भारत विकास परिषद सृजन शाखा का चतुर्थ दायित्वग्रहण समारोह संपन्न, सेवा संस्कार और संकल्प के साथ नई कार्यकारिणी ने संभाली जिम्मेदारी
वाराणसी/गोरखपुर: दोनों जनपद क्षेत्र से जुड़े सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश में भारत विकास परिषद सृजन शाखा का चतुर्थ दायित्वग्रहण समारोह दायित्वग्रहण उदयन के रूप में भव्यता और गरिमा के साथ स्थानीय होटल रीजेन्सी परिसर में संपन्न हुआ। यह आयोजन केवल एक औपचारिक पदभार ग्रहण कार्यक्रम नहीं रहा बल्कि सेवा, संस्कार, राष्ट्रभावना और सामाजिक दायित्वों के समन्वय का एक व्यापक मंच बनकर सामने आया। कार्यक्रम में सामाजिक, प्रशासनिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों से जुड़ी अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष पहचान दी।
कार्यक्रम का शुभारंभ भारतीय सांस्कृतिक परंपरा के अनुरूप किया गया। मुख्य अतिथियों और नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने मां भारती और स्वामी विवेकानंद के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर दीप प्रज्वलित किया। इसके बाद वंदे मातरम् की सामूहिक प्रस्तुति हुई। पूरे सभागार में राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक चेतना का वातावरण देखने को मिला। उपस्थित लोगों ने इस आयोजन को केवल दायित्व ग्रहण नहीं बल्कि सामाजिक मूल्यों के पुनर्स्मरण का अवसर बताया।
श्रद्धांजलि के साथ हुई कार्यक्रम की भावनात्मक शुरुआत
समारोह का प्रारंभ एक भावनात्मक क्षण से हुआ। सृजन शाखा के सक्रिय और समर्पित सदस्य स्वर्गीय अनिल श्रीवास्तव के असामयिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी सदस्यों और अतिथियों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की। यह क्षण संगठन की पारिवारिक भावना और आपसी आत्मीयता का परिचायक बना। कई सदस्यों ने स्वर्गीय अनिल श्रीवास्तव के योगदान को याद करते हुए उनके व्यक्तित्व और कार्यशैली पर अपने विचार साझा किए।
सेवा कार्यों का प्रस्तुत किया गया विस्तृत प्रतिवेदन
कार्यक्रम के दौरान सत्र 2025 से 2026 में सृजन शाखा द्वारा किए गए सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। निवर्तमान एवं नवनिर्वाचित अध्यक्षा शशी श्रीवास्तव, सचिव डॉ रमा सिंह, कोषाध्यक्ष प्रवीण सिन्हा तथा महिला सहसंयोजिका रेखा शुक्ला ने संयुक्त रूप से शाखा की गतिविधियों का विवरण रखा। रिपोर्ट में शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, समाज सेवा और जनजागरूकता अभियानों से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों का उल्लेख किया गया।
प्रतिवेदन के दौरान बताया गया कि शाखा ने समाज के वंचित वर्गों तक पहुंचने और सेवा कार्यों को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने का प्रयास किया। संस्था द्वारा समय समय पर आयोजित रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य जांच कार्यक्रम, पौधरोपण अभियान और सामाजिक जागरूकता गतिविधियों की जानकारी भी साझा की गई।
पंचसूत्रों के माध्यम से संगठन के मूल विचारों पर हुआ मंथन
कार्यक्रम में संस्था के मुख्य संरक्षक ज्ञानेन्द्र बहादुर ने भारत विकास परिषद के मूल सिद्धांतों और उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने परिषद के पंचसूत्र संपर्क, सहयोग, संस्कार, सेवा और समर्पण की विस्तृत व्याख्या की। उन्होंने कहा कि यदि समाज इन पांच सिद्धांतों को आत्मसात कर ले तो सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण की दिशा में बड़ा परिवर्तन संभव है।
उन्होंने यह भी कहा कि संगठन की सफलता केवल पदों से नहीं बल्कि सामूहिक भागीदारी और सेवा भावना से तय होती है। उन्होंने नए सदस्यों से समाजहित के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
लगातार चौथी बार शशी श्रीवास्तव को मिली जिम्मेदारी
कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण और प्रतीक्षित क्षण नई कार्यकारिणी के दायित्वग्रहण का रहा। सत्र 2026 से 2027 के लिए नई टीम को औपचारिक रूप से शपथ दिलाई गई। प्रांतीय संगठन सचिव ऋषि शुक्ला और प्रांतीय अध्यक्ष हरविंदर वालिया ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को सेवा, अनुशासन और संगठन की गरिमा बनाए रखने की शपथ दिलाई।
सर्वसम्मति से शशी श्रीवास्तव को लगातार चौथी बार सृजन शाखा की अध्यक्षा चुना गया। इसे उनके नेतृत्व और संगठन के प्रति विश्वास का प्रमाण माना गया। इसके साथ ही डॉ रमा सिंह को सचिव और प्रवीण सिन्हा को पुनः कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई।
मुख्य अतिथि कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने रखे विचार
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा रहे। उन्होंने अपने संबोधन में भारत की सांस्कृतिक चेतना, ग्रामीण समाज और मूल्यों पर आधारित राष्ट्र निर्माण की अवधारणा पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है और जब तक हम अपनी जड़ों से जुड़े नहीं रहेंगे तब तक सामाजिक विकास अधूरा रहेगा।
उन्होंने कहा कि भारत विकास परिषद जैसे संगठन समाज को नैतिक और सांस्कृतिक रूप से मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वर्तमान समय में समाज को संस्कार और सामाजिक एकता की अधिक आवश्यकता है।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। राम स्तुति की प्रस्तुति ने पूरे सभागार को भक्तिमय वातावरण में बदल दिया। इसके बाद नशामुक्ति अभियान पर आधारित एक सामाजिक नाटक प्रस्तुत किया गया जिसने उपस्थित लोगों को गहरे स्तर पर प्रभावित किया। इस प्रस्तुति के माध्यम से समाज में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति के खिलाफ जागरूकता का संदेश दिया गया।
आभार ज्ञापन के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम का संचालन काव्या सिन्हा और शाम्भवी सिंह ने संयुक्त रूप से किया। अंत में शाखा के मार्गदर्शक शिवाजी श्रीवास्तव ने सभी अतिथियों, सदस्यों, मीडिया प्रतिनिधियों और सहयोगियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। आयोजन की सफलता में नवीन प्रकाश, संजय, पूनम, रंजना, अनिल, आकांक्षा, संध्या, ब्रजेश लाल, प्रदीप कुमार, बृजेश पाठक, अनिल अन्नू और उदय वेताल सहित कई सदस्यों की सक्रिय भूमिका रही। राष्ट्रगान के सामूहिक गायन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
LATEST NEWS