड़ी सेवादार के रूप में कार्यरत था।
आरोपी हासिम ने आश्रम में रखी बड़ी धनराशि को देखकर लालच में आकर अपने साथियों के साथ ठगी की साजिश रची। उसने महाराज का विश्वास जीतकर उन्हें भूमि खरीदने का झांसा दिया।
फर्जी किसान, लेखपाल और नोटरी बनकर किया सौदा
17 फरवरी को आरोपी ने महाराज की मुलाकात सुखविंद्र पुत्र सोहनवीर निवासी गांव गादला से कराई, जिसे फर्जी किसान नजीर बनाकर पेश किया गया। आरोपी ने 42 बीघा पोपुलर पेड़ों वाली भूमि 31 लाख रुपये में बेचने का सौदा कराया। इसके बाद फैजान ने फर्जी भूमि दिखाई और रवीश कुमार को ‘रितेश’ नाम से फर्जी लेखपाल बनाकर भूमि की पैमाइश कराई गई।
इसके बाद गिरोह के अन्य सदस्य प्रवीण, अब्दुल कादिर समेत साथियों ने मिलकर फर्जी इकरारनामा और नोटरी दस्तावेज तैयार किए और महाराज से 28.50 लाख रुपये ठग लिए।
मुर्गी फार्म से गिरफ्तारी, भारी बरामदगी
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सभी सात आरोपितों को तुगलगपुर रोड स्थित सीकरी में सिराज के मुर्गी फार्म से गिरफ्तार किया। उनके पास से 22 लाख रुपये नकद, कंप्यूटर और फर्जी आधार कार्ड बनाने के उपकरण बरामद किए गए हैं। पूछताछ के बाद सभी आरोपितों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है।
गिरोह में पढ़े-लिखे सदस्य भी शामिल
एसएसपी के अनुसार, गिरोह का सरगना हासिम भले ही केवल साक्षर है, लेकिन उसके गिरोह में पढ़े-लिखे लोग भी शामिल थे। प्रवीण डबल एमए है और वर्ष 2016 में यूपीपीसीएस परीक्षा दे चुका है, जबकि अब्दुल कादिर और अन्य सदस्य 12वीं पास हैं। अब्दुल कादिर ने ही फर्जी आधार कार्ड तैयार किए थे।
एक-एक लाख रुपये देकर तैयार किया गया गिरोह
पुलिस जांच में सामने आया है कि हासिम ने गिरोह के प्रत्येक सदस्य को एक-एक लाख रुपये देकर इस साजिश में शामिल किया था। इन सदस्यों को किसान, लेखपाल और नोटरी अधिकारी बनकर ठगी को अंजाम देने की जिम्मेदारी दी गई थी।
महाराज ने जताया आभार
इस पूरे मामले के खुलासे के बाद महाराज विष्णुदास ने एसएसपी और भोपा पुलिस टीम का आभार व्यक्त किया है। पुलिस अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि भूमि खरीद-फरोख्त के दौरान दस्तावेजों की अच्छी तरह जांच करें और किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत पुलिस को सूचना दें।
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