वाराणसी बना अवैध असलहा तस्करी का हब, STF की कार्रवाई में कई गिरोहों का खुलासा
धर्म और शिक्षा की नगरी वाराणसी अब अवैध असलहा तस्करी के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरती नजर आ रही है। बिहार, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और नेपाल से अवैध हथियार यहां लाए जा रहे हैं और फिर देश के अन्य हिस्सों में सप्लाई किए जा रहे हैं।
युवाओं की बढ़ती संलिप्तता चिंता का विषय
इस अवैध कारोबार का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि स्थानीय युवा भी इसमें तेजी से शामिल हो रहे हैं। मोटी कमाई के लालच में वे तस्करी के इस नेटवर्क का हिस्सा बन रहे हैं और आसानी से हथियारों की उपलब्धता के कारण अपराधों में वृद्धि हो रही है।
हाल ही में एक कॉलेज छात्र सूर्य प्रताप सिंह की हत्या में प्रयुक्त पिस्टल भी इसी नेटवर्क से जुड़ी बताई जा रही है, जिसे आरोपी ने करीब 28 हजार रुपये में खरीदा था।
STF ने किया बड़े गिरोहों का पर्दाफाश
उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने हाल के दिनों में कई बड़ी कार्रवाइयां करते हुए अंतरराज्यीय असलहा तस्करी गिरोहों का खुलासा किया है।
एक कार्रवाई में STF ने तीन तस्करों को गिरफ्तार कर उनके पास से 10 पिस्टल, 15 मैगजीन, तीन मोबाइल फोन और नकदी बरामद की। गिरफ्तार आरोपितों में गाजीपुर और बिहार के निवासी शामिल हैं।
इसी तरह एक अन्य मामले में देवरिया निवासी संग्राम सिंह को गिरफ्तार किया गया, जिसके पास से पांच पिस्टल (.32 बोर) बरामद हुईं।
इसके अलावा चौबेपुर निवासी समर बहादुर सिंह और बिहार के मुंगेर निवासी भोला कुमार को गिरफ्तार कर उनके पास से चार पिस्टल, सात मैगजीन और मोबाइल फोन बरामद किए गए।
श्रद्धालुओं की भीड़ में छिप जाते हैं तस्कर
वाराणसी में हर दिन आने वाले हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ का फायदा उठाकर तस्कर आसानी से अपनी पहचान छिपा लेते हैं। यही वजह है कि यह शहर अवैध हथियारों के ट्रांजिट प्वाइंट के रूप में तेजी से उभर रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती
लगातार सामने आ रहे मामलों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। रामपुर पीएसी और मीरजापुर पीएससी कारतूस प्रकरण में भी वाराणसी कनेक्शन सामने आ चुका है।
पुलिस और प्रशासन के सामने अब इस पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की बड़ी चुनौती है। इसके लिए सख्त निगरानी, खुफिया तंत्र को मजबूत करने और अंतरराज्यीय समन्वय बढ़ाने की जरूरत बताई जा रही है।
सख्त कार्रवाई की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस अवैध तस्करी पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो यह कानून व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
ऐसे में स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को मिलकर ठोस रणनीति बनानी होगी, ताकि वाराणसी की पहचान और सुरक्षा दोनों को सुरक्षित रखा जा सके।
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