लखीमपुर में 25 गिद्धों की मौत का मामला उलझा, PCCF असंतुष्ट, दोबारा जांच शुरू
लखीमपुर खीरी के भीरा रेंज के सिमरिया गांव में 25 गिद्धों की सामूहिक मौत का मामला वन विभाग के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) अनुराधा वेमुरी प्रारंभिक जांच से संतुष्ट नहीं हैं, जिसके बाद दुधवा टाइगर रिजर्व के अधिकारियों को दोबारा मौके पर भेजा गया है।
दोबारा मौके पर पहुंची उच्चस्तरीय टीम
PCCF के निर्देश पर दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक और पूर्व उप निदेशक सुंदरेष पांच दिन बाद फिर से घटनास्थल पहुंचे। सोमवार को अधिकारियों ने सिमरिया गांव पहुंचकर गिद्धों की मौत के कारणों की गहन पड़ताल की और ग्रामीणों से अलग-अलग बिंदुओं पर जानकारी जुटाई।
प्रारंभिक रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं PCCF
इससे पहले एपीसीसीएफ प्रोजेक्ट टाइगर रामकुमार ने घटनास्थल का निरीक्षण कर रिपोर्ट दी थी, लेकिन PCCF अनुराधा वेमुरी इस रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि बिसरा रिपोर्ट आने से पहले ही मौत के कारणों की सच्चाई सामने लाना जरूरी है।
जहर से मौत की आशंका
प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि खेतों में डाले गए जहरीले चावल खाने से पहले कुछ कुत्तों की मौत हुई थी। बाद में उन्हीं कुत्तों के शवों को खाने से गिद्धों की मौत हो गई। अधिकारियों का कहना है कि यह एक गंभीर लापरवाही या जानबूझकर की गई कार्रवाई हो सकती है।
सौना गांव का भी किया गया निरीक्षण
अधिकारियों ने सिमरिया के साथ-साथ सौना गांव का भी निरीक्षण किया, जहां जहरीले चावल डालने की बात सामने आई थी। निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों को चेतावनी दी गई कि यदि इस तरह की घटना में कोई संलिप्त पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कीटनाशकों के उपयोग पर सख्ती
वन निगम के प्रबंध निदेशक ने किसानों से अपील की है कि वे कीटनाशकों का सीमित और सुरक्षित उपयोग करें तथा विषैले पदार्थों को खुले में न फेंकें। साथ ही कीटनाशक विक्रेताओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे खरीदारों का पूरा रिकॉर्ड रखें।
रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल मामले की सच्चाई जानने के लिए विभिन्न सैंपलों की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। इसमें जहर खाए कुत्तों के शव, मृत गिद्धों के नमूने और चावल में मिले जहर की जांच रिपोर्ट शामिल है। इन रिपोर्टों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
निष्कर्ष
दुर्लभ प्रजाति के गिद्धों की सामूहिक मौत ने वन विभाग के साथ-साथ पर्यावरण प्रेमियों को भी चिंता में डाल दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्चस्तरीय जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
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