लखीमपुर में सड़क हादसे में मादा तेंदुए की मौत, वन विभाग ने शुरू की जांच
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के संपूर्णानगर क्षेत्र से एक दुखद घटना सामने आई है, जहां शुक्रवार रात एक मादा तेंदुए की अज्ञात वाहन की चपेट में आने से मौत हो गई। यह हादसा उस समय हुआ जब तेंदुआ खेतों से निकलकर सड़क पार कर रहा था। घटना के बाद वन विभाग में हड़कंप मच गया और टीम तुरंत मौके पर पहुंची।
सड़क पार करते समय हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार, यह घटना संपूर्णानगर वन रेंज के हजारा बीट क्षेत्र में नेहरू नगर से भरजूनिया मार्ग पर हुई। शुक्रवार रात करीब 8 से 9 बजे के बीच एक मादा तेंदुआ सड़क पार कर रही थी, तभी तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने उसे टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि तेंदुए की मौके पर ही मौत हो गई।
वन विभाग ने शव को कब्जे में लिया
घटना की सूचना वन विभाग को रात करीब 9 बजे मिली, जिसके बाद टीम 9:30 बजे मौके पर पहुंची। वनकर्मियों ने तेंदुए के शव को कब्जे में लेकर संपूर्णानगर रेंज कार्यालय पहुंचाया, जहां पोस्टमार्टम की तैयारी की गई। हालांकि देर शाम तक पोस्टमार्टम शुरू नहीं हो पाया था।
मादा तेंदुए की उम्र 5-6 वर्ष
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मृत तेंदुआ मादा थी और उसकी उम्र लगभग 5 से 6 वर्ष के बीच बताई जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही उसकी मौत के सटीक कारणों की पुष्टि हो सकेगी।
खेत खाली होने से बढ़ी वन्यजीवों की आवाजाही
स्थानीय लोगों का कहना है कि इन दिनों गन्ने की फसल की छिलाई हो चुकी है और खेत खाली हो गए हैं। ऐसे में वन्यजीव अपने ठिकानों से निकलकर जंगल की ओर लौट रहे हैं, जिसके चलते सड़कों पर उनकी आवाजाही बढ़ गई है। इससे दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है।
अज्ञात वाहन चालक फरार, जांच जारी
हादसे के बाद वाहन चालक मौके से फरार हो गया और अब तक उसकी पहचान नहीं हो सकी है। वन विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आसपास के मार्गों पर लगे चौकियों के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। साथ ही स्थानीय लोगों से भी पूछताछ की जा रही है।
वन विभाग का बयान
वन क्षेत्राधिकारी ललित कुमार ने बताया कि सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची और शव को सुरक्षित रेंज कार्यालय लाया गया। उन्होंने बताया कि यह दुर्घटना किसी अज्ञात वाहन की टक्कर से हुई है और मामले की जांच की जा रही है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर उन इलाकों में जहां जंगल और आबादी के बीच सड़कें गुजरती हैं, वहां उचित सुरक्षा उपायों की कमी साफ नजर आती है।
गौरतलब है कि पीलीभीत के जंगलों में शाम के बाद वाहनों के संचालन पर रोक रहती है, लेकिन अन्य क्षेत्रों में इस तरह की सख्ती नहीं होने से वन्यजीवों के लिए खतरा बना रहता है।
निष्कर्ष
लखीमपुर की यह घटना वन्यजीव संरक्षण और सड़क सुरक्षा के बीच संतुलन की जरूरत को उजागर करती है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो इस तरह की घटनाएं भविष्य में और बढ़ सकती हैं।
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