मुंबई से दो संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार, दिल्ली-मुंबई को दहलाने की थी साजिश, सोशल मीडिया के जरिए ले रहे थे ट्रेनिंग
दिल्ली/मुम्बई: देश की सुरक्षा एजेंसियों को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। केंद्रीय खुफिया इनपुट के आधार पर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और मुंबई एटीएस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए मुंबई से दो संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि दोनों आरोपी देश के प्रमुख महानगरों दिल्ली और मुंबई को निशाना बनाकर बड़े हमले की साजिश रच रहे थे। समय रहते की गई इस कार्रवाई से एक संभावित बड़ी आतंकी घटना को टाल दिया गया है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता एक बार फिर साबित हुई है।
आरोपियों की पहचान और पृष्ठभूमि
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मुशाब अहमद उर्फ कलाम और मोहम्मद अमाद के रूप में हुई है। मुशाब मुंबई के कल्याण क्षेत्र का निवासी बताया जा रहा है, जबकि अमाद पश्चिमी मुंबई इलाके का रहने वाला है। जांच एजेंसियों के अनुसार, दोनों पिछले काफी समय से पाकिस्तान में सक्रिय एक आतंकी हैंडलर के संपर्क में थे और उसके निर्देशों पर काम कर रहे थे।
सोशल मीडिया के जरिए ले रहे थे ट्रेनिंग
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि दोनों आरोपी इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से बम बनाने की ट्रेनिंग हासिल कर रहे थे। वे टेलीग्राम, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम जैसे माध्यमों का इस्तेमाल कर गुप्त रूप से निर्देश प्राप्त कर रहे थे। बताया जा रहा है कि ये लोग “खिलौना बम” जैसे छोटे लेकिन घातक विस्फोटक उपकरण तैयार करने की योजना बना रहे थे, जिन्हें भीड़भाड़ वाले इलाकों में इस्तेमाल किया जा सकता था।
संदिग्ध संगठनों से जुड़े तार
सूत्रों के मुताबिक, इनका संबंध ‘मिशन खिलाफत’ और ‘सोल्जर ऑफ प्रॉफिट’ जैसे संदिग्ध समूहों से भी पाया गया है। ये संगठन सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा की ओर आकर्षित करते हैं और धीरे-धीरे उन्हें अपने नेटवर्क का हिस्सा बनाते हैं। इन प्लेटफॉर्म्स का उपयोग प्रचार-प्रसार के साथ-साथ प्रशिक्षण और ऑपरेशन की योजना बनाने के लिए भी किया जाता है।
युवाओं को बरगलाने की साजिश
सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि आरोपी केवल खुद ही सक्रिय नहीं थे, बल्कि वे अन्य युवाओं को भी इस नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश कर रहे थे। जांच में कुछ नाबालिगों के संपर्क में आने की बात भी सामने आई है, जिन्हें भड़काने और कट्टरपंथी बनाने का प्रयास किया जा रहा था। इस पहलू पर भी एजेंसियां गंभीरता से जांच कर रही हैं।
पहले मिले इनपुट से मिली सफलता
बताया जा रहा है कि कुछ समय पहले मुंबई एटीएस द्वारा पकड़े गए अन्य संदिग्धों से पूछताछ के दौरान इन दोनों आरोपियों के बारे में अहम जानकारी मिली थी। उसी आधार पर एजेंसियों ने निगरानी बढ़ाई और एक सुनियोजित रणनीति के तहत इन्हें गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ जारी, नेटवर्क की तलाश
फिलहाल दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है, ताकि उनके नेटवर्क, फंडिंग स्रोतों और संभावित सहयोगियों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके। सुरक्षा एजेंसियों ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए देश के अन्य हिस्सों में भी इनके संपर्कों की तलाश शुरू कर दी है।
डिजिटल माध्यम बन रहे नया खतरा
यह मामला एक बार फिर इस बात को उजागर करता है कि आतंकी संगठन अब डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर अपने नेटवर्क को विस्तार दे रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को प्रभावित करना, उन्हें प्रशिक्षित करना और गुप्त तरीके से ऑपरेशन की योजना बनाना एक नई चुनौती बनता जा रहा है।
एजेंसियों की सतर्कता से टली बड़ी साजिश
हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों की मुस्तैदी और समय पर कार्रवाई ने एक बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में लगातार निगरानी और सख्त कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि देश की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता न हो।
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