लखनऊ: स्मार्ट मीटर बदलाव पर ब्रेक उपभोक्ता शिकायतों के बाद सरकार सख्त
लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए पुराने बिजली मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदलने की प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब राज्य भर से स्मार्ट मीटरों को लेकर तकनीकी खामियों और उपभोक्ताओं की बढ़ती शिकायतें सामने आ रही थीं। सरकार के इस कदम को उपभोक्ताओं की समस्याओं को गंभीरता से लेने और व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
लगातार शिकायतों के बाद लिया गया फैसला
बीते कुछ महीनों में बड़ी संख्या में बिजली उपभोक्ताओं ने स्मार्ट मीटरों से जुड़ी समस्याओं को लेकर अपनी नाराजगी जताई थी। प्रमुख शिकायतों में यह सामने आया कि रिचार्ज करने के बावजूद बिजली कनेक्शन समय पर चालू नहीं हो रहा था। कई मामलों में बैलेंस अपडेट में देरी हो रही थी और उपभोक्ताओं को सही जानकारी नहीं मिल पा रही थी। इसके अलावा कई उपभोक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें उनकी सहमति के बिना प्रीपेड प्रणाली में स्थानांतरित कर दिया गया।
इन समस्याओं ने न केवल उपभोक्ताओं को असुविधा में डाला बल्कि बिजली वितरण व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए। इसी कारण सरकार को इस पूरे अभियान की समीक्षा करने की आवश्यकता महसूस हुई।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर बनी विशेषज्ञ समिति
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाया और पावर कॉरपोरेशन को तत्काल जांच के निर्देश दिए। इसके बाद चार सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है जिसे पूरे मामले की तकनीकी जांच कर दस दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है।
यह समिति स्मार्ट मीटरों की गुणवत्ता सॉफ्टवेयर सिस्टम और उपभोक्ता अनुभव से जुड़े सभी पहलुओं की गहराई से समीक्षा करेगी। इसके आधार पर यह तय किया जाएगा कि आगे इस योजना को किस प्रकार लागू किया जाए।
मीटर बदलने की प्रक्रिया फिलहाल स्थगित
ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के अनुसार जब तक समिति अपनी रिपोर्ट नहीं सौंपती तब तक पुराने मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदलने की प्रक्रिया पूरी तरह रोक दी गई है। हालांकि नए बिजली कनेक्शन देने की प्रक्रिया पूर्व की तरह स्मार्ट प्रीपेड मीटर के माध्यम से जारी रहेगी।
इस निर्णय से उन उपभोक्ताओं को राहत मिली है जो मीटर बदलने की प्रक्रिया को लेकर असमंजस और परेशानी का सामना कर रहे थे।
परियोजना की पृष्ठभूमि
स्मार्ट मीटर योजना केंद्र सरकार की पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना के तहत चलाई जा रही है जिसका उद्देश्य बिजली वितरण प्रणाली को आधुनिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। इस योजना के तहत प्रदेश में अब तक लगभग पचासी लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं जिनमें से सत्तर लाख से अधिक उपभोक्ता प्रीपेड प्रणाली से जुड़े हैं।
हालांकि तकनीकी समस्याओं और उपभोक्ता असंतोष के कारण इस योजना के क्रियान्वयन पर प्रश्न उठने लगे थे जिससे सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा।
भविष्य की रणनीति पर नजर
अब सभी की निगाहें विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं जिसके आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। यह माना जा रहा है कि यदि तकनीकी खामियों को दूर कर दिया जाता है तो भविष्य में इस योजना को और बेहतर तरीके से लागू किया जा सकता है।
सरकार का यह कदम यह संकेत देता है कि वह केवल तकनीकी सुधार पर ही नहीं बल्कि उपभोक्ताओं की सुविधा और विश्वास को भी समान महत्व दे रही है। आने वाले समय में इस योजना में सुधार के बाद इसे पुनः लागू करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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