वाराणसी: दिव्य स्वागत, आस्था की गूंज और सनातन संदेश,धीरेंद्र शास्त्री के आगमन से काशी हुई भाव विभोर, रथयात्रा में उद्घाटन के साथ दिया बड़ा बयान
वाराणसी: आध्यात्मिक ऊर्जा और आस्था की अनूठी पहचान काशी एक बार फिर उस समय भक्तिमय वातावरण में डूब गई, जब बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री रविवार को शहर पहुंचे। उनके आगमन ने न सिर्फ श्रद्धालुओं के उत्साह को चरम पर पहुंचाया, बल्कि पूरे शहर में भक्ति, विश्वास और सनातन चेतना की एक अलग ही लहर देखने को मिली। एयरपोर्ट से लेकर रथयात्रा क्षेत्र तक का लगभग एक किलोमीटर लंबा मार्ग फूलों की वर्षा और जय श्रीराम के जयघोष से गूंजता रहा।
रविवार शाम करीब 4 बजे वाराणसी एयरपोर्ट पर पहुंचने के बाद पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का भव्य स्वागत किया गया। करीब 5 बजे जब उनका काफिला रथयात्रा क्षेत्र की ओर बढ़ा, तो रास्ते में हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। उनके काफिले में करीब आठ गाड़ियां शामिल थीं। इस दौरान उन्होंने अपनी गाड़ी का सनरूफ खोलकर खड़े होकर भक्तों का अभिवादन किया और हाथ हिलाकर आशीर्वाद दिया। कुछ दूरी तक उन्होंने गाड़ी की छत पर बैठकर भी श्रद्धालुओं का अभिवादन स्वीकार किया, जिससे वहां मौजूद लोगों में उत्साह और भी बढ़ गया।
करीब एक किलोमीटर की इस भव्य यात्रा के बाद वह रथयात्रा स्थित नारायण दास ज्वेलरी शॉप पहुंचे, जहां उन्होंने विधिवत उद्घाटन किया। उद्घाटन के दौरान भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मौजूद रही और पूरे वातावरण में धार्मिक उल्लास साफ झलक रहा था।
काशी से जुड़ाव और धार्मिक टिप्पणी
इस मौके पर मीडिया से बातचीत करते हुए पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने काशी से अपने गहरे भावनात्मक जुड़ाव का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उन्हें बार बार काशी आने का सौभाग्य मिलता है और यह नगरी उनके लिए केवल एक स्थान नहीं, बल्कि आस्था और गुरु परंपरा से जुड़ा एक पवित्र केंद्र है। उन्होंने ज्ञानवापी परिसर का जिक्र करते हुए कहा कि वह भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं कि इस विषय पर न्यायालय जल्द निर्णय दे। उन्हें विश्वास है कि ईश्वर की कृपा से वहां अभिषेक होगा और भगवा ध्वज लहराएगा।
सामाजिक समरसता पर दिया संदेश
उन्होंने काशी की सामाजिक संरचना की भी सराहना की और कहा कि यहां हिंदू और मुस्लिम समुदाय साथ मिलकर रहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि काशी के मुस्लिम व्यापारियों को हिंदू श्रद्धालुओं से बड़ा आर्थिक सहयोग मिलता है, जो हिंदू समाज की उदारता को दर्शाता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि मंदिर के पास स्थित एक मजार पर मुस्लिमों से अधिक हिंदू श्रद्धा से माथा टेकते हैं, जो इस शहर की समन्वयकारी संस्कृति को दर्शाता है।
सनातन धर्म और वैश्विक दृष्टिकोण
सनातन धर्म के प्रचार प्रसार को लेकर उन्होंने कहा कि वे देश विदेश में लगातार दरबार लगाकर लोगों को जोड़ रहे हैं। उन्होंने दुनिया के विभिन्न धर्मों और देशों का जिक्र करते हुए कहा कि जिस तरह अन्य धर्मों के अपने अपने देश हैं, उसी तरह 150 करोड़ हिंदुओं के लिए भी एक निश्चित स्थान होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य धर्म का प्रचार है, राजनीति से उनका कोई संबंध नहीं है।
नारी शक्ति और सामाजिक विचार
महिला सशक्तिकरण पर बोलते हुए पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि भारत सदियों से नारी शक्ति की पूजा करता आया है। उन्होंने समाज से अपील की कि नारी का सम्मान किया जाए और उनकी शक्ति को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने महिला बिल को लेकर भी अपनी राय व्यक्त करते हुए कहा कि इसे पारित होना चाहिए था, क्योंकि नारी सशक्त होगी तो देश भी मजबूत होगा।
विदेश दौरे का अनुभव
उन्होंने अपने हालिया विदेश दौरे का भी जिक्र किया और बताया कि वे ऑस्ट्रेलिया से अभी अभी लौटे हैं, जहां उन्होंने संसद में प्रवचन दिया। वहां भी उन्होंने भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का संदेश दिया।
कार्यक्रम में उपस्थिति और समापन
इस दौरान काशी विश्वनाथ मंदिर के वरिष्ठ अर्चक श्रीकांत मिश्रा भी उनके साथ मौजूद रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं में अपार उत्साह देखने को मिला और काशी की गलियां एक बार फिर भक्ति और विश्वास के रंग में रंगी नजर आईं।
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का यह दौरा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि उनके बयानों ने सामाजिक और सांस्कृतिक विमर्श को भी एक नई दिशा देने का काम किया। काशी में उनका यह आगमन लंबे समय तक श्रद्धालुओं की स्मृतियों में एक अलौकिक और अविस्मरणीय अनुभव के रूप में दर्ज रहेगा।
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