खरगे के बयान पर सियासी संग्राम तेज: भाजपा ने चुनाव आयोग से की सख्त कार्रवाई की मांग
नई दिल्ली/तमिलनाडु:
देश में जारी चुनावी माहौल के बीच राजनीतिक बयानबाजी एक बार फिर केंद्र में आ गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर दिए गए विवादित बयान ने सियासी तापमान को अचानक बढ़ा दिया है। इस बयान को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कड़ी आपत्ति जताते हुए चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया है और इसे लोकतांत्रिक मर्यादा के खिलाफ बताते हुए कठोर कार्रवाई की मांग की है।
दरअसल, तमिलनाडु में आयोजित एक चुनावी रैली के दौरान खरगे ने प्रधानमंत्री की तुलना आतंकवादी से कर दी थी। इस टिप्पणी के सामने आने के बाद भाजपा ने इसे न केवल आपत्तिजनक और अनुचित बताया, बल्कि इसे सीधे तौर पर आदर्श आचार संहिता (MCC) का उल्लंघन करार दिया। पार्टी का कहना है कि इस तरह के बयान न केवल व्यक्तिगत स्तर पर अपमानजनक हैं, बल्कि इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं और उच्च पदों की गरिमा भी प्रभावित होती है।
चुनाव आयोग को सौंपा गया औपचारिक पत्र
भाजपा की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त सहित अन्य आयुक्तों को एक विस्तृत पत्र भेजा गया है, जिसमें पूरे घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए तत्काल संज्ञान लेने का अनुरोध किया गया है। पत्र में कहा गया है कि चुनावी माहौल में इस तरह की भाषा का प्रयोग मतदाताओं को गुमराह करने के साथ-साथ राजनीतिक वातावरण को विषाक्त बनाता है।
पार्टी ने आयोग से मांग की है कि कांग्रेस अध्यक्ष को सार्वजनिक रूप से अपने बयान के लिए माफी मांगने या उसे वापस लेने का निर्देश दिया जाए। साथ ही यह भी आग्रह किया गया है कि चुनाव आयोग अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए उनके चुनाव प्रचार पर उचित प्रतिबंध लगाए या अन्य सुधारात्मक कदम उठाए, ताकि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और मर्यादा बनी रहे।
कानूनी कार्रवाई की भी उठी मांग
भाजपा ने इस मामले को केवल चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि कानूनी कार्रवाई की भी मांग की है। पार्टी ने अपने पत्र में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की विभिन्न धाराओं का उल्लेख करते हुए कहा है कि इस बयान की गंभीरता को देखते हुए दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।
पत्र में विशेष रूप से धारा 175, 171/174 और 356(1) सहित अन्य लागू प्रावधानों के तहत मामला दर्ज करने की मांग की गई है। भाजपा का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो कानून के अनुसार संबंधित व्यक्ति को परिणाम भुगतना चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की बयानबाजी पर रोक लग सके।
गरिमा और शुचिता का मुद्दा बना केंद्र
भाजपा ने इस पूरे विवाद को प्रधानमंत्री पद की गरिमा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शुचिता से जोड़ते हुए कहा है कि चुनाव केवल राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का मंच नहीं, बल्कि जनविश्वास का आधार भी होते हैं। ऐसे में नेताओं को अपनी भाषा और आचरण में संयम बरतना चाहिए।
वहीं, इस घटनाक्रम के बाद सियासी गलियारों में बहस तेज हो गई है कि चुनावी राजनीति में बढ़ती तीखी बयानबाजी किस हद तक स्वीकार्य है और क्या इस पर सख्त नियंत्रण की आवश्यकता है। अब निगाहें चुनाव आयोग पर टिकी हैं, जो इस पूरे मामले में क्या रुख अपनाता है और क्या कदम उठाता है।
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