इस ऐतिहासिक अवसर को अविस्मरणीय बनाने के लिए भूतपूर्व सैनिकों के प्रतिष्ठित संगठन ‘इंडियन वेटरेनस ऑर्गेनाइजेशन’ और समस्त ग्रामवासियों ने पलक-पावड़े बिछा दिए थे। जैसे ही लेफ्टिनेंट हौसिला प्रसाद यादव का काफिला गांव की सीमा में दाखिल हुआ, ढोल-नगाड़ों की गूंज और ‘भारत माता की जय’ के गगनभेदी उद्घोष ने आसमान गुंजायमान कर दिया। यह केवल एक सैनिक की घर वापसी नहीं थी, बल्कि यह उस अनुशासन, त्याग और तपस्या का सम्मान था जो उन्होंने पिछले 30 वर्षों में देश के विभिन्न दुर्गम स्थानों पर तैनात रहकर निभाया है। इंडियन वेटरेनस ऑर्गेनाइजेशन ने इस कार्यक्रम को एक भव्य समारोह का रूप देते हुए यह संदेश दिया कि सेना की वर्दी उतरने के बाद भी सैनिक का सम्मान समाज के लिए सर्वोपरि है।
स्वागत समारोह की गरिमा बढ़ाने के लिए इंडियन वेटरेनस ऑर्गेनाइजेशन के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और सदस्य विशेष रूप से उपस्थित रहे। संगठन के जिला महासचिव (वाराणसी) जियाउल हक, संतोष यादव और अमरजीत यादव की मौजूदगी ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। इन विशिष्ट अतिथियों ने लेफ्टिनेंट यादव का माल्यार्पण कर और अंगवस्त्र भेंट कर उनका नागरिक अभिनंदन किया। इस दौरान उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि लेफ्टिनेंट हौसिला प्रसाद यादव का जीवन आज की युवा पीढ़ी के लिए एक खुली किताब और प्रेरणा का स्रोत है। उनका 30 वर्षों का लंबा कार्यकाल यह सिखाता है कि राष्ट्रप्रेम से बड़ा कोई धर्म नहीं और वर्दी के प्रति निष्ठा से बड़ी कोई पूजा नहीं। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि ऐसे जांबाज ही समाज में अनुशासन और देशभक्ति की अलख जगाए रखते हैं।
कार्यक्रम के दौरान इंडियन वेटरेनस ऑर्गेनाइजेशन ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए स्पष्ट किया कि उनका संगठन पूर्व सैनिकों के सम्मान, उनके अधिकारों की रक्षा और उनके कल्याण के लिए सदैव संघर्षरत रहेगा। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि एक सैनिक जब रिटायर होकर लौटता है, तो समाज का यह नैतिक दायित्व बनता है कि वह उन्हें सिर-आंखों पर बिठाए, क्योंकि हम अपने घरों में सुरक्षित इसलिए हैं क्योंकि हौसिला प्रसाद यादव जैसे वीर जवान सीमा पर जागते रहे हैं। समारोह का समापन राष्ट्रगान और गगनभेदी “जय हिंद” के नारों के साथ हुआ, जिससे पूरा वातावरण देशभक्ति के ज्वार में डूब गया। लेफ्टिनेंट यादव के चेहरे पर संतोष और आंखों में अपनों के बीच लौटने की चमक स्पष्ट देखी जा सकती थी, जो उनकी गौरवशाली सेवा का प्रमाण थी।

