सारनाथ थाना क्षेत्र में विवादित भूमि पर जबरन बाउंड्रीवाल का प्रयास
अमित मिश्रा की रिपोर्ट : वाराणसी के सारनाथ थाना अंतर्गत पुराने पुल चौकी क्षेत्र में एक विवादित भूमि को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद गहराता जा रहा है। मामले की जड़ यह है कि एक पक्ष उस जमीन पर जबरन बाउंड्रीवाल खड़ी करने पर आमादा है जबकि दूसरे पक्ष ने इसका कड़ा विरोध किया है। दोनों पक्षों के अपने अपने दावे हैं और मामला अभी तक राजस्व प्रशासन स्तर पर भी नहीं सुलझ पाया है।
एक माह पूर्व दोनों पक्षों ने दी थी लिखित तहरीर
सूत्रों के अनुसार करीब एक माह पहले दोनों पक्षों ने पुराने पुल चौकी प्रभारी को लिखित तहरीर दी थी। चौकी प्रभारी ने उस समय दोनों पक्षों को सख्त हिदायत दी थी कि जब तक मामले का विधिवत निस्तारण नहीं हो जाता तब तक कोई भी पक्ष उस भूमि पर बाउंड्रीवाल न कराए। चौकी प्रभारी ने यह भी स्पष्ट किया था कि यह मामला राजस्व प्रशासन के दायरे में आता है और इसे उसी स्तर पर हस्तांतरित किया जाएगा। लेकिन एक माह बीत जाने के बाद भी मामले का कोई ठोस निस्तारण नहीं हुआ और विवाद जस का तस बना हुआ है।
मोहम्मद अकरम कुरैशी पर जबरन निर्माण का आरोप
पुलिस की हिदायत और मामले के लंबित रहने के बावजूद एक पक्ष मोहम्मद अकरम कुरैशी उस विवादित भूमि पर जबरन बाउंड्रीवाल कराने की कोशिश में लगा हुआ है। आरोप है कि बिना किसी वैध आदेश के और राजस्व विभाग की अनुमति के बिना ही निर्माण कार्य शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है। दूसरे पक्ष का कहना है कि इस तरह की दबंगई से जमीनी विवाद और बिगड़ सकता है तथा इलाके का माहौल प्रभावित हो सकता है।
दोनों पक्षों के बैनामे का दावा, मामला उलझा
इस पूरे विवाद की जटिलता यह है कि दोनों पक्ष उस भूमि का बैनामा अपने पक्ष में होने का दावा करते हैं। दूसरे पक्ष लखेन्द्र पाल का कहना है कि उन्होंने उक्त भूमि का विधिवत बैनामा कराया है और उसका दाखिल खारिज भी हो चुका है जो उनके स्वामित्व को कानूनी रूप से प्रमाणित करता है। वहीं मोहम्मद अकरम कुरैशी ने भी उसी भूमि का बैनामा होने का दावा किया है। दोनों के दावे आमने सामने होने की वजह से यह मामला सीधे राजस्व विभाग के विवेक और जांच का विषय बन गया है।
लखेन्द्र पाल की मांग, राजस्व आदेश से हो निर्माण
लखेन्द्र पाल ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यह मामला पूरी तरह से राजस्व का है और किसी भी पक्ष को तब तक बाउंड्रीवाल नहीं करानी चाहिए जब तक राजस्व विभाग या सक्षम न्यायालय का स्पष्ट आदेश नहीं आ जाता। उनका तर्क है कि बिना आदेश के की जाने वाली किसी भी निर्माण गतिविधि को जबरदस्ती की श्रेणी में ही माना जाएगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए तत्काल कार्रवाई की जाए ताकि विवाद को और बढ़ने से रोका जा सके।
राजस्व प्रशासन की चुप्पी से बढ़ रहा है विवाद
इस पूरे प्रकरण में सबसे अहम सवाल यह है कि जब चौकी प्रभारी ने एक माह पहले ही मामले को राजस्व प्रशासन को हस्तांतरित करने की बात कही थी तो अब तक उस दिशा में कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया। राजस्व विभाग की निष्क्रियता की वजह से एक पक्ष को यह अवसर मिल रहा है कि वह विवादित भूमि पर अपना दखल जमाने की कोशिश करे। जानकारों का मानना है कि यदि राजस्व प्रशासन समय रहते मामले की सुनवाई कर दोनों पक्षों के दस्तावेजों की जांच करता तो यह विवाद इस मुकाम तक नहीं पहुंचता। अब जरूरत इस बात की है कि जिला प्रशासन इस मामले में हस्तक्षेप करे और दोनों पक्षों के दावों की निष्पक्ष जांच कराकर विधिसम्मत निर्णय लिया जाए।
पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन और पुलिस समय रहते सक्रिय नहीं हुई तो यह भूमि विवाद कभी भी बड़े टकराव का रूप ले सकता है। चौकी प्रभारी की हिदायत के बावजूद एक पक्ष का जबरन निर्माण कराने पर अड़े रहना इस बात का संकेत है कि जमीनी स्तर पर प्रशासनिक आदेशों की अनदेखी की जा रही है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जरूरी है कि राजस्व अधिकारी दोनों पक्षों के बैनामों और दाखिल खारिज संबंधी दस्तावेजों की विस्तृत जांच करें और यथाशीघ्र अपना निर्णय सुनाएं।
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