गोपालगंज के सिधवलिया में घोघरी नदी पर निर्माणाधीन पुल गिरा, तीन अभियंता निलंबित
गोपालगंज जिले के सिधवलिया प्रखंड अंतर्गत बखरौल कुर्मी टोला पथ पर घोघरी नदी के ऊपर बन रहे निर्माणाधीन आरसीसी पुल का एक हिस्सा ढलाई के दौरान गिर गया। नाबार्ड राज्य योजना के तहत बन रहे इस पुल हादसे को ग्रामीण कार्य विभाग ने गंभीरता से लेते हुए संबंधित अभियंताओं पर कड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने गोपालगंज कार्य प्रमंडल-2 के कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता और कनीय अभियंता को कार्य में लापरवाही बरतने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
ढलाई के दौरान गिरा स्पैन, बाल-बाल बचे मजदूर
विभागीय जानकारी के अनुसार एल-041 से एल-039 के बीच पुल का एक स्पैन ढलाई के दौरान क्षतिग्रस्त होकर गिर गया। हालांकि इस घटना में किसी भी प्रकार की जनहानि या गंभीर चोट की सूचना नहीं है। स्थानीय स्तर पर यह एक बड़ा हादसा हो सकता था, लेकिन सौभाग्य से मजदूरों और आसपास मौजूद लोगों को नुकसान नहीं पहुंचा।
घटना की सूचना मिलते ही विभागीय अधिकारियों ने मौके का संज्ञान लिया और तत्काल जांच प्रक्रिया शुरू कर दी।
जांच के लिए उच्चस्तरीय टीम गठित
ग्रामीण कार्य विभाग की ओर से मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता, नोडल पदाधिकारी और विभाग के वरीय पुल सलाहकार को घटनास्थल पर भेजा गया है। टीम द्वारा पुल निर्माण की गुणवत्ता, तकनीकी मानकों और ढलाई प्रक्रिया की गहन जांच की जा रही है।
प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि विभाग द्वारा सभी कार्यपालक अभियंताओं को पुल निर्माण से पूर्व वरीय पुल सलाहकार से डीपीआर की जांच कराने का स्पष्ट निर्देश दिया गया था। इसके बावजूद संबंधित अभियंता एवं संवेदक ने इस निर्देश का पालन नहीं किया।
संवेदक पर भी कार्रवाई की तैयारी
इस परियोजना का निर्माण कार्य बापूधाम कंस्ट्रक्शन, मोतिहारी द्वारा किया जा रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार संवेदक के विरुद्ध भी अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन और तकनीकी लापरवाही के आधार पर कार्रवाई की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।
विभाग का कहना है कि गुणवत्ता मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है। दोषी पाए जाने पर संबंधित एजेंसी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
पिछले वर्ष शुरू हुआ था निर्माण कार्य
उल्लेखनीय है कि घोघरी नदी पर इस आरसीसी पुल का निर्माण कार्य 7 मार्च 2025 को प्रारंभ हुआ था। विभाग द्वारा इसे 6 मार्च 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह पुल क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग माना जा रहा है, जिससे आवागमन में काफी सुविधा होने की उम्मीद थी।
विभाग द्वारा 28 फरवरी को आयोजित समीक्षा बैठक में भी सभी कार्य प्रमंडलों को अपने-अपने पुल निर्माण कार्यों की डीपीआर की समीक्षा वरीय पुल सलाहकार से कराने का निर्देश दोहराया गया था। इसके बावजूद संबंधित स्तर पर निर्देशों की अनदेखी सामने आने से विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है।
गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर जोर
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि वरीय पुल सलाहकारों द्वारा डीपीआर की जांच और तकनीकी आकलन से निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकती है। इससे भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सकेगी।
फिलहाल जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक परियोजनाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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