चैत्र नवरात्र मेले की तैयारियां तेज, मां विंध्यवासिनी के चरण स्पर्श पर रहेगा प्रतिबंध: 24 घंटे खुले रहेंगे मंदिर के कपाट
मिर्जापुर: चैत्र नवरात्र के पावन पर्व को लेकर विंध्याचल धाम में तैयारियां तेज हो गई हैं। मां विंध्यवासिनी के दर्शन के लिए हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं, ऐसे में प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने व्यवस्थाओं को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। इस बार चैत्र नवरात्र मेले के दौरान मां विंध्यवासिनी के चरण स्पर्श पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। श्रद्धालु केवल दूर से दर्शन और पूजन कर सकेंगे। हालांकि भक्तों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मंदिर के कपाट पूरे 24 घंटे खुले रहेंगे, जिससे अधिक से अधिक श्रद्धालु माता के दर्शन कर सकें।
श्री विंध्य पंडा समाज के अध्यक्ष पंकज द्विवेदी ने बताया कि नवरात्र मेले के दौरान प्रतिदिन चार पहर की आरती निर्धारित समय पर होगी। इन आरतियों के दौरान एक-एक घंटे के लिए मंदिर के कपाट बंद रखे जाएंगे। इसके अतिरिक्त पूरे समय श्रद्धालुओं के लिए मंदिर खुला रहेगा। उन्होंने बताया कि मंगला आरती भोर में 3 बजे से 4 बजे तक होगी। दोपहर की राजश्री आरती दोपहर 12 बजे से 1 बजे तक संपन्न होगी। वहीं संध्या आरती शाम 7 बजे से 8 बजे तक तथा बड़ी आरती रात 9 बजकर 30 मिनट से 10 बजकर 30 मिनट तक की जाएगी। इन आरतियों को छोड़कर लगभग 20 घंटे तक श्रद्धालु मंदिर में प्रवेश कर मां विंध्यवासिनी के दर्शन-पूजन कर सकेंगे।
पंडा समाज के मंत्री भानू पाठक ने बताया कि चैत्र नवरात्र के दौरान मां विंध्यवासिनी का शयन नहीं लगाया जाएगा। पूरे नौ दिनों तक माता भक्तों को निरंतर दर्शन देंगी। उन्होंने कहा कि भीड़ को नियंत्रित करने और व्यवस्था बनाए रखने के लिए इस बार चरण स्पर्श पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा।
मेले से पहले बदहाल दिख रही व्यवस्थाएं
चैत्र नवरात्र मेले की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है और अब इसमें केवल नौ दिन का समय शेष रह गया है। बावजूद इसके, कई जगहों पर तैयारियां अभी भी अधूरी नजर आ रही हैं। विंध्याचल रेलवे स्टेशन से मंदिर तक जाने वाले मुख्य मार्ग और विभिन्न गलियों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। जगह-जगह मलबा और कूड़े के ढेर पड़े हुए हैं, जिससे श्रद्धालुओं के आवागमन में कठिनाई होने की आशंका है।
मंदिर क्षेत्र तक जाने वाली प्रमुख गलियों जैसे भट्ट की गली, सेंट्रल बैंक गली, नाहर की गली, त्रिमुहानी गली, पश्चिम मुहाल गली, रामजी की गली, बावली गली और कोतवाली गली में नालों और नालियों के किनारे कूड़े का अंबार लगा हुआ है। अभी तक गंगा घाटों और प्रमुख मार्गों की सफाई का कार्य पूरी तरह शुरू नहीं हो पाया है। इसी प्रकार रोडवेज परिसर और प्राइवेट बस स्टैंड के आसपास भी गंदगी दिखाई दे रही है।
इसके अलावा विंध्याचल से मिर्जापुर जाने वाली सड़क की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। विंध्याचल रेलवे स्टेशन से मंदिर तक जाने वाले मुख्य मार्ग को 40 फीट चौड़ा तो कर दिया गया है, लेकिन निर्माण के बाद जगह-जगह मलबा पड़ा हुआ है। कीचड़ से भरी सड़क श्रद्धालुओं के लिए परेशानी का कारण बन सकती है।
केवल तीन घाटों पर होगा गंगा स्नान
इस बार चैत्र नवरात्र के दौरान गंगा स्नान को लेकर भी विशेष व्यवस्था की गई है। विंध्यधाम में विंध्य की पौड़ी के निर्माण कार्य के चलते कई घाटों पर स्नान पर अस्थायी रोक लगाई गई है। इमली घाट, गुदारा घाट, परशुराम घाट, भैरो घाट, बाबू घाट, देवी घाट और चिकना टोला घाट पर श्रद्धालुओं को स्नान की अनुमति नहीं होगी।
नगर पालिका प्रशासन ने बताया है कि इस बार केवल तीन घाटों—दिवान घाट, पक्का घाट और अखाड़ा घाट—पर ही श्रद्धालुओं के स्नान और ध्यान की व्यवस्था की जाएगी। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी जी. लाल ने बताया कि इन घाटों पर विशेष साफ-सफाई और सुरक्षा की व्यवस्था की जाएगी।
मेले में 24 घंटे मिलेगी बिजली
चैत्र नवरात्र मेले के दौरान बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विद्युत विभाग भी सक्रिय हो गया है। विंध्याचल फीडर, काली खोह फीडर और अष्टभुजा धाम फीडर पर मरम्मत कार्य तेजी से किया जा रहा है। इसके लिए सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक अस्थायी रूप से बिजली आपूर्ति बंद कर तकनीकी कार्य किए जा रहे हैं।
