वाराणसी: विद्युत विभाग का ब्लैकआउट कहीं राख हुई सरकारी संपत्ति तो कहीं उजड़ गया एक परिवार
वाराणसी: उत्तर प्रदेश के ऊर्जा विभाग और वाराणसी के विद्युत मैनेजमेंट के लिए पिछले 24 घंटे किसी भयावह त्रासदी से कम नहीं रहे। देश के प्रधानमंत्री जी के संसदीय नगरी काशी में बिजली विभाग की लापरवाही ने न केवल करोड़ों की सरकारी संपत्ति को स्वाहा कर दिया बल्कि एक निष्ठावान संविदा कर्मी के घर का चिराग भी हमेशा के लिए बुझा दिया। भिखारीपुर वर्कशॉप की धधकती लपटें और कोयलहवा में पसरा मातम आज विभाग की जर्जर व्यवस्था और संवेदनहीन कार्यप्रणाली पर ऐसे सवाल दाग रहे हैं जिनका जवाब देने की हिम्मत शायद ही किसी आला अधिकारी में हो।
कोयलहवा पावर हाउस ड्यूटी की वेदी पर रामजी की बलि
वाराणसी के पंचम डिवीजन के अंतर्गत आने वाले 33/11 केवी कोयलहवा पावर हाउस में आज जो हुआ उसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। कांशीराम आवास क्षेत्र में बिजली आपूर्ति बहाल करने की जद्दोजहद में जुटे संविदा लाइनमैन रामजी सोनकर को क्या पता था कि जिस बिजली को वो दूसरों के घर रोशन करने के लिए ठीक कर रहे हैं वही उनके जीवन में अंधेरा कर देगी। कार्य के दौरान करंट की चपेट में आने से रामजी की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
खजूरी निवासी रामजी सोनकर ने अपने जीवन के 26 बेशकीमती साल विभाग की सेवा में खपा दिए लेकिन बदले में विभाग ने उन्हें क्या दिया। एक ठंडी लाश और उनके पांच मासूम बच्चों जिनमें तीन लड़के और दो लड़कियां शामिल हैं उनके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए छिन गया।
अब सबसे बड़ा और चुभता हुआ सवाल यह है कि क्या बिजली विभाग और प्रदेश का ऊर्जा मंत्रालय इन अनाथ बच्चों की जिम्मेदारी उठाएगा। क्या रामजी की 26 साल की सेवा का मोल चंद रुपयों के मुआवजे से तौला जाएगा या उनके परिवार को वह सम्मान और सुरक्षा मिलेगी जिसके वे हकदार हैं।
भिखारीपुर अग्निकांड भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़े करोड़ों के ट्रांसफार्मर
एक तरफ कोयलहवा में मातम था तो दूसरी तरफ सोमवार की रात भिखारीपुर स्थित मुख्य वर्कशॉप के स्क्रैप गोदाम में लगी आग ने विभाग के मैनेजमेंट की बखिया उधेड़ कर रख दी। इस भीषण अग्निकांड में लगभग 70 ट्रांसफार्मर और भारी मात्रा में कीमती तार व उपकरण जलकर खाक हो गए। आग की लपटें इतनी विकराल थीं कि दूर दूर तक आकाश लाल हो गया लेकिन विभाग की सुरक्षा तैयारियां शून्य नजर आईं।
हैरानी की बात यह है कि जिस वर्कशॉप में करोड़ों का सामान रखा था वहां आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम तक नहीं थे। क्या यह महज एक दुर्घटना है या फिर पुराने स्क्रैप और ऑडिट के झोल को छिपाने के लिए शॉर्ट सर्किट का सहारा लिया गया है। इसकी उच्च स्तरीय जांच समय की मांग है।
व्यवस्था से तीखे सवाल कब तक बलि चढ़ते रहेंगे संविदा कर्मी
वाराणसी की इन दो घटनाओं ने सीधे तौर पर विद्युत विभाग और संबंधित मंत्रालय को कठघरे में खड़ा कर दिया है। आज पूरा शहर और आक्रोशित कर्मचारी कुछ बुनियादी सवाल पूछ रहे हैं।
सुरक्षा किट का अकाल
क्या फील्ड में काम करने वाले संविदा कर्मियों के पास आईएसआई मार्क वाली ग्लव्स हेलमेट और सेफ्टी बेल्ट जैसी बुनियादी किट मौजूद है। या उन्हें हर बार मौत के खेल में बिना ढाल के उतारा जा रहा है।
प्रशिक्षण का ढोंग
क्या संविदा कर्मियों को जोखिम भरे कार्यों के लिए कोई विधिवत ट्रेनिंग दी जाती है या सिर्फ जुगाड़ के भरोसे सिस्टम चल रहा है।
शटडाउन की खामी
रामजी सोनकर की मौत के दौरान क्या नियमानुसार शटडाउन लिया गया था। अगर लिया गया था तो लाइन में करंट कैसे आया। क्या यह किसी लाइनमैन या ऑपरेटर की आपसी तालमेल की कमी थी या जानबूझकर की गई लापरवाही।
अग्निशमन व्यवस्था
भिखारीपुर वर्कशॉप जैसे संवेदनशील स्थानों पर फायर फाइटिंग सिस्टम फेल क्यों था। क्या करोड़ों की संपत्ति की सुरक्षा के लिए केवल एक चौकीदार काफी है।
न्यूज़ रिपोर्ट पूछता है, सवाल बनकर संविदाकर्मियों की आवाज
वाराणसी विद्युत विभाग के लिए यह समय आत्ममंथन का नहीं बल्कि जवाबदेही तय करने का है। एक तरफ सरकारी खजाने को करोड़ों की चपत लगी है और दूसरी तरफ एक गरीब परिवार पूरी तरह तबाह हो गया है। अगर अब भी मंत्रालय और अधिकारी अपनी नींद से नहीं जागे तो वाराणसी की बिजली व्यवस्था केवल फाल्ट और मौत के बीच झूलती रहेगी। रामजी सोनकर का परिवार आज इंसाफ मांग रहा है और काशी की जनता अपनी सुरक्षा का हिसाब।
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