विंध्याचल धाम फीडर पर ट्रांसफार्मरों की मरम्मत के साथ जर्जर तारों को बदला जा रहा है। काली खोह मंदिर से हाईवे तक बिजली के तारों से सटे पेड़ों की टहनियों की कटाई भी की जा रही है। विद्युत विभाग के जूनियर इंजीनियर विनय कुमार वैश्य ने बताया कि नवरात्र मेले में 24 घंटे बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कार्य समय रहते पूरे किए जा रहे हैं।
पानी, प्रकाश और शौचालय की होगी व्यवस्था
नगर पालिका परिषद मिर्जापुर-विंध्याचल की ओर से मेले की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इस वर्ष मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए करीब 34 लाख रुपये से विभिन्न विकास कार्य कराए जाएंगे।
पेयजल की व्यवस्था के लिए नगर पालिका के 22 टैंकरों की मरम्मत कराई जाएगी, जिस पर लगभग 4.23 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। मेला क्षेत्र के 38 स्टैंड पोस्ट और पैडस्थलों की मरम्मत, पेंटिंग और पानी की टंकियों की सफाई पर भी करीब 4.24 लाख रुपये खर्च होंगे। इसके अलावा पाइपलाइन मरम्मत के लिए 2.50 लाख रुपये तथा अस्थायी प्याऊ, हैंडपंपों की मरम्मत और अन्य व्यवस्थाओं के लिए 3.50 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है।
नगर पालिका की ओर से 65 मिनी नलकूपों के रखरखाव और मरम्मत पर भी करीब 4.22 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। वहीं अस्थायी प्रकाश व्यवस्था, ध्वनि प्रसारण प्रणाली और पंडाल की व्यवस्था पर लगभग 9 लाख रुपये खर्च किए जाने की योजना है। अधिशासी अधिकारी जी. लाल ने बताया कि नवरात्र मेले से पहले सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएंगी ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
मां विंध्यवासिनी की पौराणिक कथा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां विंध्यवासिनी को देवी दुर्गा का स्वरूप माना जाता है। पुराणों में वर्णन मिलता है कि जब भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था, तब कंस उन्हें मारने के लिए गोकुल पहुंचा। उस समय योगमाया ने श्रीकृष्ण की जगह जन्म लेकर कंस के हाथ से छूटते ही आकाश में प्रकट होकर कहा कि तुम्हें मारने वाला जन्म ले चुका है। इसके बाद देवी विंध्य पर्वत पर आकर विराजमान हो गईं और तभी से उन्हें विंध्यवासिनी के नाम से पूजा जाता है।
विंध्याचल धाम को शक्ति के प्रमुख पीठों में माना जाता है। यहां मां विंध्यवासिनी, अष्टभुजा देवी और काली खोह मंदिर की त्रिकोणीय परिक्रमा को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। नवरात्र के दिनों में लाखों श्रद्धालु इस त्रिकोण परिक्रमा को पूरा करते हैं।
चैत्र नवरात्र 2026 की तिथियां
चैत्र नवरात्र हिंदू नववर्ष के आरंभ का भी प्रतीक माना जाता है। वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्र की शुरुआत 19 मार्च 2026 (गुरुवार) से होगी और 27 मार्च 2026 (शुक्रवार) को रामनवमी के साथ इसका समापन होगा।
नवरात्र के नौ दिनों में देवी के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है—
1. 19 मार्च – मां शैलपुत्री
2. 20 मार्च – मां ब्रह्मचारिणी
3. 21 मार्च – मां चंद्रघंटा
4. 22 मार्च – मां कूष्मांडा
5. 23 मार्च – मां स्कंदमाता
6. 24 मार्च – मां कात्यायनी
7. 25 मार्च – मां कालरात्रि
8. 26 मार्च – मां महागौरी
9. 27 मार्च – मां सिद्धिदात्री (राम नवमी)
नवरात्र व्रत की विधि
चैत्र नवरात्र के पहले दिन श्रद्धालु घरों में कलश स्थापना कर देवी दुर्गा की पूजा करते हैं। पूजा स्थान को स्वच्छ कर लाल कपड़ा बिछाया जाता है और मिट्टी के पात्र में जौ बोए जाते हैं। इसके बाद कलश में जल भरकर उस पर नारियल और आम के पत्ते रखे जाते हैं।
प्रतिदिन सुबह और शाम देवी दुर्गा की पूजा, आरती और दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है। श्रद्धालु फलाहार या सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन कर व्रत का समापन किया जाता है।
नवरात्र का धार्मिक महत्व
चैत्र नवरात्र को शक्ति साधना का विशेष समय माना जाता है। मान्यता है कि इन नौ दिनों में मां दुर्गा की उपासना करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। विंध्याचल धाम में नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ता है और पूरा क्षेत्र भक्ति और आस्था के वातावरण से सराबोर हो जाता है।
इस बार भी प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की ओर से दावा किया जा रहा है कि मेले से पहले सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएंगी, ताकि देश के कोने-कोने से आने वाले श्रद्धालुओं को मां विंध्यवासिनी के दर्शन में किसी प्रकार की असुविधा न हो।
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